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Ambala News: टांगरी नदी व मारकंडा में पक्के बांध की परियोजना में निजी जमीन का अडंगा

Tue, 02 Sep 2025 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Tue, 02 Sep 2025 12:12 AM IST
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Private land is an obstacle in the project of concrete dam in Tangri river and Markanda
अंबाला की टांगरी नदी
संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। पहाड़ों में भारी बरसात के बाद उफान पर आते ही आसपास के गांवों में तबाही मचाने वाली टांगरी व मारकंडा नदी के दो बड़े प्रोजेक्टों में निजी जमीन का अडंगा है। यह दोनों ही परियोजनाओं को आसपास के दर्जनभर गांव व कॉलोनियों के लिए सुरक्षा कवच का काम करने के लिए तैयार किया गया था। मगर स्वीकृति के बाद भी यह परियोजनाएं धरातल पर शुरू नहीं हो सकीं। नदी से सटे किसान इन प्रोजेक्टों के लिए जमीन देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कुछ किसान हामी भरते हैं तो कुछ के इंकार करने पर फिर मामला लटक जाता है। इनमें मारकंडा का हेमा माजरा से जगाधरी रोड तक 12 एकड़ में बनने वाला पक्का बांध है तो वहीं टांगरी नदी में रामपुर सरसेहड़ी से पंजाब की सीमा मालन गांव तक बनने वाला पक्का बांध का प्रोजेक्ट है।
दो साल पहले चार करोड़ से 8 एकड़ में बना था पक्का बांध

वर्ष 2023 में आई बाढ़ के बाद टांगरी नदी पर एक्सटेंशन ऑफर रामपुर सरसेहड़ी बांध प्रोजेक्ट पास हुआ था। चार करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत सरसेहड़ी से पंजाब की सीमा वाले मालन गांव तक स्थाई बांध बनाना था। हालांकि सिंचाई विभाग की तरफ से अभी कम सीमा में मिट्टी का महज अस्थाई बांध बनाया हुआ है लेकिन इस प्रोजेक्ट के लिए आसपास के किसानों की जमीन भी ली जानी थी। ताकि बांध को नदी की निर्धारित चौड़ाई पर बनाया जा सके। इसके लिए आठ एकड़ जगह चयनित हुई थी। जब विभाग ने इस पर काम शुरू किया तो किसानों ने जमीन देने से इंकार कर दिया। कुछ एक किसान मानें। लेकिन अधिकतर के हाथ खड़ा करने पर आज तक यह प्रोजेक्ट पूरा ही नहीं हो पाया। अगर यह प्रोजेक्ट समय रहते पूरा हो जाता तो लोगों को सैकड़ों लोगों को राहत मिलती।
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हर बार चंदपुरा के पास से ही कॉलोनियों व गांव में घुसता है पानी
टांगरी नदी जब भी उफान पर आती है तो चंदपुरा गांव के तरफ से ही पानी कॉलोनियों व पास के गांव में मार करता है। 2023 में भी सरसेहड़ी से चंदपुरा के बीच से पानी ने नाै गांव और 11 कॉलोनियों को प्रभावित किया था। इसमें रामपुर, सरसेहड़ी, चंदपुरा, नग्गल, खोजकीपुर, करधान, सालारेहड़ी, रामगढ़ माजरा और ब्राह्मण माजरा गांव शामिल है। वहीं आजाद नगर, अर्जुन नगर, कमल नगर, स्कूल कॉलोनी, विकासपुरी, न्यू कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, पूजा विहार, प्रभु प्रेम पुरम ईस्ट, प्रभु प्रेम पुरम, सोनिया कॉलोनी व प्रोफेसर कॉलोनी शामिल है। 29 अगस्त को उफान पर आई टांगरी नदी के पानी ने चंदपुरा की तरफ से 10 कॉलोनियों व कुछ गांव में मार की थी।
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2013 के बाद कई बार महज कागजों में अटका मारकंडा का प्रोजेक्ट
मारकंडा पर हेमा माजरा से जगाधरी रोड पर पक्का बांध बनना है। हालांकि मौजूद समय में सिंचाई विभाग ने सरकारी जमीन में अस्थाई बांध तो बना रखा है लेकिन उसकी ऊंचाई कम है। कुछ किसान ने अपनी जमीन दी है तो वहां 700 फीट का पक्का बांध बना दिया गया है। जो अबकी बार काफी राहत भरा रहा। अभी भी करीब 12 एकड़ जमीन चाहिए जो विभाग को आज तक नहीं मिल पाई है। इसमें जमीन का अडंगा डला हुआ है। मारकंडा के उफान पर आने के बाद पानी हेमा माजरा से सोहाना, घेलड़ी, तंदवाल गांव व पास के करीब 10 गांवों में मार करता हुआ बराड़ा से शाहाबाद तक चला जाता है। 2013 में पहली बार इस प्रोजेक्ट की फाइल चली थी। पास होने के बाद दो बार यह कागजों में दम तोड़ गया। तीन साल पहले दोबारा से इसकी फाइल चली थी लेकिन वो भी जगह न मिलने के कारण सिरे नहीं चढ़ पाई। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस पर एक मीटिंग बुलाई जाएगी।

वर्जन
बांध बनाने की दोनों ही परियोजना में जमीन से जुड़े मसले हैं। हम इन पर काम कर रह हैं कि कोशिश की जाएगी कि कोई रास्ता निकाला जाए।------मनीष भारद्वाज, एसई, सिंचाई विभाग
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