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Ambala News: भारत सहित पड़ोसी देशों के लिए भी सिरदर्द बनी लंपी स्किन डिजीज
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वैभव शर्मा
अंबाला। लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) भारत ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी सिरदर्द बनी हुई है। यही कारण है कि सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) देशों ने हाल ही में भूटान में एलएसडी काे लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया, जिसमें भूटान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश ने लंपी स्किन डिजीज से लड़ने के लिए गॉट पॉक्स की वैक्सीन को नकार दिया है। इन देशों की इच्छा है कि भारत इन्हें एलएसडी वायरस से लड़ने के लिए अपने यहां बनी स्वदेशी वैक्सीन को मुहैया कराए। इसके लिए सार्क देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर इस वैक्सीन के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करनी पड़ी तो भी वह करेंगे। सार्क देशों के लिए इसलिए भी चिंता बड़ी है, क्योंकि जिन देशों से वह अभी तक गॉट पाक्स की वैक्सीन खरीद रहे हैं, वह उन्हें काफी महंगी पड़ रही है। साथ ही यह अधिक प्रभावी भी नहीं है। ब्यूरो
क्याें सार्क देशों ने गॉट पॉक्स वैक्सीन को नकारा
दरअसल, भूटान में सार्क देशों की बैठक में भारत से केंद्रीय पशुपालन विभाग के एक अधिकारी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से वरिष्ठ वैज्ञानिक ने शिरकत की थी। इसमें भारत की तरफ से आईसीएआर के वैज्ञानिक ने आंकड़ों के साथ बताया कि गॉट पाक्स वैक्सीन गायों पर कामयाब नहीं है। इसका कोई ट्रायल भी नहीं हुआ है। भारत में जिन पशुओं को यह लगाई गई, उनमें से 32 हजार पशु अपनी जान गंवा चुके हैं। इसी प्रकार साढ़े चार लाख से अधिक पशु तो अकेले महाराष्ट्र में वैक्सीन लगने के बाद संक्रमित हो गए। अब फिर से भारत सहित पड़ोसी देशों में यह बीमारी पांव पसार रही है। गॉट पाक्स के कम असरदार साबित होने की बात पर बैठक में वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ ने भी मोहर लगा दी। इसके बाद नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका ने भारत की स्वदेशी वैक्सीन लेने की मांग की है।
स्वदेशी वैक्सीन स्वीकृति के इंतजार में अटकी
एक तरफ जहां सार्क देश भारत की स्वदेशी वैक्सीन की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में गायों के लिए विशेष तौर पर तैयार की गई स्वदेशी वैक्सीन अभी सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन और केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय के पास स्वीकृति के इंतजार में है, जबकि इस वैक्सीन की तकनीकि लेने वाली कंपनियां प्रोडक्शन को तैयार हैं। यह स्थिति तब है जब भारत के हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में फिर से एलएसडी दोबारा से पैर पसार रही है।
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अंबाला। लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) भारत ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी सिरदर्द बनी हुई है। यही कारण है कि सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) देशों ने हाल ही में भूटान में एलएसडी काे लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया, जिसमें भूटान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश ने लंपी स्किन डिजीज से लड़ने के लिए गॉट पॉक्स की वैक्सीन को नकार दिया है। इन देशों की इच्छा है कि भारत इन्हें एलएसडी वायरस से लड़ने के लिए अपने यहां बनी स्वदेशी वैक्सीन को मुहैया कराए। इसके लिए सार्क देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर इस वैक्सीन के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करनी पड़ी तो भी वह करेंगे। सार्क देशों के लिए इसलिए भी चिंता बड़ी है, क्योंकि जिन देशों से वह अभी तक गॉट पाक्स की वैक्सीन खरीद रहे हैं, वह उन्हें काफी महंगी पड़ रही है। साथ ही यह अधिक प्रभावी भी नहीं है। ब्यूरो
क्याें सार्क देशों ने गॉट पॉक्स वैक्सीन को नकारा
दरअसल, भूटान में सार्क देशों की बैठक में भारत से केंद्रीय पशुपालन विभाग के एक अधिकारी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से वरिष्ठ वैज्ञानिक ने शिरकत की थी। इसमें भारत की तरफ से आईसीएआर के वैज्ञानिक ने आंकड़ों के साथ बताया कि गॉट पाक्स वैक्सीन गायों पर कामयाब नहीं है। इसका कोई ट्रायल भी नहीं हुआ है। भारत में जिन पशुओं को यह लगाई गई, उनमें से 32 हजार पशु अपनी जान गंवा चुके हैं। इसी प्रकार साढ़े चार लाख से अधिक पशु तो अकेले महाराष्ट्र में वैक्सीन लगने के बाद संक्रमित हो गए। अब फिर से भारत सहित पड़ोसी देशों में यह बीमारी पांव पसार रही है। गॉट पाक्स के कम असरदार साबित होने की बात पर बैठक में वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ ने भी मोहर लगा दी। इसके बाद नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका ने भारत की स्वदेशी वैक्सीन लेने की मांग की है।
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स्वदेशी वैक्सीन स्वीकृति के इंतजार में अटकी
एक तरफ जहां सार्क देश भारत की स्वदेशी वैक्सीन की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में गायों के लिए विशेष तौर पर तैयार की गई स्वदेशी वैक्सीन अभी सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन और केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय के पास स्वीकृति के इंतजार में है, जबकि इस वैक्सीन की तकनीकि लेने वाली कंपनियां प्रोडक्शन को तैयार हैं। यह स्थिति तब है जब भारत के हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में फिर से एलएसडी दोबारा से पैर पसार रही है।
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