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Ambala News: दोस्ती में मजहब नहीं बनता दीवार, अमरनाथ आने पर खिदमत करता परिवार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Aug 2023 01:17 AM IST
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Religion does not become a wall in friendship, the family serves on the arrival of Amarnath
अंबाला से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए जत्थे के साथ बैठकर भोजन करता अब्दुल रसीद का परिवार
अंशु शर्मा
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अंबाला। उर्दू के शायर की लिखी ये पंक्तियां, मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना... को भले ही कई बार दोहराया गया हो, लेकिन यह श्रीनगर निवासी अब्दुल रसीद और अंबाला के हरीश गोयल के 22 साल पुराने याराना पर सटीक बैठती हैं। इस दोस्ती की शुरुआत हुई अमरनाथ यात्रा के दौरान।
एक बार अब्दुल रसीद से ऐसे मुलाकात हुई कि दोनों में दोस्ती हो गई। 22 साल से भले ही दोनों की मुलाकात साल में केवल एक बार यानी बर्फानी बाबा के दर्शन के दौरान हो, लेकिन इंतजार पूरे साल रहता है। यही कारण है कि हर साल अंबाला छावनी के हाथी खाना मंदिर से बाइकों पर रवाना होने वाले इस जत्थे का यात्रा का श्रीनगर में भव्य स्वागत होता है। इतना ही नहीं, जत्थे के दौरान जीतने भी सदस्य होते हैं तो उनके रहने से लेकर खाने-पीने तक का खर्च यह परिवार उठाना है और उनकी मेहमाननवाजी करता है। श्रीनगर में रहने वाले परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन दोस्ती की खातिर पूरा परिवार मिलकर हरीश गोयल के साथ रवाना होने वाले जत्थे के लिए तैयार रहता है।
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भाईचारे की मिसाल है ये याराना

बता दें कि 22 साल पहले हरीश गोयल ने अपने स्कूटर पर पहली बार यात्रा शुरू की थी। पहले महज दो भक्त जाते थे, लेकिन धीरे-धीरे कारवां जुड़ता गया। अबकी बार दर्जनभर लोग यात्रा के लिए रवाना हुए थे। हरीश ने बताया कि वह यात्रा से पहले एक रात उनके घर पर ही रुकते हैं। वह तरह-तरह के पकवान बनाते हैं और पूरा परिवार उनके साथ मिलकर भोजन करता है। अब्दुल रसीद के याराना भाईचारे की मिसाल कायम करता है। अब्दुल के परिवार का मानना है कि सभी को अपने- अपने धर्म को लेकर किसी में भी बैर भावना नहीं रखनी चाहिए क्योंकि हमें अपने अपने धर्मों से यह सीख मिलती है कि हमें आपस में प्यार प्रेम के साथ रहना चाहिए।

अंबाला से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए जत्थे के साथ बैठकर भोजन करता अब्दुल रसीद का परिवार

अंबाला से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए जत्थे के साथ बैठकर भोजन करता अब्दुल रसीद का परिवार

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