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Ambala News: भगवान शिव ने दिया था दक्ष को जीवनदान
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शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन पहुंचे श्रद्धालु।
अंबाला सिटी। शहर के जट्टां वाला प्राचीन शिव मंदिर में चल रही महा शिवपुराण कथा के पांचवें दिन पंडित राकेश शर्मा ने शिवजी का प्रसन्न हो दक्ष को जीवित करना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जब इस प्रकार देवताओं सहित विष्णु ने शंकर भगवान की स्तुति की तो भगवान शंकर देवताओं को धैर्य बांधते हुए बोले-हे देवश्रेष्ठों दक्ष के यज्ञ को मैंने विध्वंस नहीं किया है।
जो दूसरों का बुरा चाहता है, उसका बुरा होता है। दक्ष का बकरे का सा सिर होगा। मेरे गणों द्वारा मारे गये देवताओं के टूटे अंग भी ठीक हो जायेंगे। उनका यह कहना सुन विष्णु आदि सहित ब्रह्मा को बड़ी प्रसन्नता हुई। सबने शिवजी को धन्यवाद दिया। फिर देवर्षियों सहित शिवजी यज्ञ के उसी स्थान में आये, जहां दक्ष ने यज्ञ आरंभ किया था। उसी समय भगवान शंकर ने वहां पहुंच कर वीरभद्र की ओर से यज्ञ का निरीक्षण किया।
यज्ञ की यह दशा देख कर वीरभद्र को बुला भगवान शंकर ने हस कर उससे यह कहा हे महाबाहो वीरभद्र अब तुम शीघ्र दक्ष का वह मृतक शरीर लाओ, शिवजी के इतना कहते ही वीरभद्र ने दक्ष का सिर रहित शरीर लाकर शीघ्र ही उनके सामने रख दिया। भगवान शंकर ने यज्ञोचित पशु अर्थात् बकरे का सिर लेकर प्रजापति दक्ष के सिर पर जोड़ दिया और ज्योंही कृपा-दृष्टि से देखा वह जीवित होकर उठ बैठा। वह लोक-कल्याणकारक भगवा शिव की विनम्न भाव से स्तुति करने लगा।
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जो दूसरों का बुरा चाहता है, उसका बुरा होता है। दक्ष का बकरे का सा सिर होगा। मेरे गणों द्वारा मारे गये देवताओं के टूटे अंग भी ठीक हो जायेंगे। उनका यह कहना सुन विष्णु आदि सहित ब्रह्मा को बड़ी प्रसन्नता हुई। सबने शिवजी को धन्यवाद दिया। फिर देवर्षियों सहित शिवजी यज्ञ के उसी स्थान में आये, जहां दक्ष ने यज्ञ आरंभ किया था। उसी समय भगवान शंकर ने वहां पहुंच कर वीरभद्र की ओर से यज्ञ का निरीक्षण किया।
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यज्ञ की यह दशा देख कर वीरभद्र को बुला भगवान शंकर ने हस कर उससे यह कहा हे महाबाहो वीरभद्र अब तुम शीघ्र दक्ष का वह मृतक शरीर लाओ, शिवजी के इतना कहते ही वीरभद्र ने दक्ष का सिर रहित शरीर लाकर शीघ्र ही उनके सामने रख दिया। भगवान शंकर ने यज्ञोचित पशु अर्थात् बकरे का सिर लेकर प्रजापति दक्ष के सिर पर जोड़ दिया और ज्योंही कृपा-दृष्टि से देखा वह जीवित होकर उठ बैठा। वह लोक-कल्याणकारक भगवा शिव की विनम्न भाव से स्तुति करने लगा।
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