{"_id":"6748d17755662e66c20931a7","slug":"on-the-fourth-day-of-the-story-the-festival-of-appearance-of-shri-krishna-was-celebrated-ambala-news-c-36-1-sknl1003-133555-2024-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: कथा के चाैथे दिन श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: कथा के चाैथे दिन श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया
विज्ञापन
गांव सीवन माजरा स्थित शिवमंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण की आरती करते श्रद्धालु।
बराड़ा। गांव सीवन माजरा स्थित शिवमंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य रामनारायण शास्त्री ने कथा के चौथे दिन भगवान का मंगलमय प्राकट्य उत्सव बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया।
इस दौरान कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि एक समय की बात है जब पृथ्वी पर कंस का अत्याचार बढ़ गया था, तब पृथ्वी ने गाय का रूप धारण कर सभी देवताओं के साथ वह ब्रह्मा जी के पास गए।
इसके बाद उन्होंने अपनी वेदना ब्रह्मा जी को सुनाई। ब्रह्मा जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि शीघ्र ही भगवान नारायण कृष्ण के रूप में ब्रज में अवतरित होने वाले हैं, इसलिए हे देवताओं तुम भी गोप और गोपियों बनकर ब्रज की धरा में चले जाओ।
विज्ञापन
भगवान दुष्टों का शमन करके अपने भक्तों पर कृपा करेंगे और अपने भक्तों को अपने प्रेम से आह्लादित करेंगे। फिर वह समय आया, जब भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में ब्रज की भूमि मथुरा में अवतरित हुए। इसके बाद श्रीकृष्ण गोकुल में ग्वालों के साथ खेल खेलते हैं। वृंदावन में गाय चराते हैं। फिर मथुरा में आकर कंस का उधार कर दुष्टों को मार करके द्वारिका नगरी जाते हैं।
विज्ञापन
इस दौरान कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि एक समय की बात है जब पृथ्वी पर कंस का अत्याचार बढ़ गया था, तब पृथ्वी ने गाय का रूप धारण कर सभी देवताओं के साथ वह ब्रह्मा जी के पास गए।
विज्ञापन
इसके बाद उन्होंने अपनी वेदना ब्रह्मा जी को सुनाई। ब्रह्मा जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि शीघ्र ही भगवान नारायण कृष्ण के रूप में ब्रज में अवतरित होने वाले हैं, इसलिए हे देवताओं तुम भी गोप और गोपियों बनकर ब्रज की धरा में चले जाओ।
विज्ञापन
भगवान दुष्टों का शमन करके अपने भक्तों पर कृपा करेंगे और अपने भक्तों को अपने प्रेम से आह्लादित करेंगे। फिर वह समय आया, जब भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में ब्रज की भूमि मथुरा में अवतरित हुए। इसके बाद श्रीकृष्ण गोकुल में ग्वालों के साथ खेल खेलते हैं। वृंदावन में गाय चराते हैं। फिर मथुरा में आकर कंस का उधार कर दुष्टों को मार करके द्वारिका नगरी जाते हैं।

गांव सीवन माजरा स्थित शिवमंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण की आरती करते श्रद्धालु।