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तीन विभागों के फेर में उलझे लोग, नहीं हो पा रही है रजिस्ट्री
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अंबाला सिटी। तहसील, नगर निगम और जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) तीनों विभागों फेर में अंबाला की जनता उलझ कर रह गई है। रजिस्ट्री करवाने के लिए लोग कभी किसी तो कभी किसी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन रजिस्ट्री फिर भी नहीं हो रही है।
यह मुद्दा लोग उपायुक्त के समक्ष भी उठा चुके हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की बैठक भी हुई। इसमें नगर निगम आयुक्त, अधिशासी अधिकारी, डीटीपी ने विचार -विमर्श किया था। बैठक में जनता की ओर से शामिल हुए जन प्रतिनिधियों को समाधान का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन एक सप्ताह से ज्यादा समय होने के बावजूद स्थिति जस की तस है। मुख्य रूप से यह समस्या धारा 7ए के तहत आ रही है, इसको लेकर नगर निगम जो एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जनता को दे रही है डीटीपी उसे मान्य नहीं कर रहे। लिहाजा डीटीपी की ओर से एनओसी जारी नहीं हो रही। इसी कारण तहसीलदार भी रजिस्ट्री से इनकार कर रहे हैं।
हम तो नगर निगम, डीटीपी और तहसील के चक्कर काट-काट कर परेशान हो गए हैं। आज भी नगर निगम में ही गया हुआ था, सुबह से लेकर दोपहर हो गई। लेकिन हमारा काम नहीं हुआ, विभागीय अधिकारियों के कारण हम जनता को बहुत परेशान होना पड़ रहा है। कभी कह देते हैं डीटीपी के पास जाओ, कभी कहते हैं तहसील जाओ। - किरपाल सिंह सैनी।
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धार-7ए परेशानी बन गई है। पिछले दिनों अधिकारियों ने भी इस समस्या के समाधान के लिए बैठक ली थी। वहां आश्वासन भी दिया गया था, कि जल्द ही इस समस्या को हल कर दिया जाएगा। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई और हम लोग पहले की तरह ही परेशानी झेल रहे हैं।
- आदिश अग्रवाल।
नगर निगम में एनडीसी को लेकर बहुत दिक्कत आ रही है। जो सर्वे 2009 में हुआ था और कॉलोनियां को वैध किया गया था। पोर्टल पर केवल वहीं सर्वे दिख रहा है। जिस कारण एनडीसी नहीं मिल पा रही है। जबकि आज 2021 चल रहा है। परंतु आज तक किसी ने भी पोर्टल को अपडेट नहीं किया है।
- भारती खन्ना।
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर सभी संबंधित विभाग इधर से उधर भगा रहे हैं। किसी भी विभाग के पास किसी भी समस्या का हल नहीं है। क्योंकि न तो इनके पोर्टल अपडेट है और न ही सभी विभागों का डाटा एक समान है।
- प्रेमचंद गुप्ता।
हमारे पास जो भी एनडीसी और एनओसी लेकर आ रहा है। जिसके सभी कागजात पूरे हैं। हम उनकी रजिस्ट्री कर रहे हैं। बिना एनडीसी और एनओसी के रजिस्ट्री संभव नहीं है।
- मनीष कुमार यादव, तहसीलदार।
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यह मुद्दा लोग उपायुक्त के समक्ष भी उठा चुके हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की बैठक भी हुई। इसमें नगर निगम आयुक्त, अधिशासी अधिकारी, डीटीपी ने विचार -विमर्श किया था। बैठक में जनता की ओर से शामिल हुए जन प्रतिनिधियों को समाधान का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन एक सप्ताह से ज्यादा समय होने के बावजूद स्थिति जस की तस है। मुख्य रूप से यह समस्या धारा 7ए के तहत आ रही है, इसको लेकर नगर निगम जो एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जनता को दे रही है डीटीपी उसे मान्य नहीं कर रहे। लिहाजा डीटीपी की ओर से एनओसी जारी नहीं हो रही। इसी कारण तहसीलदार भी रजिस्ट्री से इनकार कर रहे हैं।
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हम तो नगर निगम, डीटीपी और तहसील के चक्कर काट-काट कर परेशान हो गए हैं। आज भी नगर निगम में ही गया हुआ था, सुबह से लेकर दोपहर हो गई। लेकिन हमारा काम नहीं हुआ, विभागीय अधिकारियों के कारण हम जनता को बहुत परेशान होना पड़ रहा है। कभी कह देते हैं डीटीपी के पास जाओ, कभी कहते हैं तहसील जाओ। - किरपाल सिंह सैनी।
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धार-7ए परेशानी बन गई है। पिछले दिनों अधिकारियों ने भी इस समस्या के समाधान के लिए बैठक ली थी। वहां आश्वासन भी दिया गया था, कि जल्द ही इस समस्या को हल कर दिया जाएगा। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई और हम लोग पहले की तरह ही परेशानी झेल रहे हैं।
- आदिश अग्रवाल।
नगर निगम में एनडीसी को लेकर बहुत दिक्कत आ रही है। जो सर्वे 2009 में हुआ था और कॉलोनियां को वैध किया गया था। पोर्टल पर केवल वहीं सर्वे दिख रहा है। जिस कारण एनडीसी नहीं मिल पा रही है। जबकि आज 2021 चल रहा है। परंतु आज तक किसी ने भी पोर्टल को अपडेट नहीं किया है।
- भारती खन्ना।
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर सभी संबंधित विभाग इधर से उधर भगा रहे हैं। किसी भी विभाग के पास किसी भी समस्या का हल नहीं है। क्योंकि न तो इनके पोर्टल अपडेट है और न ही सभी विभागों का डाटा एक समान है।
- प्रेमचंद गुप्ता।
हमारे पास जो भी एनडीसी और एनओसी लेकर आ रहा है। जिसके सभी कागजात पूरे हैं। हम उनकी रजिस्ट्री कर रहे हैं। बिना एनडीसी और एनओसी के रजिस्ट्री संभव नहीं है।
- मनीष कुमार यादव, तहसीलदार।