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कैश नहीं मिला तो बैंक पर जड़ दिया ताला
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:03 AM IST
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अंबाला/नारायणगढ़। बैंक कर्मचारियों पर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाकर भड़के ग्रामीणों ने मंगलवार को गांव अंबली स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पर ताला जड़ दिया। ग्रामीणों ने इस दौरान जमकर हंगामा किया। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई। उल्लेखनीय है कि बीते 23 नवंबर को भी इसी शाखा के बाहर ग्रामीणों ने हंगामा कर ताला जड़ दिया था।
नारायणगढ़-सढौरा रोड पर स्थित अंबली गांव में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा है। इसमें आसपास के लगभग एक दर्जन गांवों के लोगों के खाते हैं। तीन दिन के अवकाश के बाद जब मंगलवार को बैंक खुला तो कैश लेने के लिए खाताधारकों की एक भीड़ एकत्र हो गई। लोग लाइन में लग कर कैश लेने का इंतजार कर रहे थे कि इसी बीच बैंक के कर्मियों की कार्यशैली ने उन्हें नाराज कर दिया। लाइन में लगे रणधीर सैनी, राम कुमार, रमेश कुमार, भूपिंद्र, बलवंत, बाला देवी, सुरेश पाल, प्रदीप कुमार आदि का कहना है कि बैंक कर्मी सुबह से लाइन में लगे लोगों को नजरअंदाज कर अपने चहेतों को कैश बांटने में जुटे हैं। विरोध करने पर बैंक कर्मियों ने दुर्व्यवहार किया गया। इससे वहां मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने बैंक के मुख्य गेट को ताला लगाकर बंद कर दिया।
लगभग एक घंटे तक रही इस तालाबंदी को लेकर लोगों ने बैंक कर्मियों के खिलाफ अपना विरोध जताया। बैंक प्रबंधन द्वारा प्रशासन को खबर करने के बाद मौके पर पहुंचे गुप्तचर विभाग के कर्मियों ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और बैंक प्रबंधन से बात कर लाईन में लगे लोगों की सूची बनवा कर कैश बंटवाया। बता दें कि 20 दिनों में इस बैंक शाखा में तालाबंदी की यह दूसरी घटना है। इससे पहले खाता धारक 23 नवंबर को भी इस शाखा पर तालाबंदी कर चुके हैं।
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बैंक मैनेजर बैंक मैनेजर गजानंद परेवा का कहना है कि यदि किसी बैंक कर्मचारी से कोई शिकायत है तो वह लिखित में दें। उस पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। बैंक पूरी तरह से लोगों को कैश समान रूप से वितरित कर रहा है, जबकि जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे बेबुनियाद हैं।
नोटबंदी के साथ सड़कबंदी भी झेल रहे हैं लोग
- बैंकों के बाहर भारी भीड़, आधी से ज्यादा सड़क पर वाहनों की पार्किंग
- दोपहर दो बजे तक सड़क पर लगता है जाम, परेशान होते हैं वाहन चालक
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। नोटबंदी के साथ-साथ लोगों को अब सड़कों पर जाम भी झेलना पड़ रहा है। नोटबंदी के 35 दिन बीत जाने के बावजूद जहां हालात नहीं बदले हैं। आधी सड़क तक वाहनों की पार्किंग है। थोड़ी-थोड़ी देर के बाद जाम लगने लगा है। यह स्थिति लगातार विकट हो रही है, जबकि लोगों को यह जाम झेलना पड़ रहा है।
