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आजादी का अमृत महोत्सव के तहत ग्रामीण महिलाओं ने सीखा स्वादिष्ट व्यंजन बनाना
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Rural women learned to make delicious dishes under the Amrit Mahotsav of Azadi
- फोटो : Ambala
(अंबाला) साहा। कृषि विज्ञान केंद्र तेपला में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत प्रशिक्षण का कार्यक्रम आरंभ हुआ। 21 दिवसीय मौसमी फसलों के मूल्य वर्धन विषय पर आधारित प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को दिया गया। इसमें गांव छज्जन माजरा, अहमदपुर एवं अन्य गांव से लगभग 52 महिलाएं प्रतिभागी के तौर पर मौजूद रहीं।
कार्यक्रम संचालक एवं केविके की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान ने भोजन के सभी वर्गों एवं पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पांच खाद्य वर्गों को प्रतिदिन खाने में इस्तेमाल करना आवश्यक है। दाल, चावल इत्यादि के उत्पाद बनाकर महिलाएं घरेलू स्तर पर ही काफी बचत कर सकती है। उन्होंने मूंग दाल के चिल्ले, अंकुरित दाल की कचौरी, सूजी से इडली, गुजिया, तिल, मूंगफली एवं गुड़ गजक, केक इत्यादि पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन बनाए और पोषण थाली का प्रदर्शन करके महिलाओं को पोषकता अपनाने का आह्वान किया।
फिल्म शो द्वारा भी विभिन्न व्यंजनों को बनाने की विधियां महिलाओं ने सीखी। डॉ. विक्रम धीरेंद्र सिंह, पौध संरक्षण विशेषज्ञ ने पुरानी परंपराओं को पुन: अपनाने, गुड़ व शक्कर का प्रयोग, घर पर बनी मिठाइयों का प्रयोग, बाहरी वस्तुओं का कम इस्तेमाल इत्यादि पर प्रकाश डाला।
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डॉ. अमित कुमार उद्यान विशेषज्ञ ने पोषण वाटिका लगाने के लिए जानकारी दी। डॉ. राजेंद्र कुमार फसल विशेषज्ञ ने गेहूं, धान, मक्का, सरसों एवं आलू की किस्मों की बायो-फोर्टिफाइड किस्मों के बारे में बताया। गांव नन्यौला के रूलदा राम जोकि ड्रेगन फ्रूट आर्गेनिक खेती कर रहे हैं, ने भी प्रशिक्षणार्थियों से अपना अनुभव साझा किए और उन्हें भी आर्गेनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
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कार्यक्रम संचालक एवं केविके की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान ने भोजन के सभी वर्गों एवं पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पांच खाद्य वर्गों को प्रतिदिन खाने में इस्तेमाल करना आवश्यक है। दाल, चावल इत्यादि के उत्पाद बनाकर महिलाएं घरेलू स्तर पर ही काफी बचत कर सकती है। उन्होंने मूंग दाल के चिल्ले, अंकुरित दाल की कचौरी, सूजी से इडली, गुजिया, तिल, मूंगफली एवं गुड़ गजक, केक इत्यादि पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन बनाए और पोषण थाली का प्रदर्शन करके महिलाओं को पोषकता अपनाने का आह्वान किया।
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फिल्म शो द्वारा भी विभिन्न व्यंजनों को बनाने की विधियां महिलाओं ने सीखी। डॉ. विक्रम धीरेंद्र सिंह, पौध संरक्षण विशेषज्ञ ने पुरानी परंपराओं को पुन: अपनाने, गुड़ व शक्कर का प्रयोग, घर पर बनी मिठाइयों का प्रयोग, बाहरी वस्तुओं का कम इस्तेमाल इत्यादि पर प्रकाश डाला।
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डॉ. अमित कुमार उद्यान विशेषज्ञ ने पोषण वाटिका लगाने के लिए जानकारी दी। डॉ. राजेंद्र कुमार फसल विशेषज्ञ ने गेहूं, धान, मक्का, सरसों एवं आलू की किस्मों की बायो-फोर्टिफाइड किस्मों के बारे में बताया। गांव नन्यौला के रूलदा राम जोकि ड्रेगन फ्रूट आर्गेनिक खेती कर रहे हैं, ने भी प्रशिक्षणार्थियों से अपना अनुभव साझा किए और उन्हें भी आर्गेनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।