{"_id":"65f0054d1abc78db200e2bf1","slug":"mohit-becomes-mr-haryana-in-yamunanagar-ambala-news-c-36-1-amb1002-119743-2024-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: किसानों की राह में चुनाव नहीं रोड़ा, तैयारी में किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: किसानों की राह में चुनाव नहीं रोड़ा, तैयारी में किसान
विज्ञापन
अंबाला सिटी। हरियाणा पंजाब की सीमा पर बैठे हुए किसानों को लगभग 28 दिन बीत हुए हैं। अभी तक सरकार और किसानों की मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। इधर किसानों ने भी अपने इरादे पक्के कर लिए हैं।
अभी तक लग रहा था कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद किसान वापस लौट सकते हैं। मगर अब किसानों की तैयारियां देखते हुए तो ऐसा नहीं लग रहा है कि चुनावों में भी शंभू बॉर्डर खाली हो सकेगा। क्योंकि किसानों ने यह तय कर लिया है कि अब सरकार बात नहीं सुनती तो वह मोर्चे पर डटे रहेंगे।
इस दौरान अंबाला के शंभू, खनौरी बॉर्डर के बाद मोर्चा डबवाली बॉर्डर को मजबूत करने में जुट गया है। वहीं विभिन्न यूनियनों के किसान नेताओं से कह दिया गया है कि अब लंबे समय की किसान यूनियनें तैयारी कर लें। क्योंकि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तब तक वह बैठे रहेंगे।
विज्ञापन
चुनाव के लिए किसान बैठक में लेंगे निर्णय
किसान आंदोलन के मीडिया प्रभारी महेश चौधरी बताते हैं कि किसान शुभकरण की गांव में अंतिम कार्यक्रम में ही तय कर लिया गया था कि सभी लंबे समय डटे रहने को तैयार हो जाएं। अभी यह तो स्पष्ट है कि सरकार नहीं सुनती तो लोकसभा चुनाव और आगे भी अपना विरोध जारी रख सकते हैं। मगर लोकसभा चुनाव में वह अपना नेता किसे मानेंगे यह तय नहीं है। इस पर संगठन अपनी अलग से रणनीति बनाएगा और उसी प्रकार से आगे बढ़ेगा।
लंगर की सेवा करने वालों को दिया राशन
दिल्ली कूच का झंडा लेकर पंजाब से रवाना हुए किसान शंभू बॉर्डर पर रुक गए हैं। आंदोलन के शुरुआती दिनों में लोगों ने विभिन्न प्रकार के लंगर लगाकर काफी सेवा की थी। अब किसानों ने जो प्रमुख लोग लंगर सेवा कर रहे थे उन्हें ही अपना राशन देना शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें राशन की कमी न पड़े। गौरतलब है कि किसान सैकड़ों ट्रालियों में राशन, लकड़ियां आदि सामान अपने साथ लाए थे ताकि दिल्ली में लंबे समय बैठना पड़े तो कोई दिक्कत न आए।
विज्ञापन
अभी तक लग रहा था कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद किसान वापस लौट सकते हैं। मगर अब किसानों की तैयारियां देखते हुए तो ऐसा नहीं लग रहा है कि चुनावों में भी शंभू बॉर्डर खाली हो सकेगा। क्योंकि किसानों ने यह तय कर लिया है कि अब सरकार बात नहीं सुनती तो वह मोर्चे पर डटे रहेंगे।
विज्ञापन
इस दौरान अंबाला के शंभू, खनौरी बॉर्डर के बाद मोर्चा डबवाली बॉर्डर को मजबूत करने में जुट गया है। वहीं विभिन्न यूनियनों के किसान नेताओं से कह दिया गया है कि अब लंबे समय की किसान यूनियनें तैयारी कर लें। क्योंकि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तब तक वह बैठे रहेंगे।
विज्ञापन
चुनाव के लिए किसान बैठक में लेंगे निर्णय
किसान आंदोलन के मीडिया प्रभारी महेश चौधरी बताते हैं कि किसान शुभकरण की गांव में अंतिम कार्यक्रम में ही तय कर लिया गया था कि सभी लंबे समय डटे रहने को तैयार हो जाएं। अभी यह तो स्पष्ट है कि सरकार नहीं सुनती तो लोकसभा चुनाव और आगे भी अपना विरोध जारी रख सकते हैं। मगर लोकसभा चुनाव में वह अपना नेता किसे मानेंगे यह तय नहीं है। इस पर संगठन अपनी अलग से रणनीति बनाएगा और उसी प्रकार से आगे बढ़ेगा।
लंगर की सेवा करने वालों को दिया राशन
दिल्ली कूच का झंडा लेकर पंजाब से रवाना हुए किसान शंभू बॉर्डर पर रुक गए हैं। आंदोलन के शुरुआती दिनों में लोगों ने विभिन्न प्रकार के लंगर लगाकर काफी सेवा की थी। अब किसानों ने जो प्रमुख लोग लंगर सेवा कर रहे थे उन्हें ही अपना राशन देना शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें राशन की कमी न पड़े। गौरतलब है कि किसान सैकड़ों ट्रालियों में राशन, लकड़ियां आदि सामान अपने साथ लाए थे ताकि दिल्ली में लंबे समय बैठना पड़े तो कोई दिक्कत न आए।