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Ambala News: बेदखली के आदेश को चुनाैती देने वाली यचिका खारिज
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। बड़ा ठाकुरद्वारा (कलां) बनाम धर्मशाला धन्नू मल के बीच चल रहे कानूनी विवाद में कोर्ट ने निर्णय सुनाया है। एडीजे डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने बड़ा ठाकुरद्वारा की ओर से दायर उस सिविल मिसलेनियस अपील को खारिज कर दिया है। फैसले के अनुसार, उन्होंने धर्मशाला धन्नू मल के पक्ष में जारी बेदखली के आदेशों को चुनौती दी थी।
यह विवाद अंबाला शहर के ओल्ड सिविल हॉस्पिटल रोड पर स्थित एक संपत्ति से जुड़ा है। धर्मशाला धन्नू मल (डिक्री होल्डर) ने योगिंदर कुमार जैन और अन्य के खिलाफ बेदखली की याचिका दायर की थी। धर्मशाला का दावा था कि योगिंदर कुमार जैन उनके किराएदार हैं। उन्होंने 1976 के रेंट नोट के आधार पर किराया नहीं चुकाया है।
वहीं, दूसरी ओर बड़ा ठाकुरद्वारा (कलां) के महंत प्रेम दास शास्त्री ने इस पर आपत्ति जताते हुए खुद को संपत्ति का असली मालिक बताया था। उनका कहना था कि योगिंदर कुमार जैन उनके लाइसेंसधारी थे। बाद में उन्होंने यह जगह डॉ. वीके बंसल को किराए पर दे दी थी। फैसले में अदालत ने कहा कि निष्पादन न्यायालय डिक्री के पीछे जाकर मालिकाना हक का फैसला नहीं कर सकता। मालिकाना हक से जुड़े किसी भी सवाल का निपटारा केवल सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकता है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा 8 सितंबर 2022 को दिए गए उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें ठाकुरद्वारा की आपत्तियों को खारिज किया गया था।
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अंबाला सिटी। बड़ा ठाकुरद्वारा (कलां) बनाम धर्मशाला धन्नू मल के बीच चल रहे कानूनी विवाद में कोर्ट ने निर्णय सुनाया है। एडीजे डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने बड़ा ठाकुरद्वारा की ओर से दायर उस सिविल मिसलेनियस अपील को खारिज कर दिया है। फैसले के अनुसार, उन्होंने धर्मशाला धन्नू मल के पक्ष में जारी बेदखली के आदेशों को चुनौती दी थी।
यह विवाद अंबाला शहर के ओल्ड सिविल हॉस्पिटल रोड पर स्थित एक संपत्ति से जुड़ा है। धर्मशाला धन्नू मल (डिक्री होल्डर) ने योगिंदर कुमार जैन और अन्य के खिलाफ बेदखली की याचिका दायर की थी। धर्मशाला का दावा था कि योगिंदर कुमार जैन उनके किराएदार हैं। उन्होंने 1976 के रेंट नोट के आधार पर किराया नहीं चुकाया है।
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वहीं, दूसरी ओर बड़ा ठाकुरद्वारा (कलां) के महंत प्रेम दास शास्त्री ने इस पर आपत्ति जताते हुए खुद को संपत्ति का असली मालिक बताया था। उनका कहना था कि योगिंदर कुमार जैन उनके लाइसेंसधारी थे। बाद में उन्होंने यह जगह डॉ. वीके बंसल को किराए पर दे दी थी। फैसले में अदालत ने कहा कि निष्पादन न्यायालय डिक्री के पीछे जाकर मालिकाना हक का फैसला नहीं कर सकता। मालिकाना हक से जुड़े किसी भी सवाल का निपटारा केवल सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकता है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा 8 सितंबर 2022 को दिए गए उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें ठाकुरद्वारा की आपत्तियों को खारिज किया गया था।
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