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Ambala News: हाईटेक लेप्रोस्कॉपी से एक साल में महज 10 ऑपरेशन, पार्ट का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Mar 2025 01:07 AM IST
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Only 10 operations in a year with high-tech laparoscopy, waiting for the part
अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र भले ही एक साल पहले चार के टेक्नोलॉजी वाली हाईटेक लेप्रोस्कोपी मशीन से लैस हो गया हो, लेकिन विभाग अभी खुद हाईटेक होता नहीं दिख रहा है। करीब 90 लाख रुपये की लागत से खरीदी इस मशीन में हर ऑपरेशन के बाद एक चिप यानी दो पाइपनुमा पार्ट बदले जाते हैं।
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मशीन के साथ जो महज आधा दर्जन पार्ट आए थे वो तो इस्तेमाल में लाए गए है। अब विभाग ने लंबे समय से इस हजारों रुपये के पार्ट की खरीद ही नहीं की है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा हर बार मुख्यालय से पत्राचार करने की बात बोलकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऐसे में मरीजों को इस मशीन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहीं कारण है कि पिछले एक साल में केवल आधा दर्जन ही ऑपरेशन ही हुए है। अब यह मशीन धूल फांक रही है।
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किसी नागरिक अस्पताल में नहीं है ये मशीन

दरअसल, विदेश कंपनी की यह मशीन अभी तक प्रदेशभर के किसी भी नागरिक अस्पताल में नहीं है। केवल चंडीगढ़ पीजीआई में ही यह मशीन उपलब्ध है। जनवरी 2024 में यह मशीन अस्पताल में आई थी और 18 मार्च को इसकी शुरूआत की गई थी। बाकायदा मशीन को चलाने के लिए संबंधित डॉक्टर अहमदाबाद, गुजरात और चंडीगढ़ से ट्रेनिंग करके आए थे।
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पुरानी मॉडल की मशीन में बदलते पार्ट

दरअसल, चार के टेक्नोलॉजी वाली लेप्रोस्कॉपी मशीन बेहद एडवांस है। इसे कोरोना काल के बाद की जरूरतों को देखकर तैयार किया है। इस मशीन में हर ऑपरेशन के बाद एक चिप यानी जख्मों को जलाने वाले पाइप व पेट में हवा भरने वाले पाइप की जरूरत होती है जो हजारों रुपये में आती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इस भुगतान कौन करेगा। जबकि पहले जो सामान्य लेप्रोस्कॉपी की मशीन है उनमें यह पार्ट साथ ही अटैच होता है जो हर ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए ज्यादा खर्च नहीं आता है।
इस एडवांस मशीन की यह है खासियत

- मशीन में एचडी से भी बेहतर कैमरा भी लगा हुआ है जो इस मशीन के जरिए ऑपरेशन को रिकॉर्ड भी करता रहेगा। बाद में ऑपरेशन की वीडियो को पैन ड्राइव में डालकर डॉक्टर किसी भी दूसरे डॉक्टर के साथ शेयर कर सकेंगे।

- ऑपरेशन रिकॉर्ड होने का सबसे ज्यादा इसका फायदा मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को होगा
- ऑपरेशन के समय हम जिस नस पर काम कर रहे होते हैं तो उसमें मशीन के जरिए डाई डालने के बाद रंगीन होकर स्क्रीन पर देख सकते हैं।
- यह आम एचडी लेप्रोस्कॉपी मशीनों से काफी एडवांस होने के कारण दृश्यता ज्यादा रहती है।
- ऑपरेशन के समय स्मॉग यानी धुंए को सोखने की भी क्षमता है।
वर्जन

लेप्रोस्कॉपी मशीन को जल्द ही उपकरण आने के बाद ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे।
डॉ. जितेंद्र, गेस्ट्रोसर्जन, अटल कैंसर केयर केंद्र
वर्जन
लेप्रोस्कॉपी मशीन तो आ गई थी लेकिन मशीन से जुड़े पार्ट नहीं होने की कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से बात की जाएगी। देखा जाएगा कि किस स्तर पर संबंधित मशीन के पार्ट की खरीद होती है वो करवाई जाएगी।
डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला
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