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Ambala News: मुलाना सीट रिक्त, पांच बार जीता वरुण परिवार
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अंबाला। अंबाला जिला के तहत आने वाली मुलाना विधानसभा सीट को विधायक वरुण चौधरी के छोड़ने के बाद आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित हो गई है। इसके लिए बाकायदा एक गजट अधिसूचना भी हरियाणा विधानसभा की ओर से जारी की है।
अब जब तक विधानसभा चुनाव नहीं होते तब तक यह सीट रिक्त रहेगी। इस अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित मुलाना सीट पर रोचक बात यह है कि इस सीट पर गत 50 वर्षों में वरुण चौधरी का परिवार ही चुनाव लड़ता रहा है। इसमें से नौ चुनाव फूलचंद मुलाना और पिछले दो चुनाव वरुण चौधरी ने लड़े हैं। यहां इस परिवार ने 11 बार चुनाव लड़ा और छह बार हार का सामना करना पड़ा। पांच बार जीत भी दर्ज कराई। मगर अब वरुण चौधरी के सांसद बनने के बाद इस सीट पर कांग्रेस को अनुसूचित जाति से नेता खोजने में दिक्कत हो सकती है, क्योंकि इतने वर्षों में इस कद का स्थानीय नेता फिलहाल तो दिखाई नहीं देता है।
हाईकोर्ट में अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताय कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन (इंडिया) की सरकार नहीं बनी है। इसलिए वरुण लोकसभा सांसद रहते हुए मुलाना से अगला विधानसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं और विधायक बन भी जाते हैं तो उन्हें संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। मगर कांग्रेस पार्टी यह कभी नहीं चाहेगी कि अंबाला लोकसभा सीट पर कभी उपचुनाव हो, क्योंकि पहले ही 15 वर्षो के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस ने अंबाला लोकसभा सीट जीती है।
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अब जब तक विधानसभा चुनाव नहीं होते तब तक यह सीट रिक्त रहेगी। इस अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित मुलाना सीट पर रोचक बात यह है कि इस सीट पर गत 50 वर्षों में वरुण चौधरी का परिवार ही चुनाव लड़ता रहा है। इसमें से नौ चुनाव फूलचंद मुलाना और पिछले दो चुनाव वरुण चौधरी ने लड़े हैं। यहां इस परिवार ने 11 बार चुनाव लड़ा और छह बार हार का सामना करना पड़ा। पांच बार जीत भी दर्ज कराई। मगर अब वरुण चौधरी के सांसद बनने के बाद इस सीट पर कांग्रेस को अनुसूचित जाति से नेता खोजने में दिक्कत हो सकती है, क्योंकि इतने वर्षों में इस कद का स्थानीय नेता फिलहाल तो दिखाई नहीं देता है।
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हाईकोर्ट में अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताय कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन (इंडिया) की सरकार नहीं बनी है। इसलिए वरुण लोकसभा सांसद रहते हुए मुलाना से अगला विधानसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं और विधायक बन भी जाते हैं तो उन्हें संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। मगर कांग्रेस पार्टी यह कभी नहीं चाहेगी कि अंबाला लोकसभा सीट पर कभी उपचुनाव हो, क्योंकि पहले ही 15 वर्षो के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस ने अंबाला लोकसभा सीट जीती है।
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