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Ambala News: अस्पताल में सामान्य के साथ मानसिक रोगियों की दवाएं भी खत्म
Sat, 12 Jul 2025 03:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 12 Jul 2025 03:03 AM IST
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अंबाला सिटी। नागरिक अस्पताल में दवाओं की कमी के कारण मरीज परेशानियों से जूझ रहे हैं। मेडिकल काउंटर पर सामान्य दवाओं से लेकर दिमागी मरीजों के लिए भी दवाएं नहीं हैं। एक माह से दवाओं के स्टॉक में लगातार कमी है। अस्पताल में कैल्शियम की भी दवा उपलब्ध नहीं है। जिसे प्रत्येक हड्डी रोग से पीड़ित मरीज को देनी होती है। अस्पताल में करीब 65 तरह की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। जिनमें सामान्य दवाओं से लेकर दिमागी मरीजों की एंजायटी व नींद की दवाएं भी शामिल हैं। इधर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सभी दवाओं के विकल्प मौजूद हैं। इन विकल्पों में जो दवाएं दी गई हैं वे इतनी कारगर नहीं है।
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केस 1-- -
कमर दर्द की दवा नहीं मिली
जगाधरी गेट निवासी सीमा ने बताया कि वे कमर में दर्द की दवा लेने के लिए आई थी। मगर अस्पताल में सिर्फ दर्द की दवा मिली। जबकि पर्ची में कैल्शियम की गोलियां नहीं मिली है। अब मजबूरन उन्हें दवा बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
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एलर्जी का ट्यूब नहीं मिला
हरप्रीत सिंह ने बताया कि उनके बेटे को एलर्जी हुई है। चिकित्सक को दिखाने के बाद जब वे दवा लेने पहुंचे तो वहां पर उन्हें एलर्जी की टयूब नहीं मिली।
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केस 3-- --
दौरे की दवा नहीं थी
नशा मुक्ति केंद्र में आए एक मरीज ने बताया कि वे अपनी दवा लेने के लिए आए थे। चिकित्सक द्वारा लिखी गई क्लोनाजेपम की दवा दौरे में काम आती है। मगर अस्पताल में नहीं मिली। इतना ही नहीं अब यह दवा उन्हें बाहर से भी नहीं मिलेगी। नशा के रूप में इस्तेमाल होने के कारण मरीजों को यह दवाएं मेडिकल स्टोर पर नहीं मिल सकती। वहीं निजी नशा मुक्ति केंद्रों में दवाएं महंगे दामों पर मिलती है। ऐसे में दवाओं की कमी के कारण सबसे अधिक परेशानी
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इन दवाओं की नहीं उपलब्धता
उच्च रक्तचाप के लिए दी जाने वाली दवा टेल्मिसर्टन दवा, गर्भवतियों को उल्टी के लिए दवा डोक्सिनेट, विटामिन सी की गोलियां, कैल्शिल्यम की गोलियां, मल्टीविटामिन सहित बेचैनी और सेटिरिज़िन सिरप जो अप्रिय लक्षणों को दूर करने में मदद करता है, जैसे बंद वाली नाक, लाल पानी वाली आँखें, और त्वचा पर चकत्ते जो एलर्जी की स्थिति के कारण होते हैं। यह सिरप बच्चों को दिया जाता है। अस्पताल में इसके 100 यूनिट ही पड़े हैं। जो सिर्फ आईपीडी मरीजों के लिए ही इस्तेमाल हो रही है।
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एक लाख तक की खरीद सकते हैं दवाएं
अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर जरूरतों को देखते हुए एक लाख रुपये तक की दवा खरीद सकता है। दवाओं की कमी पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है। वहीं सस्ती दवाओं के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र में दवाएं तो मिलती है। मगर यहां पर अधिक आपूर्ति नहीं होती। उक्त दवाओं में से कई दवाएं जन औषधि केंद्र में भी नहीं मिल रही है।
