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हरियाणा में मानसून सुस्त: सामान्य से 25% कम बारिश, जींद में सूखे जैसे हालात; जून और सितंबर में सबसे ज्यादा कमी
Fri, 02 Oct 2026 10:11 AM IST
Naveen
माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)
Published by: Naveen
Updated Fri, 02 Oct 2026 10:11 AM IST
सार
सिरसा में सामान्य से 55 फीसदी, रोहतक में 46 फीसदी, अंबाला में 48 फीसदी और कैथल में 44 फीसदी बारिश कम हुई। यमुनानगर में 727.7 मिमी और पंचकूला में 695.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, लेकिन सामान्य औसत की तुलना में यहां भी क्रमश: 19-19 फीसदी कमी रही।
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सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा में इस बार मानसून की चाल सुस्त रही। चार महीने के मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से 25% कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग, चंडीगढ़ के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य 430.7 मिमी के मुकाबले केवल 322.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसका असर सबसे ज्यादा जींद में दिखाई दिया, जहां सामान्य से 57 फीसदी कम बारिश हुई।
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इसके विपरीत पलवल प्रदेश का इकलौता जिला रहा, जहां सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके कई कारणों में एक कारण अल नीनो का प्रभाव निकल कर सामने आया है। प्रदेश के 22 जिलों के आंकड़ों के मुताबिक पलवल में सामान्य से 20 फीसदी अधिक 479.2 मिमी बारिश हुई। वहीं जींद में सामान्य 394.4 मिमी के मुकाबले महज 169.3 मिमी बारिश हुई।
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सिरसा में सामान्य से 55 फीसदी, रोहतक में 46 फीसदी, अंबाला में 48 फीसदी और कैथल में 44 फीसदी बारिश कम हुई। यमुनानगर में 727.7 मिमी और पंचकूला में 695.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, लेकिन सामान्य औसत की तुलना में यहां भी क्रमश: 19-19 फीसदी कमी रही। बारिश की कमी का असर कृषि और भूजल स्तर पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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क्या होता है अल नीनो
चंडीगढ़ स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शिवेंद्र सिंह के अनुसार, अल नीनो एक वैश्विक समुद्री और जलवायु पैटर्न है, जिसका संबंध प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान से है। इसके दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में मानसून की सक्रियता कमजोर पड़ सकती है।
जून और सितंबर में सबसे ज्यादा कमी
मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून ने हरियाणा में एक जुलाई को दस्तक दी और नौ जुलाई तक पूरे प्रदेश को कवर कर लिया था। इसके बावजूद पूरे सीजन में मानसून की सक्रियता अपेक्षाकृत कमजोर रही। जून में सामान्य 55.3 मिमी के मुकाबले केवल 30.5 मिमी यानी 45 फीसदी कम बारिश हुई। जुलाई में सामान्य 150.5 मिमी के मुकाबले 109.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 27 फीसदी कम रही। अगस्त में कुछ राहत मिली। इस महीने 138.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 147.7 मिमी है। यानी इस महीने केवल छह फीसदी की कमी रही। सितंबर में मानसून की सक्रियता फिर कमजोर पड़ गई और सामान्य से 44 फीसदी कम बारिश हुई।
अधिकारी के अनुसार
इस दक्षिण पश्चिम मानसून सीजन में कई क्षेत्रों में सामान्य व सामान्य से कम बारिश हुई। इसका एक कारण अल नीनाे का प्रभाव है। अल नीनो के कारण मानसून में सक्रियता नहीं आ सकी। अन्य राज्यों पर भी इसका प्रभाव दिखा। अब अक्तूबर में सामान्य या सामान्य से कम तापमान रहने का अनुमान है। -सुरेंद्र पॉल, निदेशक, भारत मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़।