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मां भगवती का अश्व पर होगा आगमन : पं देवमित्र
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अंबाला। हिन्दू परिवारों में नवरात्रों पर विशेष पूजा पाठ अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार करते हैं। नवरात्र के बारे में रूद्रयामल तंत्र में कहा गया है कि नवशक्ति समापुक्ता नवरात्रं तदुक्ष्यते अर्थात नव शक्तियो से युक्त होने के कारण इन्हें नवरात्र कहा जाता है। पं. देव मित्र पांडेय (हरे दरवाजे वाले) बताते हैं कि वर्ष में 4 बार नवरात्र आते हैं।
बसंत नवरात्र पूजा एवं घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 9 अप्रैल दिन मंगलवार को प्रातः सूर्योदय से सुबह 10 बज कर 18 मिनट तक और अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12.51 मिनट तक शुभ है। नवरात्र का आरंभ मंगलवार होने के कारण देवी मां भगवती का शुभ आगमन अश्व पर हो रहा है जोकि शुभ और श्रेष्ठ हैं।
देवी पूजा विधि एवं विधान मां दुर्गा भगवती का साधक व भक्त स्नानादि से शुद्ध होकर शुद्ध वस्त्र पहन कर पूजा स्थल को सजाए और मंडप में श्री दुर्गाजी की मूर्ति को स्थापित करें।
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मूर्ति के दांई और रेत मिलाकर जौ बीज दें। मंडप के पूर्व कोने में दीपक (ज्योत) की स्थापना करें। पूजन में सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करके अन्य देवी देवताओं की पूजा करें। पूजन में जल, चंदन, रोली, कलावा, अक्षत, पुष्प (फूल), फूलमाला, धुप दीप, नवैध, फल पान, सुपारी, लौंग, इलायची आदि से मां भगवती जगदम्बा की पूजा करें। उसके बाद दुर्गा का पाठ, दुर्गा चालीसा और इस मंत्र का जप करें। इसके बाद 11 माला ऊँ ऐं ह्री क्लीं चा मुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करें। पाठ-जप आदि दोनों समय सुबह शाम करें।
नवरात्रों पर इन मंत्रों का करें जाप।
पहले दिन शैलपुत्री: ऊँ शैलपुन्न्यै नमः का जाप करें।
दूसरे दिन ब्रहमचारिणी: ऊँ ब्रहमचारिणी नमः का जाप करें।
तीसरे दिन चन्द्रघंटा :ऊँ चंद्रघण्टायै नमः का जाप करें।
चौथे दिन कूष्माण्डा: ऊँ कूष्माण्डयै नमः का जाप करें।
पांचवें दिन स्कन्द माता: ऊँ स्कन्द मातायै नमः का जाप करें।
छठे दिन कात्यायनी: ऊँ कात्यायिन्यै नमः का जाप करें।
सांतवे दिन कालरात्रि: ऊँ कालारात्र्यै नमः का जाप करें।
आठवें दिन महागौरी: ऊँ महागौर्य नमः का जाप करें।
नौवें दिन सिद्धिदात्री: ऊँ सिद्धिदात्र्यै नमः का जाप करें।
विशेष प्रयोग:
पंडित देव मित्र ने बताया कि चार मुख वाला दीया जला कर नौ जोड़े लौंग सिर वाले, देशी घी, तिल का तेल और सरसों का तेल मिलाकर जलाएं जो कि सवा घंटे तक जलता रहे यह प्रयोग सुबह-शाम दोनों समय करने से तीनों माता मां काली, मां सरस्वती और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
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बसंत नवरात्र पूजा एवं घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 9 अप्रैल दिन मंगलवार को प्रातः सूर्योदय से सुबह 10 बज कर 18 मिनट तक और अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12.51 मिनट तक शुभ है। नवरात्र का आरंभ मंगलवार होने के कारण देवी मां भगवती का शुभ आगमन अश्व पर हो रहा है जोकि शुभ और श्रेष्ठ हैं।
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देवी पूजा विधि एवं विधान मां दुर्गा भगवती का साधक व भक्त स्नानादि से शुद्ध होकर शुद्ध वस्त्र पहन कर पूजा स्थल को सजाए और मंडप में श्री दुर्गाजी की मूर्ति को स्थापित करें।
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मूर्ति के दांई और रेत मिलाकर जौ बीज दें। मंडप के पूर्व कोने में दीपक (ज्योत) की स्थापना करें। पूजन में सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करके अन्य देवी देवताओं की पूजा करें। पूजन में जल, चंदन, रोली, कलावा, अक्षत, पुष्प (फूल), फूलमाला, धुप दीप, नवैध, फल पान, सुपारी, लौंग, इलायची आदि से मां भगवती जगदम्बा की पूजा करें। उसके बाद दुर्गा का पाठ, दुर्गा चालीसा और इस मंत्र का जप करें। इसके बाद 11 माला ऊँ ऐं ह्री क्लीं चा मुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करें। पाठ-जप आदि दोनों समय सुबह शाम करें।
नवरात्रों पर इन मंत्रों का करें जाप।
पहले दिन शैलपुत्री: ऊँ शैलपुन्न्यै नमः का जाप करें।
दूसरे दिन ब्रहमचारिणी: ऊँ ब्रहमचारिणी नमः का जाप करें।
तीसरे दिन चन्द्रघंटा :ऊँ चंद्रघण्टायै नमः का जाप करें।
चौथे दिन कूष्माण्डा: ऊँ कूष्माण्डयै नमः का जाप करें।
पांचवें दिन स्कन्द माता: ऊँ स्कन्द मातायै नमः का जाप करें।
छठे दिन कात्यायनी: ऊँ कात्यायिन्यै नमः का जाप करें।
सांतवे दिन कालरात्रि: ऊँ कालारात्र्यै नमः का जाप करें।
आठवें दिन महागौरी: ऊँ महागौर्य नमः का जाप करें।
नौवें दिन सिद्धिदात्री: ऊँ सिद्धिदात्र्यै नमः का जाप करें।
विशेष प्रयोग:
पंडित देव मित्र ने बताया कि चार मुख वाला दीया जला कर नौ जोड़े लौंग सिर वाले, देशी घी, तिल का तेल और सरसों का तेल मिलाकर जलाएं जो कि सवा घंटे तक जलता रहे यह प्रयोग सुबह-शाम दोनों समय करने से तीनों माता मां काली, मां सरस्वती और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।