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Ambala News: गुरबाणी सुनाकर भरा जोश, युवाओं को धैर्य रखने की प्रेरणा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Feb 2024 01:50 AM IST
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Reciting Gurbani fills enthusiasm, inspires youth to be patient.
अंबाला। गुरबाणी की पंक्तियां सुनाकर किसान आंदोलन के पदाधिकारियों ने युवाओं में रोष भरने की कोशिश की। उन्हें धैर्य और हौसला रखने के लिए भी प्रेरित किया। कहा गया कि कि वे जोश में होश न खोएं।
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वीरवार को यह हालात शंभू बॉर्डर पर देखने को मिले। पदाधिकारियों ने गुरु के दिखाए रास्ते पर चलने के लिए कहा कि जिस प्रकार गुरु साहिब ने सच के रास्ते पर चलते हुए अपना धैर्य नहीं खोया और दुश्मनों को धूल चटाई। इसी प्रकार उन्हें भी संयम रखना है और कानून को हाथ में नहीं लेना। दूसरी तरफ खतौली बार्डर पर बुधवार को युवक की मौत पर सभी आंदोलनकारी नाराज नजर आए। इस दौरान बुजुर्गाें ने कहा कि जब तक उन्हें दिल्ली जाने के लिए रास्ता नहीं मिलता। तब तक वो शंभू बॉर्डर से नहीं हिलेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।
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बुजुर्गों ने बांधे रस्से
बुजुर्ग जहां खतौली बॉर्डर की घटना में मारे गए नौजवान युवक के बलिदान को लेकर मंत्रणा करते नजर आए। युवाओं को बॉर्डर पर जाने से रोकने के लिए बुजुर्गाें ने कमान संभाली और रस्से लगाकर बॉर्डर जाने वाले रास्ते को बंद रखा। इस दौरान कुछ किसान अपनी ट्रालियों में सुस्ताते नजर आए तो कुछ रेडियो पर शब्द-कीर्तन सुनते नजर आए। इस दौरान महिलाएं भी लंगर तैयार करते हुए और चाय का वितरण करती नजर आईं।
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पंजाब पुलिस रही तैनात
शंभू बॉर्डर पर पंजाब पुलिस के कर्मचारी भी काफी संख्या में नजर आए। हालांकि उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाने में सहयोग दिया। इस दौरान किसी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई, न ही हरियाणा पुलिस की तरफ से कोई आंसू गैस के गोले छोड़े और न ही युवाओं की तरफ से पत्थरबाजी की गई।
रास्ते रोकने से कुछ नहीं होता। अगर मन में ठान लिया है तो दिल्ली जाकर दिखाएंगे, वापस नहीं जाएंगे।
सूबा सिंह, बजितपुर गांव, अमृतसर।
घर से सिर पर कफन बांध कर निकले हैं। अपना हक लेकर रहेंगे, चाहे इसके लिए कितनी की कुर्बानियां ने देनी पड़ें।
सुच्चा सिंह गुजरा मजीठिया गांव, अमृतसर।
प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन ऐसे हालात देखकर अंग्रेजों का जमाना याद आ गया कि वो किस प्रकार आंदोलन का दमन करते थे।
रमेल सिंह, तरनतारन।
दिल्ली में किसान आंदोलन को लेकर दो माह पहले ही जानकारी दे दी गई थी। अगर सरकार ने समाधान करना था तो पहले क्यों नहीं किया।
बलिंद्र सिंह, करालिया गांव, अमृतसर।
सरकार की मंशा ठीक नहीं है। कभी हां तो कभी न। अब झूठे आश्वासन नहीं चलने वाले। पहले भी एक बार झूठा आश्वासन देकर बेवकूफ बनाया था।
जसबीर सिंह, सद्धार गांव, अमृतसर।
किसान आंदोलन के दौरान सेवा करने का मौका मिला है। रक्तदान शिविर लगाया है ताकि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके
अमरजीत सिंह, पटियाला।
आंसू गैस की गोलाबारी में घायल हो गया था। पैर और सिर पर चोट लगी है। अस्पताल से उपचार के बाद दोबारा धरना स्थल पर आ गया हूं ताकि साथियों के साथ रहूं।
जगतार सिंह, खुंबा गांव संगरूर।
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