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Ambala News: स्टाफ की कमी, वेंटिलेटर नहीं हो रहे इस्तेमाल
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अंबाला सिटी। जिला अंबाला के नागरिक अस्पताल में आईसीयू यूनिट के अभाव में प्रत्येक माह 70 से 100 मरीज सिटी और छावनी नागरिक अस्पताल से चंडीगढ़ या सेक्टर-32 में रेफर किया जा रहा है। विभाग के पास वेंटिलेटर भी हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण उन्हें इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा।
स्टाफ के साथ साथ इंटेंसिविस्ट भी नहीं है। जो वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज की जांच करता है। कोरोना काल में भी एमओ ने मिलकर वेंटिलेटर को चलाया था। उसके बाद से अब वेंटिलेटर का इस्तेमाल न के बराबर ही है। विभाग आपातकाल में मरीज को भर्ती करने के दौरान सीपैप मोनिटर का इस्तेमाल करते हैं। इससे मरीज के उपचार में नजर रखी जाती है। इसके साथ ही वेंटिलेटर की सुविधा में बढ़ोतरी करने वाली मेडिकल एयर की भी सुविधा नहीं है।
महीने में 70 से 100 मरीज रेफर
सिटी व छावनी नागरिक अस्पताल में प्रत्येक माह 70 से 100 मरीज रेफर किए जाते हैं। अगर रोजाना का आंकड़ा देखें तो इस हिसाब से रोजाना तीन से चार मरीज रेफर किए जा रहे हैं। इसमें करंट से घायल, हादसे में घायल, आगजनी के शिकार सहित अन्य कई प्रकार के गंभीर मामले होते हैं। वेंटिलेटर होने के बाद भी सिटी नागरिक अस्पताल में मरीजों का उपचार नहीं हो सकता है। क्योंकि प्रर्याप्त स्टाफ ही नहीं है।
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बीएमई करते हैं देखरेख
डॉ. हितार्थ ने बताया कि वेंटिलेटर लंबे समय से इस्तेमाल किए बिना ही रखें हुए हैं। ऐसे में उनके रखरखाव की जिम्मेवारी बाॅयो मेडिकल इंजीनियर को दी गई है। जो समय समय पर वेंटिलेटर व अन्य उपकरणों की जांच करते हैं। कुछ वेंटिलेटर ऐसी कंपनियों के है जो चाइना में बने हैं। अब विभाग के पास उन वेंटिलेटरों को ठीक करवाने में परेशानी होती है। कोरोना कॉल में निजी कंपनियों द्वारा पीएम केयर के जरिए ये वेंटिलेटर मिले थे।
वर्जन
वेंटिलेटर को चलाने के लिए प्रर्याप्त संख्या में स्टाफ की कमी है। इसके साथ ही उससे संबंधित चिकित्सक भी कम है। इसलिए उन्हें मरीजों को रेफर करना पड़ता है। फिर भी अस्पताल में सरकार की ओर सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए आईसीयू यूनिट बनवाई जा रही है। जिससे रेफर करने में मरीजों को कुछ राहत मिलेगी।
-डॉ हितार्थ, एमओ, स्वास्थ्य विभाग अंबाला।
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स्टाफ के साथ साथ इंटेंसिविस्ट भी नहीं है। जो वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज की जांच करता है। कोरोना काल में भी एमओ ने मिलकर वेंटिलेटर को चलाया था। उसके बाद से अब वेंटिलेटर का इस्तेमाल न के बराबर ही है। विभाग आपातकाल में मरीज को भर्ती करने के दौरान सीपैप मोनिटर का इस्तेमाल करते हैं। इससे मरीज के उपचार में नजर रखी जाती है। इसके साथ ही वेंटिलेटर की सुविधा में बढ़ोतरी करने वाली मेडिकल एयर की भी सुविधा नहीं है।
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महीने में 70 से 100 मरीज रेफर
सिटी व छावनी नागरिक अस्पताल में प्रत्येक माह 70 से 100 मरीज रेफर किए जाते हैं। अगर रोजाना का आंकड़ा देखें तो इस हिसाब से रोजाना तीन से चार मरीज रेफर किए जा रहे हैं। इसमें करंट से घायल, हादसे में घायल, आगजनी के शिकार सहित अन्य कई प्रकार के गंभीर मामले होते हैं। वेंटिलेटर होने के बाद भी सिटी नागरिक अस्पताल में मरीजों का उपचार नहीं हो सकता है। क्योंकि प्रर्याप्त स्टाफ ही नहीं है।
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बीएमई करते हैं देखरेख
डॉ. हितार्थ ने बताया कि वेंटिलेटर लंबे समय से इस्तेमाल किए बिना ही रखें हुए हैं। ऐसे में उनके रखरखाव की जिम्मेवारी बाॅयो मेडिकल इंजीनियर को दी गई है। जो समय समय पर वेंटिलेटर व अन्य उपकरणों की जांच करते हैं। कुछ वेंटिलेटर ऐसी कंपनियों के है जो चाइना में बने हैं। अब विभाग के पास उन वेंटिलेटरों को ठीक करवाने में परेशानी होती है। कोरोना कॉल में निजी कंपनियों द्वारा पीएम केयर के जरिए ये वेंटिलेटर मिले थे।
वर्जन
वेंटिलेटर को चलाने के लिए प्रर्याप्त संख्या में स्टाफ की कमी है। इसके साथ ही उससे संबंधित चिकित्सक भी कम है। इसलिए उन्हें मरीजों को रेफर करना पड़ता है। फिर भी अस्पताल में सरकार की ओर सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए आईसीयू यूनिट बनवाई जा रही है। जिससे रेफर करने में मरीजों को कुछ राहत मिलेगी।
-डॉ हितार्थ, एमओ, स्वास्थ्य विभाग अंबाला।