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अब ए फॉर एप्पल नहीं, ए फॉर एडमिशन होगा : डीईओ
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अंबाला सिटी के बलदेव नगर स्थित सरकारी स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों के साथ मौजूद डीईओ व प
- जिला शिक्षा अधिकारी ने सिखाया शिक्षा का नया मंत्र, प्रवेश उत्सव में बच्चों को लगाया तिलक
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सरकारी स्कूलों के प्रति धारणा बदलने और दाखिले को जन-आंदोलन बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। बलदेव नगर स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित प्रवेश उत्सव में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सुधीर कालड़ा ने एक खास पहल की। उन्होंने बच्चों को पारंपरिक वर्णमाला की जगह शिक्षा पर आधारित नई एबीसीडी सिखाई और स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूल अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि गुणवत्ता का पर्याय है।
कार्यक्रम की शुरुआत में डीईओ सुधीर कालड़ा और प्राचार्या वीना ने नए छात्रों का तिलक लगाकर और फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया। स्कूल परिसर का माहौल किसी उत्सव जैसा नजर आया। इस दौरान कक्षा 10+1 में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली छात्रा निकिता जब 10+2 कक्षा में दाखिला लेने आई तो निकिता का भी फूलमालाओं से स्वागत कर डीईओ ने आशीर्वाद दिया। डीईओ ने अभिभावकों से संवाद करते हुए कहा कि निजी स्कूलों के भ्रम से बाहर निकलने का समय आ गया है। उन्होंने नारा दिया कि अब बच्चे ए फॉर एप्पल नहीं, बल्कि ए फॉर एडमिशन बोलेंगे। इसी कड़ी में बी से बुक, सी से कॉपी और डी से ड्रेस का मंत्र दिया गया।
सुविधाओं में निजी स्कूलों को पछाड़ रहे सरकारी विद्यालय
डीईओ ने जोर देकर कहा कि पीएम श्री और मॉडल संस्कृति स्कूलों के माध्यम से बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया गया है। सरकारी स्कूलों में किताबें, वर्दी और मिड-डे मील पूरी तरह निशुल्क है। हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम में भी पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। सुपर-100, बुनियाद और एनएमएमएस जैसे कार्यक्रमों से बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। डीईओ सुधीर कालड़ा ने कहा कि हर योग्य बच्चे को स्कूल तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। संपर्क फाउंडेशन और विकल्प जैसी संस्थाएं भी इस मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सरकारी स्कूलों के प्रति धारणा बदलने और दाखिले को जन-आंदोलन बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। बलदेव नगर स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित प्रवेश उत्सव में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सुधीर कालड़ा ने एक खास पहल की। उन्होंने बच्चों को पारंपरिक वर्णमाला की जगह शिक्षा पर आधारित नई एबीसीडी सिखाई और स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूल अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि गुणवत्ता का पर्याय है।
कार्यक्रम की शुरुआत में डीईओ सुधीर कालड़ा और प्राचार्या वीना ने नए छात्रों का तिलक लगाकर और फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया। स्कूल परिसर का माहौल किसी उत्सव जैसा नजर आया। इस दौरान कक्षा 10+1 में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली छात्रा निकिता जब 10+2 कक्षा में दाखिला लेने आई तो निकिता का भी फूलमालाओं से स्वागत कर डीईओ ने आशीर्वाद दिया। डीईओ ने अभिभावकों से संवाद करते हुए कहा कि निजी स्कूलों के भ्रम से बाहर निकलने का समय आ गया है। उन्होंने नारा दिया कि अब बच्चे ए फॉर एप्पल नहीं, बल्कि ए फॉर एडमिशन बोलेंगे। इसी कड़ी में बी से बुक, सी से कॉपी और डी से ड्रेस का मंत्र दिया गया।
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सुविधाओं में निजी स्कूलों को पछाड़ रहे सरकारी विद्यालय
डीईओ ने जोर देकर कहा कि पीएम श्री और मॉडल संस्कृति स्कूलों के माध्यम से बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया गया है। सरकारी स्कूलों में किताबें, वर्दी और मिड-डे मील पूरी तरह निशुल्क है। हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम में भी पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। सुपर-100, बुनियाद और एनएमएमएस जैसे कार्यक्रमों से बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। डीईओ सुधीर कालड़ा ने कहा कि हर योग्य बच्चे को स्कूल तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। संपर्क फाउंडेशन और विकल्प जैसी संस्थाएं भी इस मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं।
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