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हमारी ओर से किसी भी दवा की कमी नहीं है। अगर कुछ दवाएं कम हैं तो उनके विकल्प मौजूद हैं।
-- डॉ रेणू बेरी, पीएमओ नागरिक अस्पताल अंबाला सिटी
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जो भी दवाएं कम हुई हैं उनका ऑर्डर लगाया गया है। मानसिक मरीजों को दी जाने वाली दवाओं को खरीदने में थोड़ा समय लगता है। इसलिए देरी हो रही है। वहीं वेंडर से भी जल्द दवाएं उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया है।
-- डॉ पवनीश अग्रवाल, अधीक्षक उप चिकित्सक नागरिक अस्पताल अंबाला ।
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केस 1
कमर दर्द की दवा नहीं मिली
जगाधरी गेट निवासी सीमा ने बताया कि वे कमर में दर्द की दवा लेने के लिए आई थी। मगर अस्पताल में सिर्फ दर्द की दवा मिली। जबकि पर्ची में कैल्शियम की गोलियां नहीं मिली है। अब मजबूरन उन्हें दवा बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
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एलर्जी का ट्यूब नहीं मिला
हरप्रीत सिंह ने बताया कि उनके बेटे को एलर्जी हुई है। चिकित्सक को दिखाने के बाद जब वे दवा लेने पहुंचे तो वहां पर उन्हें एलर्जी की टयूब नहीं मिली।
केस 3
दौरे की दवा नहीं थी
नशा मुक्ति केंद्र में आए एक मरीज ने बताया कि वे अपनी दवा लेने के लिए आए थे। चिकित्सक द्वारा लिखी गई क्लोनाजेपम की दवा दौरे में काम आती है। मगर अस्पताल में नहीं मिली। इतना ही नहीं अब यह दवा उन्हें बाहर से भी नहीं मिलेगी। नशा के रूप में इस्तेमाल होने के कारण मरीजों को यह दवाएं मेडिकल स्टोर पर नहीं मिल सकती। वहीं निजी नशा मुक्ति केंद्रों में दवाएं महंगे दामों पर मिलती है। ऐसे में दवाओं की कमी के कारण सबसे अधिक परेशानी
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इन दवाओं की नहीं उपलब्धता
उच्च रक्तचाप के लिए दी जाने वाली दवा टेल्मिसर्टन दवा, गर्भवतियों को उल्टी के लिए दवा डोक्सिनेट, विटामिन सी की गोलियां, कैल्शिल्यम की गोलियां, मल्टीविटामिन सहित बेचैनी और सेटिरिज़िन सिरप जो अप्रिय लक्षणों को दूर करने में मदद करता है, जैसे बंद वाली नाक, लाल पानी वाली आँखें, और त्वचा पर चकत्ते जो एलर्जी की स्थिति के कारण होते हैं। यह सिरप बच्चों को दिया जाता है। अस्पताल में इसके 100 यूनिट ही पड़े हैं। जो सिर्फ आईपीडी मरीजों के लिए ही इस्तेमाल हो रही है।
एक लाख तक की खरीद सकते हैं दवाएं
अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर जरूरतों को देखते हुए एक लाख रुपये तक की दवा खरीद सकता है। दवाओं की कमी पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है। वहीं सस्ती दवाओं के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र में दवाएं तो मिलती है। मगर यहां पर अधिक आपूर्ति नहीं होती। उक्त दवाओं में से कई दवाएं जन औषधि केंद्र में भी नहीं मिल रही है।
हमारी ओर से किसी भी दवा की कमी नहीं है। अगर कुछ दवाएं कम हैं तो उनके विकल्प मौजूद हैं।
जो भी दवाएं कम हुई हैं उनका ऑर्डर लगाया गया है। मानसिक मरीजों को दी जाने वाली दवाओं को खरीदने में थोड़ा समय लगता है। इसलिए देरी हो रही है। वहीं वेंडर से भी जल्द दवाएं उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया है।