{"_id":"6a4433637b498a577601bd57","slug":"nirvairs-battle-for-life-continues-ambala-news-c-36-1-amb1002-165573-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: निरवैर की जिंदगी की जंग जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: निरवैर की जिंदगी की जंग जारी
विज्ञापन
निरवैर सिंह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- तीन बार रस्सी से बनाए गए फंदे में हाथ फंसाया मगर ऊपर खींचते ही छूट गया
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। धन्यौड़ा गांव का तीन वर्षीय निरवैर सिंह मंगलवार सुबह से जिंदगी की जंग लड़ रहा है। बोरवेल में गिरने के बाद उसे बचाने के लिए एनडीआरएफ ने कई तकनीक लगाईं मगर हर बार उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। रात साढ़े आठ बजे तक वह तीन बार निरवैर के हाथ में रस्सी का फंदा लगा चुके थे मगर हर बार ऊपर खींचने पर हाथ छूट जाता। आखिरी में उन्होंने प्लास्टिक के पाइपों को मंगाया ताकि उनके लचीलेपन का उपयोग किया जा सके मगर अधिक सफलता नहीं मिली। देर रात तक निरवैर को बोरवेल से निकाला नहीं जा सका था।
पहला प्रयास-
कैमरे के साथ भेजा था रस्सी का फंदा
एनडीआरएफ ने सबसे पहले दिन में 12 बजे एक स्टील के पतले पाइपों को बोरवेल में डाला। इस पाइप का मोहाना गोल था और इस पर एक रस्सी का हुक या फंदा लगा हुआ था। इसके साथ ही कैमरा लगा हुआ था। पाइप जैसे-जैसे नीचे गया कैमरा बोरवेल की गहराई को दिखाता रहा। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने देखा कि लाल टीर्शट पहने बच्चा है और उसका एक हाथ ऊपर निकल रहा है। कैमरे में दिखा कि निरवैर ने मुट्ठी भींच रखी थी। इसके बाद एनडीआरएफ ने संभलकर फंदे की रिंग को हाथ में फंसाया और ऊपर से रस्सी को खींच दिया कि तभी कैमरे की तार हाथ में फंस गई। जैसे ही एनडीआरएफ के जवानों ने ऊपर खींचा तो कुछ दूरी के बाद फंदा छूट गया और निरवैर और नीचे चला गया।
दूसरा प्रयास-
निश्चित आकार की मंगाई गई पाइप
दूसरे प्रयास में पाइप छोटी पड़ गई। ऐसे में छावनी से एक दुकान से पाइप मंगाई गई। इस पाइप को भी एक निश्चित आकार का मंगाना था ताकि वह आगे की अन्य पाइपों के साथ जुड़ सके। इसे जोड़ने के लिए सेना के जवानों ने भी कोशिश की मगर नहीं जुड़ी। फिर गांव से ड्रिल मशीन मंगाई गई और पाइप को जोड़कर बोरवेल में दूसरी बार फंदा नीचे डाला गया। इस बार काफी देर तक कोशिश की गई मगर फंदा फस ही नहीं रहा था। यहां तक कि एनडीआरएफ ने कुंडी बनाकर निरवैर की टीशर्ट को फंसाने का प्रयास किया मगर इसमें भी सफलता नहीं मिली। यह सिलसिला शाम छह बजे तक चलता रहा।
विज्ञापन
तीसरा प्रयास-
प्लास्टिक के पाइप मंगाए गए
तीसरे प्रयास के लिए किसी ने सलाह दी कि प्लास्टिक के पाइप लचीले होते हैं ऐसे में इनका प्रयोग किया जा सकता है। कुछ इस प्रकार के बचाव अभियान में प्रयोग किया गया है। ऐसे में प्लास्टिक के पाइप मंगाए गए और फिर फंदा नीचे भेजा गया, मगर पिछली बार की तरह कामयाबी नहीं मिली। एनडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि बोरवेल 330 फीट गहरा था। इस कारण से खोदाई में काफी क्षेत्र और लगभग दो से तीन दिन का समय लग सकता था। इसी कारण से इन तरकीबों के माध्यम से बचाव अभियान चलाया गया।
जेसीबी से लेकर जेनरेटर तक तैयारी दिखी
सुबह शुरू हुए बचाव अभियान में इस बार प्रशासन और बचाव दल की तैयारी ठीक दिखी। एनडीआरएफ की टीम अपने साथ एक ट्रक भरकर बचाव अभियान से जुड़े उपकरणों को लेकर आई थी। इसके साथ ही करीब 30 लोग की टीम मौके पर अभियान में जुटी दिखाई दी। इसके अलावा सेना की टीम जेसीबी मशीनें, लाइट सिस्टम, जेनरेटर, रस्सियां आदि उपकरण लेकर पहुंची थी। अगर खोदाई होती तो हर परिस्थिति के लिए टीमें तैयार थीं।
कैबिनेट मंत्री अनिल विज मौके पर पहुंचे