अंबाला कैंट की निकलसन रोड पर ही करीब नौ बैंक हैं। इनके एटीएम भी हैं। इसी कारण से इन बैंकों के एटीएम पर जहां लंबी लाइनें लग रही हैं, वहीं इनके वाहन भी सड़क पर ही पार्क किए जा रहे हैं। जो लोग बैंक में जा रहे हैं, वे भी अपने वाहन इसी तरह आधी सड़क पर खड़ा करके जाते हैं। इसी कारण से इस सड़क पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। इस ओर न तो ट्रैफिक पुलिस ध्यान दे रही है और न ही लोगों को राहत मिल पा रही है। स्थिति यह है कि यदि किसी ने अपना वाहन इन बैंकों के बाहर खड़ा किया और कुछ देर के बाद बाहर आया, तो उसे अपना वाहन निकालने के लिए ही इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि तब तक लोग अपने वाहन आड़े तिरछे सड़क तक खड़ा कर देते हैं, जबकि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
यह कहते हैं लोग
बैंक में अपने काम से आए तलविंदर सिंह, जेएस संधू, मेघराज मेहरा, रोशन अली, जसप्रीत सिंह, शंटी, सुखजीत सिंह, भगवंत, राकेश गुप्ता, राजेंद्र का कहना है कि निकलसन रोड पर जिस तरह से बैंक हैं, उसके कारण ही इस रोड पर जाम की स्थिति रहती है। कई बार तो अपना वाहन तक निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है, ताकि जिनके वाहन हैं वे निकालें और वे अपने वाहन को लेकर जा सकें। यह स्थिति दोपहर दो बजे तक रहती है। इससे लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
तीन दिन बाद खुले बैंकों में उमड़ी भीड़
अंबाला/मुलाना। तीन दिनों के अवकाश के बाद खुले बैंकों में मंगलवार को लोगों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। सुबह ही एटीएम के बाहर लाइनें लग गईं, जो दोपहर बाद तक कम नहीं हुईं। इसी तरह बैंकों के भीतर भी यही हालात रहे। न तो बैंकों के भीतर लाइनों में लगे लोगों को पूरा कैश मिल पाया और न ही एटीएम से राहत मिल पाई। उपभोक्ताओं को दो से चार हजार की रकम ही मिली, जबकि कई बैंकों मे नगदी ही नहीं आई। उपभोक्ता जसबीर सिंह, विमल कुमार, रोशन गाबा बराड़ा, जीपी मुल्तानी ने बताया कि दैनिक जरूरतों की खरीदारी करने के साथ ही कई जरूरी काम आ जाते हैं, जहां पैसे की अधिक से अधिक आवश्यकता पड़ती है। लेकिन पैसा बैंकों में न मिलने के कारण लोग असहाय हैं। अब जब तक हालात सामान्य नहीं होते और कैश सर्कुलेट नहीं होता, तब तक यह स्थिति झेलनी पड़ेगी।
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नारायणगढ़-सढौरा रोड पर स्थित अंबली गांव में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा है। इसमें आसपास के लगभग एक दर्जन गांवों के लोगों के खाते हैं। तीन दिन के अवकाश के बाद जब मंगलवार को बैंक खुला तो कैश लेने के लिए खाताधारकों की एक भीड़ एकत्र हो गई। लोग लाइन में लग कर कैश लेने का इंतजार कर रहे थे कि इसी बीच बैंक के कर्मियों की कार्यशैली ने उन्हें नाराज कर दिया। लाइन में लगे रणधीर सैनी, राम कुमार, रमेश कुमार, भूपिंद्र, बलवंत, बाला देवी, सुरेश पाल, प्रदीप कुमार आदि का कहना है कि बैंक कर्मी सुबह से लाइन में लगे लोगों को नजरअंदाज कर अपने चहेतों को कैश बांटने में जुटे हैं। विरोध करने पर बैंक कर्मियों ने दुर्व्यवहार किया गया। इससे वहां मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने बैंक के मुख्य गेट को ताला लगाकर बंद कर दिया।
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लगभग एक घंटे तक रही इस तालाबंदी को लेकर लोगों ने बैंक कर्मियों के खिलाफ अपना विरोध जताया। बैंक प्रबंधन द्वारा प्रशासन को खबर करने के बाद मौके पर पहुंचे गुप्तचर विभाग के कर्मियों ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और बैंक प्रबंधन से बात कर लाईन में लगे लोगों की सूची बनवा कर कैश बंटवाया। बता दें कि 20 दिनों में इस बैंक शाखा में तालाबंदी की यह दूसरी घटना है। इससे पहले खाता धारक 23 नवंबर को भी इस शाखा पर तालाबंदी कर चुके हैं।
