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Ambala News: रिमोट दबाते ही धू धू कर जला 120 फुट का रावण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2024 03:14 AM IST
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On pressing the remote, the 120 feet tall Ravana burned to ashes
बराड़ा (अंबाला)। बराड़ा में शनिवार को दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर दशहरा गांव ग्राउंड में बनाया 120 फुट का रावण रिमोट दबाते ही धू-धूकर जल उठा। समाजसेवी रजत मलिक ने रिमोट का बटन दबाकर रावण के पुतले का दहन किया।
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इस मौके पर इको-फ्रेंडली आतिशबाजी का इस्तेमाल किया, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचा। किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए स्थानीय प्रशासन और एसएचओ बराड़ा अपने दल-बल के साथ मौजूद रहे। रावण दहन के नजारे को सभी दर्शकों ने अपने अपने मोबाइल में कैद किया। रावण के पुतले के चारों तरफ बेरिकेडिंग की थी। पुतले को बांस की मदद से बनाया था।
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रावण के पुतले का निर्माण पिछले कई दिनों से कारीगरों द्वारा किया जा रहा था। 120 फुट के रावण के पुतले का निर्माण आगरा के सिविल इंजीनियर असगर अली और उनकी टीम ने किया। कारीगर असगर अली ने बताया कि उनके परिवार के सभी सदस्य इस कार्य में उनका साथ देते हैं। उनके बेटे सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, जबकि उनकी बेटी फैशन डिजाइनर है।
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सभी ने मिलकर पुतले को बनाने में सहयोग दिया। दशहरा महोत्सव समिति के प्रधान विक्रम राणा ने बताया कि दशहरा महोत्सव आयोजन पर लगभग 6 लाख रुपये खर्च हुए, जिसका प्रबंधन स्थानीय समाजसेवियों और आम जनता के सहयोग से किया गया। समिति के सदस्य अमरेंद्र सिंह ने बताया कि रावण के पुतले को पहले श्री रामलीला क्लब बराड़ा की ओर से निर्मित किया जाता था लेकिन पिछले दो सालों से इसे राष्ट्र जागरण मंच की ओर से बनाया जा रहा हैं।
मंच की ओर से बनाया गए रावण के पुतले की ऊंचाई वर्ष 2022 में 125 फीट, 2023 में 80 फीट थी। वैसे तो वर्ष 2023 में 120 फीट का रावण का पुतले को बनाया गया था लेकिन रावण का बना बनाया पुतला गिर गया और क्षतिग्रस्त हो गया। तब आनन फानन में रेडीमेड 80 फीट का रावण का 60-60 फीट का कुंभकर्ण और मेघनाद का पुतला दहन किया। श्रीरामलीला क्लब ने इसे वर्ष 1987 में शुरू किया था तब रावण की ऊंचाई 20 फीट थी। तबसे रावण के पुतले की ऊंचाई बढ़ती गई। वर्ष 2000 में इसकी ऊंचाई 100 फीट थी।

वर्ष 2009 में यह 175 फीट हो गयी और 2011 में इसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। यह पेज नंबर 319 पर दर्ज है।रावण बनाने वाले कारीगर असगर अली ने बताया कि यह पहला मौका है जब उन्हें बराड़ा में रावण बनाने का अवसर मिला है. हालांकि, वह पिछले 35 वर्षों से उत्तर भारत के कई प्रमुख स्थानों पर रावण का निर्माण करते आ रहे हैं। उनका परिवार दशहरे के समय छुट्टी लेकर विभिन्न स्थानों पर रावण बनाने का कार्य करता है, और यह कार्य उनकी पुश्तैनी धरोहर का हिस्सा है। बराड़ा के अमरिंदर सिंह ने बताया कि बराड़ा के रावण का नाम रिकॉर्ड लिम्का और गिनीज बुक में दर्ज हो चुका है। कार्यक्रम में रजत मलिक, विक्रम राणा, अमरेंद्र सिंह, प्रवेश मेहंदीरत्ता, राजेश सिंगला, मोंटी अरोड़ा, बाबर खान, जगबीर राणा, मित्रपाल राणा, वीरेंद्र, गोल्डी, गुलशन कुमार एसएचओ बराड़ा व अन्य स्थानीय अधिकारीगण मौजूद रहें ।
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