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कोयले की कमी से कच्चे माल की कीमतों में आया उछाल, प्रिंटर्स एंड बॉक्स इंडस्ट्री में हाहाकार
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Rise in raw material prices due to shortage of coal, Printers and Box industry outcry
- फोटो : Ambala
अंबाला। देशभर में कोयले की कमी का असर अंबाला की प्रिंटर्स एंड बॉक्स इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। लगभग सौ करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली इस इंडस्ट्री के कारोबारियों को पेपर मिल से ही कच्चा माल 6 रुपये प्रति किलो महंगा मिल रहा है। इतना ही नहीं जो माल मंगवाने के लिए पहले से बुकिंग करवाई गई थी वो भी रेटों में उछाल व माल की कमी के कारण रद कर दी गई।
कारोबारियों की माने तो पहले कोरोना ने कारोबार चौपट कर दिया था और अब कोयले की कमी के कारण पेपर मिलों पर असर पड़ने लगा है। इस कारण पेपर उपभोक्ताओं के लिए काम करना संकट बन चुका है। पेपर मिलों से जुड़े अधिकारियों के पास महज कुछ दिनों का ही कोयला बचा है, जिस कारण हालात बिगड़ना लगभग तय है। शिव शक्ति बॉक्स कंपनी के आशीष, एमजी पैकर्स के मालिक मानिक, वेलकन पैकर से कमल टंडन, ओम सुपर पैकर से योगेश आदि का कहना है कि गत्ता सप्लाई के लिए जो सामान आ रहा है, वह ऊंचे दामों पर और सीमित ही मिल रहा है। पेपर मिलों की उत्पादन क्षमता गिर गई है। ऐसी स्थिति में काम करना तक मुश्किल हो गया है। बता दें कि अंबाला में माल पैक करने के लिए इंडस्ट्रियों से गत्ते के डिब्बों की भारी डिमांड रहती है। ऐसे में अगर कोयला की कमी को पूरा नहीं किया गया तो आगामी दिनों में इंडस्ट्री के लोगों को गत्ता अत्यधिक महंगा मिलेगा, जिससे अन्य चीजों के दामों में भी उछाल आना तय है।
यह है गत्तों की क्वालिटी
कीमत - पहले - अब
क्राफ्ट यानी खाकी पेपर - 34 रुपये - 40 रुपये किलो
रॉयल गोल्ड यानी लाल पेपर - 36 रुपये - 42 रुपये किलो
ड्यूपलैक्स यानी सफेद पेपर - 55 रुपये - 63 रुपये किलो
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कारोबारियों की माने तो पहले कोरोना ने कारोबार चौपट कर दिया था और अब कोयले की कमी के कारण पेपर मिलों पर असर पड़ने लगा है। इस कारण पेपर उपभोक्ताओं के लिए काम करना संकट बन चुका है। पेपर मिलों से जुड़े अधिकारियों के पास महज कुछ दिनों का ही कोयला बचा है, जिस कारण हालात बिगड़ना लगभग तय है। शिव शक्ति बॉक्स कंपनी के आशीष, एमजी पैकर्स के मालिक मानिक, वेलकन पैकर से कमल टंडन, ओम सुपर पैकर से योगेश आदि का कहना है कि गत्ता सप्लाई के लिए जो सामान आ रहा है, वह ऊंचे दामों पर और सीमित ही मिल रहा है। पेपर मिलों की उत्पादन क्षमता गिर गई है। ऐसी स्थिति में काम करना तक मुश्किल हो गया है। बता दें कि अंबाला में माल पैक करने के लिए इंडस्ट्रियों से गत्ते के डिब्बों की भारी डिमांड रहती है। ऐसे में अगर कोयला की कमी को पूरा नहीं किया गया तो आगामी दिनों में इंडस्ट्री के लोगों को गत्ता अत्यधिक महंगा मिलेगा, जिससे अन्य चीजों के दामों में भी उछाल आना तय है।
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यह है गत्तों की क्वालिटी
कीमत - पहले - अब
क्राफ्ट यानी खाकी पेपर - 34 रुपये - 40 रुपये किलो
रॉयल गोल्ड यानी लाल पेपर - 36 रुपये - 42 रुपये किलो
ड्यूपलैक्स यानी सफेद पेपर - 55 रुपये - 63 रुपये किलो