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बैंक मैनेजर बैंक मैनेजर गजानंद परेवा का कहना है कि यदि किसी बैंक कर्मचारी से कोई शिकायत है तो वह लिखित में दें। उस पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। बैंक पूरी तरह से लोगों को कैश समान रूप से वितरित कर रहा है, जबकि जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे बेबुनियाद हैं।
नोटबंदी के साथ सड़कबंदी भी झेल रहे हैं लोग
- बैंकों के बाहर भारी भीड़, आधी से ज्यादा सड़क पर वाहनों की पार्किंग
- दोपहर दो बजे तक सड़क पर लगता है जाम, परेशान होते हैं वाहन चालक
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। नोटबंदी के साथ-साथ लोगों को अब सड़कों पर जाम भी झेलना पड़ रहा है। नोटबंदी के 35 दिन बीत जाने के बावजूद जहां हालात नहीं बदले हैं। आधी सड़क तक वाहनों की पार्किंग है। थोड़ी-थोड़ी देर के बाद जाम लगने लगा है। यह स्थिति लगातार विकट हो रही है, जबकि लोगों को यह जाम झेलना पड़ रहा है।
अंबाला कैंट की निकलसन रोड पर ही करीब नौ बैंक हैं। इनके एटीएम भी हैं। इसी कारण से इन बैंकों के एटीएम पर जहां लंबी लाइनें लग रही हैं, वहीं इनके वाहन भी सड़क पर ही पार्क किए जा रहे हैं। जो लोग बैंक में जा रहे हैं, वे भी अपने वाहन इसी तरह आधी सड़क पर खड़ा करके जाते हैं। इसी कारण से इस सड़क पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। इस ओर न तो ट्रैफिक पुलिस ध्यान दे रही है और न ही लोगों को राहत मिल पा रही है। स्थिति यह है कि यदि किसी ने अपना वाहन इन बैंकों के बाहर खड़ा किया और कुछ देर के बाद बाहर आया, तो उसे अपना वाहन निकालने के लिए ही इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि तब तक लोग अपने वाहन आड़े तिरछे सड़क तक खड़ा कर देते हैं, जबकि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
यह कहते हैं लोग
बैंक में अपने काम से आए तलविंदर सिंह, जेएस संधू, मेघराज मेहरा, रोशन अली, जसप्रीत सिंह, शंटी, सुखजीत सिंह, भगवंत, राकेश गुप्ता, राजेंद्र का कहना है कि निकलसन रोड पर जिस तरह से बैंक हैं, उसके कारण ही इस रोड पर जाम की स्थिति रहती है। कई बार तो अपना वाहन तक निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है, ताकि जिनके वाहन हैं वे निकालें और वे अपने वाहन को लेकर जा सकें। यह स्थिति दोपहर दो बजे तक रहती है। इससे लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
तीन दिन बाद खुले बैंकों में उमड़ी भीड़
अंबाला/मुलाना। तीन दिनों के अवकाश के बाद खुले बैंकों में मंगलवार को लोगों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। सुबह ही एटीएम के बाहर लाइनें लग गईं, जो दोपहर बाद तक कम नहीं हुईं। इसी तरह बैंकों के भीतर भी यही हालात रहे। न तो बैंकों के भीतर लाइनों में लगे लोगों को पूरा कैश मिल पाया और न ही एटीएम से राहत मिल पाई। उपभोक्ताओं को दो से चार हजार की रकम ही मिली, जबकि कई बैंकों मे नगदी ही नहीं आई। उपभोक्ता जसबीर सिंह, विमल कुमार, रोशन गाबा बराड़ा, जीपी मुल्तानी ने बताया कि दैनिक जरूरतों की खरीदारी करने के साथ ही कई जरूरी काम आ जाते हैं, जहां पैसे की अधिक से अधिक आवश्यकता पड़ती है। लेकिन पैसा बैंकों में न मिलने के कारण लोग असहाय हैं। अब जब तक हालात सामान्य नहीं होते और कैश सर्कुलेट नहीं होता, तब तक यह स्थिति झेलनी पड़ेगी।