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Ambala News: तारीख पर तारीख नहीं... दो साल में 32 दुराचारियों को मिली सजा
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वैभव शर्माअंबाला। तारीख पर तारीख...हिंदी फीचर फिल्म का यह डायलॉग आपने सुना ही होगा। इस डायलॉग को अंबाला की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बदल दिया है। यहां पर नाबालिगों को तेजी से न्याय दिलाया जा रहा है। इसका प्रमाण इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज दो साल के भीतर अंबाला में पॉक्सो की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में एडिशनल सेशन जज आरती सिंह ने 32 मामलों में नाबालिगों के साथ दुष्कर्म करने वाले मुजरिमों को सजा की दहलीज तक पहुंचाया है। इसमें कई मुजरिमों को बड़ा अर्थदंड भी लगाया गया है। ऐसा संभव इसलिए भी हो सका है क्योंकि यहां तेजी से मामलों की सुनवाई की जा रही है। यही नहीं, इन केसों के माध्यम से नाबालिगों के साथ दुष्कर्म करने वालों को एक कड़ा संदेश भी दिया जा रहा है। साथ ही पीड़ितों के परिवार को आर्थिक मुआवजा भी दिलाया।
तकनीक का किया उपयोग
कुछ मामले ऐसे भी सामने आए जिसमें पीड़िता, उसके परिजन और गवाह भी केस की सुनवाई के दौरान मुकर गए मगर कोर्ट ने डीएनए जांच जैसी तकनीकों से परीक्षण करा पीड़िता को न्याय दिलाया। जिससे कोर्ट के प्रति लोगों का विश्वास और भी बढ़ गया है।
कई मामलों में 20 साल तक की सजा सुनाई
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो साल में जिन 32 मामलों में सजा सुनवाई है उनमें दो वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक की सजा के मामले शामिल हैंं। साथ ही 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का अर्थ दंड भी लगाया है। अर्थ दंड न भरने की सूरत में कड़ी मशक्कत से जेल भेजने की सजा भी इसमें शामिल है।
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केस-1
स्टेट वर्सेज योगेश के मामले में आरोपी ने एक ढाई साल की बच्ची के साथ टॉफी दिलाने के बहाने दुष्कर्म कर दिया। उस समय बच्ची के माता-पिता बकरी चराने गए थे। आरोपी पीड़िता के साथ ही रहता था। इस मामले में पुलिस ने तथ्यों में कमी छोड़ दी थी। बाद में कोर्ट में सुनवाई हुई तो बच्ची को 10 लोगों के फोटो दिखाकर शिनाख्त कराई गई। जिसमें आरोपी को बच्ची ने पहचान लिया। इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को 20 साल की सजा के साथ पीड़िता के परिवार को चार लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिलाए।
केस-2
मुलाना थाने के तहत एक पुजारी ने मंदिर में छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म कर दिया। जब इस बात का ग्रामीणों को पता चला तो उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया और एक वीडियो बनाई। जिसमें पुजारी ने अपना जुर्म स्वीकार लिया मगर पुलिस के स्तर से तथ्य जुटाने में कमी रही तो डिप्टी डिस्ट्रक्टि अटार्नी सुरजीत सिंह ने तथ्यों को जुटाकर कोर्ट के समक्ष रखा और दोषी को 20 साल की सजा सुनाई गई। साथ ही पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में चार लाख रुपये दिए गए।
पॉक्सो के मामलों में काफी चुनौती आती है। पुलिस की जांच के बाद भी तथ्य जुटाने पड़ते हैं। अंबाला में बीते दो साल में 32 मामलों में सजा सुनाई गई है। इसमें कई मामले तो काफी चुनौतीपूर्ण रहे। -सुरजीत सिंह, डिप्टी डिस्ट्रक्टि अटार्नी
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कुछ मामले ऐसे भी सामने आए जिसमें पीड़िता, उसके परिजन और गवाह भी केस की सुनवाई के दौरान मुकर गए मगर कोर्ट ने डीएनए जांच जैसी तकनीकों से परीक्षण करा पीड़िता को न्याय दिलाया। जिससे कोर्ट के प्रति लोगों का विश्वास और भी बढ़ गया है।
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कई मामलों में 20 साल तक की सजा सुनाई
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो साल में जिन 32 मामलों में सजा सुनवाई है उनमें दो वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक की सजा के मामले शामिल हैंं। साथ ही 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का अर्थ दंड भी लगाया है। अर्थ दंड न भरने की सूरत में कड़ी मशक्कत से जेल भेजने की सजा भी इसमें शामिल है।
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केस-1
स्टेट वर्सेज योगेश के मामले में आरोपी ने एक ढाई साल की बच्ची के साथ टॉफी दिलाने के बहाने दुष्कर्म कर दिया। उस समय बच्ची के माता-पिता बकरी चराने गए थे। आरोपी पीड़िता के साथ ही रहता था। इस मामले में पुलिस ने तथ्यों में कमी छोड़ दी थी। बाद में कोर्ट में सुनवाई हुई तो बच्ची को 10 लोगों के फोटो दिखाकर शिनाख्त कराई गई। जिसमें आरोपी को बच्ची ने पहचान लिया। इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को 20 साल की सजा के साथ पीड़िता के परिवार को चार लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिलाए।
केस-2
मुलाना थाने के तहत एक पुजारी ने मंदिर में छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म कर दिया। जब इस बात का ग्रामीणों को पता चला तो उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया और एक वीडियो बनाई। जिसमें पुजारी ने अपना जुर्म स्वीकार लिया मगर पुलिस के स्तर से तथ्य जुटाने में कमी रही तो डिप्टी डिस्ट्रक्टि अटार्नी सुरजीत सिंह ने तथ्यों को जुटाकर कोर्ट के समक्ष रखा और दोषी को 20 साल की सजा सुनाई गई। साथ ही पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में चार लाख रुपये दिए गए।
पॉक्सो के मामलों में काफी चुनौती आती है। पुलिस की जांच के बाद भी तथ्य जुटाने पड़ते हैं। अंबाला में बीते दो साल में 32 मामलों में सजा सुनाई गई है। इसमें कई मामले तो काफी चुनौतीपूर्ण रहे। -सुरजीत सिंह, डिप्टी डिस्ट्रक्टि अटार्नी