चंडीगढ़ से लौटने के बाद कैबिनेट मंत्री अनिल विज लगभग शाम सात बजे धन्यौड़ा गांव में पहुंच गए। उन्होंने सबसे पहले बचाव अभियान को देखा। अधिकारियों से अपडेट ली। इसके बाद निरवैर के परिजनों को ढांढस बंधाया। वह काफी देर तक ग्रामीणों के बीच अभियान को देखते रहे। विज से पहले मुलाना की पूर्व विधायक संतोष सारवान भी परिजनों से मिलने पहुंचीं।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। धन्यौड़ा गांव का तीन वर्षीय निरवैर सिंह मंगलवार सुबह से जिंदगी की जंग लड़ रहा है। बोरवेल में गिरने के बाद उसे बचाने के लिए एनडीआरएफ ने कई तकनीक लगाईं मगर हर बार उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। रात साढ़े आठ बजे तक वह तीन बार निरवैर के हाथ में रस्सी का फंदा लगा चुके थे मगर हर बार ऊपर खींचने पर हाथ छूट जाता। आखिरी में उन्होंने प्लास्टिक के पाइपों को मंगाया ताकि उनके लचीलेपन का उपयोग किया जा सके मगर अधिक सफलता नहीं मिली। देर रात तक निरवैर को बोरवेल से निकाला नहीं जा सका था।
पहला प्रयास-
कैमरे के साथ भेजा था रस्सी का फंदा
एनडीआरएफ ने सबसे पहले दिन में 12 बजे एक स्टील के पतले पाइपों को बोरवेल में डाला। इस पाइप का मोहाना गोल था और इस पर एक रस्सी का हुक या फंदा लगा हुआ था। इसके साथ ही कैमरा लगा हुआ था। पाइप जैसे-जैसे नीचे गया कैमरा बोरवेल की गहराई को दिखाता रहा। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने देखा कि लाल टीर्शट पहने बच्चा है और उसका एक हाथ ऊपर निकल रहा है। कैमरे में दिखा कि निरवैर ने मुट्ठी भींच रखी थी। इसके बाद एनडीआरएफ ने संभलकर फंदे की रिंग को हाथ में फंसाया और ऊपर से रस्सी को खींच दिया कि तभी कैमरे की तार हाथ में फंस गई। जैसे ही एनडीआरएफ के जवानों ने ऊपर खींचा तो कुछ दूरी के बाद फंदा छूट गया और निरवैर और नीचे चला गया।
विज्ञापन
दूसरा प्रयास-
निश्चित आकार की मंगाई गई पाइप
दूसरे प्रयास में पाइप छोटी पड़ गई। ऐसे में छावनी से एक दुकान से पाइप मंगाई गई। इस पाइप को भी एक निश्चित आकार का मंगाना था ताकि वह आगे की अन्य पाइपों के साथ जुड़ सके। इसे जोड़ने के लिए सेना के जवानों ने भी कोशिश की मगर नहीं जुड़ी। फिर गांव से ड्रिल मशीन मंगाई गई और पाइप को जोड़कर बोरवेल में दूसरी बार फंदा नीचे डाला गया। इस बार काफी देर तक कोशिश की गई मगर फंदा फस ही नहीं रहा था। यहां तक कि एनडीआरएफ ने कुंडी बनाकर निरवैर की टीशर्ट को फंसाने का प्रयास किया मगर इसमें भी सफलता नहीं मिली। यह सिलसिला शाम छह बजे तक चलता रहा।
विज्ञापन
तीसरा प्रयास-
प्लास्टिक के पाइप मंगाए गए
तीसरे प्रयास के लिए किसी ने सलाह दी कि प्लास्टिक के पाइप लचीले होते हैं ऐसे में इनका प्रयोग किया जा सकता है। कुछ इस प्रकार के बचाव अभियान में प्रयोग किया गया है। ऐसे में प्लास्टिक के पाइप मंगाए गए और फिर फंदा नीचे भेजा गया, मगर पिछली बार की तरह कामयाबी नहीं मिली। एनडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि बोरवेल 330 फीट गहरा था। इस कारण से खोदाई में काफी क्षेत्र और लगभग दो से तीन दिन का समय लग सकता था। इसी कारण से इन तरकीबों के माध्यम से बचाव अभियान चलाया गया।
जेसीबी से लेकर जेनरेटर तक तैयारी दिखी
सुबह शुरू हुए बचाव अभियान में इस बार प्रशासन और बचाव दल की तैयारी ठीक दिखी। एनडीआरएफ की टीम अपने साथ एक ट्रक भरकर बचाव अभियान से जुड़े उपकरणों को लेकर आई थी। इसके साथ ही करीब 30 लोग की टीम मौके पर अभियान में जुटी दिखाई दी। इसके अलावा सेना की टीम जेसीबी मशीनें, लाइट सिस्टम, जेनरेटर, रस्सियां आदि उपकरण लेकर पहुंची थी। अगर खोदाई होती तो हर परिस्थिति के लिए टीमें तैयार थीं।
कैबिनेट मंत्री अनिल विज मौके पर पहुंचे
चंडीगढ़ से लौटने के बाद कैबिनेट मंत्री अनिल विज लगभग शाम सात बजे धन्यौड़ा गांव में पहुंच गए। उन्होंने सबसे पहले बचाव अभियान को देखा। अधिकारियों से अपडेट ली। इसके बाद निरवैर के परिजनों को ढांढस बंधाया। वह काफी देर तक ग्रामीणों के बीच अभियान को देखते रहे। विज से पहले मुलाना की पूर्व विधायक संतोष सारवान भी परिजनों से मिलने पहुंचीं।

निरवैर सिंह

निरवैर सिंह

निरवैर सिंह

निरवैर सिंह

निरवैर सिंह