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Ambala News: दशम पिता के प्रकाश पर्व पर सजेंगे धार्मिक दीवान, कथा सहित इलाहीबाणी के होंगे जाप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jan 2026 01:33 AM IST
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Religious diwans will be organised on the occasion of the birth anniversary of Dasham Pita, along with the story, divine words will be chanted.
अंबाला छावनी के गोबिंद नगर गुरुद्वारा साहिब में की गई सजावट। संवाद
अंबाला। दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व को लेकर जिले के तीन ऐतिहासिक सहित स्थानीय गुरुद्वारों में तैयारियां आरंभ कर दी गई हैं। रविवार को गुरु महाराज के प्रकाश पर्व पर धार्मिक दीवान सजाए जाएंगे। इन दीवानों में पंथ प्रसिद्ध कथा व कीर्तनी जत्थे संगत को गुरु इतिहास सुनाकर निहाल करेंगे, वहीं गुरुद्वारों में होने वाले इन समागमों और प्रकाश पर्व को लेकर साज-सज्जा का काम भी शुरु हो गया है। गुरुद्वारा साहिब को रंग-बिरंगी लड़ियों से सजाया गया है, वहीं रविवार को प्रकाश पर्व के दिन फूलों से गुरु महाराज की पालकी साहिब का सुशोभित किया जाएगा।
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गोबिंद नगर में तैयारी
छावनी स्थित गुरुद्वारा गोबिंद नगर के प्रधान हरबंस सिंह सिद्धू ने बताया कि गुरु महाराज के प्रकाश पर्व को लेकर सभी प्रकार की तैयारी पूरी कर ली गई हैं। प्रकाश पर्व की खुशी में शुक्रवार को गुरु चरणों में अरदास के बाद श्री अखंड पाठ साहिब प्रारंभ किए गए हैं जोकि रविवार सुबह संपन्न किए जाएंगे, तत्पश्चात कथा व कीर्तन समागम का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पंथ प्रसिद्ध कथा व कीर्तनी जत्थे संगत को निहाल करेंगे। दोपहर लगभग डेढ़ बजे कार्यक्रम की समाप्ति उपरांत गुरु का अटूट लंगर बांटा जाएगा।
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हरगोलाल रोड गुरुद्वारा
छावनी के हरगोलाल रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान सरबजीत सिंह जोहर ने बताया कि दशम पिता धन-धन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व पूरी श्रद्धाभावना के साथ मनाया जाएगा। गुरुद्वारा साहिब की सजावट का काम किया जा रहा है। समागम के दौरान कीर्तनी जत्थे गुरु की महिमा का गुणगान करेंगे। इस कार्य में युवाओं का सहयोग भी लिया जाएगा, वहीं गुरु घर के लंगर आदि की सेवा भी महिला मंडली सहित अन्य सहयोगियों को सौंपी गई है ताकि समय पर सभी प्रकार के कार्य संपन्न हो जाएं।
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अंबाला के तीन प्रमुख गुरुद्वारे

गुरुद्वारा लखनौर साहिब : यह गुरुद्वारा साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की माता, माता गुजर जी का पैतृक गांव है। गुरु जी अपनी माता के साथ 6 महीने से अधिक समय तक यहां रहे थे। यहां गुरु जी के बिस्तर, हथियार और अन्य पवित्र वस्तुएं संरक्षित हैं और यहां एक सरोवर और बावड़ी भी है।
गुरुद्वारा मंजी साहिब
: छठे गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी और दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा गुरुद्वारा है। गुरु हरगोबिंद के समय यहां एक बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) खोदी गई थी और गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां रुके थे।

गुरुद्वारा बादशाही बाग: यहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने एक राजा के घमंडी बाज से अपनी चिड़िया लड़ाकर चिड़ियों से बाज लड़ाने का चमत्कार दिखाया था, इससे यह कहावत चिड़िया नाल मैं बाज लड़ावां, तबे गोबिंदसिंह नाम धरावां मशहूर हुई।

अंबाला छावनी के गोबिंद नगर गुरुद्वारा साहिब में की गई सजावट। संवाद

अंबाला छावनी के गोबिंद नगर गुरुद्वारा साहिब में की गई सजावट। संवाद

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