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Ambala News: बारिश में गिरी दो घरों की छत, हजारों का नुकसान
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बराड़ा। डेरा सलीमपुर गांव में बारिश से दो गरीब परिवारों के मकान की छत गिर गई। गनीमत रही कि परिवार बाल-बाल बच गया। उनका हजारों का सामान खराब हो गया। रामसरण ने बताया कि वह मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करता है। उसका दो कमरे का कच्चा घर है। इसमें कड़ियां डली हुई थी।
14 जुलाई को सुबह एक कमरे की छत भरभराकर गिर गई। वह परिवार के साथ कमरे से बाहर था। छत गिरने से उसका सारा सामान खराब हो गया। जब वह अंदर से सामान निकालने की कोशिश करने लगा तो उसे करंट लग गया। इससे उसकी एक बाजू प्रभावित हुई। वहीं सुखविंदर सिंह ने बताया कि वह कड़ियों वाले दो कमरे के घर में अपने पिता, बीवी और बच्चों के साथ रहता है। शुक्रवार रात को वह एक कमरे में अपने बीवी बच्चों के साथ सोया हुआ था जबकि दूसरे कमरे में उसके पिता सोए हुए थे। जिस कमरे में उसके पिता सोए हुए थे, रात को अचानक उस कमरे की छत गिर गई। इसमें उसके पिता बाल-बाल बच गए।
बीपीएल राशनकार्ड, नहीं मिली मदद
रामसरण और सुखविंदर सिंह ने बताया कि दोनों का बीपीएल कार्ड बना है। इसके बावजूद उन्हें आज तक मकान बनाने के लिए सरकार से कोई सहायता राशि नहीं मिली। अब मकान की छत गिरने के बाद उन्हें इस बात की चिंता है कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करें या मकान बनाएं। उन्होंने कहा कि दो दिन बीत जाने के बावजूद भी प्रशासन की तरफ से या कोई राजनेता उनकी कोई भी सुध लेने नहीं आया। दोनों ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें मकान बनाकर दिया जाए या मकान बनाने में उनकी आर्थिक मदद की जाए।
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14 जुलाई को सुबह एक कमरे की छत भरभराकर गिर गई। वह परिवार के साथ कमरे से बाहर था। छत गिरने से उसका सारा सामान खराब हो गया। जब वह अंदर से सामान निकालने की कोशिश करने लगा तो उसे करंट लग गया। इससे उसकी एक बाजू प्रभावित हुई। वहीं सुखविंदर सिंह ने बताया कि वह कड़ियों वाले दो कमरे के घर में अपने पिता, बीवी और बच्चों के साथ रहता है। शुक्रवार रात को वह एक कमरे में अपने बीवी बच्चों के साथ सोया हुआ था जबकि दूसरे कमरे में उसके पिता सोए हुए थे। जिस कमरे में उसके पिता सोए हुए थे, रात को अचानक उस कमरे की छत गिर गई। इसमें उसके पिता बाल-बाल बच गए।
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बीपीएल राशनकार्ड, नहीं मिली मदद
रामसरण और सुखविंदर सिंह ने बताया कि दोनों का बीपीएल कार्ड बना है। इसके बावजूद उन्हें आज तक मकान बनाने के लिए सरकार से कोई सहायता राशि नहीं मिली। अब मकान की छत गिरने के बाद उन्हें इस बात की चिंता है कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करें या मकान बनाएं। उन्होंने कहा कि दो दिन बीत जाने के बावजूद भी प्रशासन की तरफ से या कोई राजनेता उनकी कोई भी सुध लेने नहीं आया। दोनों ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें मकान बनाकर दिया जाए या मकान बनाने में उनकी आर्थिक मदद की जाए।
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