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Ambala News: एक चिकित्सक पर दो डिस्पेंसरी का कार्यभार
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ईएसआइ डिस्पेंसरी धूलकोट। संवाद
- फोटो : kathua
अंबाला सिटी। अंबाला सिटी और छावनी में चल रही तीनों ईएसआई डिस्पेंसरी में कर्मचारियों की भी कमी खल रही है। इन डिस्पेंसरियों में एक चिकित्सक के पास दो का प्रभार है।
इसके अलावा कैंट की डिस्पेंसरी में एक चिकित्सक अवकाश पर है तो एक के भरोसे ही मरीज हैं। इसी प्रकार किसी भी कैंट और सिटी में धूलकोट डिस्पेंसरी में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को या तो फार्मासिस्ट दवा देकर भेज देते हैं। फिर मरीज को नागरिक अस्पताल में भेज दिया जाता है। जबकि तीनों डिस्पेंसरी के मरीजों को देखें तो करीब 30 हजार से अधिक मरीज यहां पर पंजीकृत हैं। रोजाना यहां पर 20 से 30 मरीजों की ओपीडी रहती है। अंबाला सिटी की कपड़ा मार्केट डिस्पेंसरी को छोड़कर अन्य किसी भी डिस्पेंसरी में कर्मचारी पूरे नहीं हैं।
अंबाला सिटी के बीएसएनएल भवन में चल रही धूलकोट ईएसआई डिस्पेंसरी में एक ही चिकित्सक है। इनके पास भी पिंजौर का अतिरिक्त कार्यभार रहता है। ऐसे में वे डिस्पेंसरी को सिर्फ तीन दिन ही दे पाती हैं। कई बार तो मरीजों को फार्मासिस्ट ही दवा दे देते हैं। वहीं मरीज भी नागरिक अस्पताल का रुख कर लेते हैं। वहीं, डिस्पेंसरी में दो चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भी कमी है।
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छावनी की डिस्पेंसरी में नहीं चिकित्सक
अंबाला छावनी की ईएसआई डिस्पेंसरी में सलाहकार चिकित्सक ही नियुक्त थे। जो मरीजों की जांच कर रहा था। यह चिकित्सक अंबाला सिटी की धूलकोट डिस्पेंसरी में कार्यरत था। जिसे अंबाला छावनी भेजा गया था। अब उनका कार्यकाल यहां पर पूरा हो गया है। इसलिए वह अब धूलकोट में फिर से अपना कार्यभार संभालेंगे। इसके अलावा अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की कमी के कारण भी परेशानी रहती है।
वर्जन
हमारी डिस्पेंसरी में एक सलाहकार चिकित्सक नियुक्त किया गया है। जो अब सेवाएं देंगे। उन्हें डेपुटेशन पर अंबाला छावनी भेजा गया था। मेरे पास पिंजौर का भी चार्ज है। मगर मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाती।
-डॉ. नेहा, इंचार्ज, ईएसआई डिस्पेंसरी धूलकोट।
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इसके अलावा कैंट की डिस्पेंसरी में एक चिकित्सक अवकाश पर है तो एक के भरोसे ही मरीज हैं। इसी प्रकार किसी भी कैंट और सिटी में धूलकोट डिस्पेंसरी में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को या तो फार्मासिस्ट दवा देकर भेज देते हैं। फिर मरीज को नागरिक अस्पताल में भेज दिया जाता है। जबकि तीनों डिस्पेंसरी के मरीजों को देखें तो करीब 30 हजार से अधिक मरीज यहां पर पंजीकृत हैं। रोजाना यहां पर 20 से 30 मरीजों की ओपीडी रहती है। अंबाला सिटी की कपड़ा मार्केट डिस्पेंसरी को छोड़कर अन्य किसी भी डिस्पेंसरी में कर्मचारी पूरे नहीं हैं।
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अंबाला सिटी के बीएसएनएल भवन में चल रही धूलकोट ईएसआई डिस्पेंसरी में एक ही चिकित्सक है। इनके पास भी पिंजौर का अतिरिक्त कार्यभार रहता है। ऐसे में वे डिस्पेंसरी को सिर्फ तीन दिन ही दे पाती हैं। कई बार तो मरीजों को फार्मासिस्ट ही दवा दे देते हैं। वहीं मरीज भी नागरिक अस्पताल का रुख कर लेते हैं। वहीं, डिस्पेंसरी में दो चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भी कमी है।
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छावनी की डिस्पेंसरी में नहीं चिकित्सक
अंबाला छावनी की ईएसआई डिस्पेंसरी में सलाहकार चिकित्सक ही नियुक्त थे। जो मरीजों की जांच कर रहा था। यह चिकित्सक अंबाला सिटी की धूलकोट डिस्पेंसरी में कार्यरत था। जिसे अंबाला छावनी भेजा गया था। अब उनका कार्यकाल यहां पर पूरा हो गया है। इसलिए वह अब धूलकोट में फिर से अपना कार्यभार संभालेंगे। इसके अलावा अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की कमी के कारण भी परेशानी रहती है।
वर्जन
हमारी डिस्पेंसरी में एक सलाहकार चिकित्सक नियुक्त किया गया है। जो अब सेवाएं देंगे। उन्हें डेपुटेशन पर अंबाला छावनी भेजा गया था। मेरे पास पिंजौर का भी चार्ज है। मगर मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाती।
-डॉ. नेहा, इंचार्ज, ईएसआई डिस्पेंसरी धूलकोट।