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Ambala News: केहर सुत ले आयो डगरिया सखी ... गीत से बांधा समां
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मिठ्ठापुर स्थित अंबाला कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड एप्लाइड रिसर्च में आयोजित संगीतालोक कार्यक्रम
अंबाला। पद्म विभूषण पंडित कुमार गंधर्व के जन्म शताब्दी पर छावनी के मिट्ठापुर स्थित अंबाला कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड एप्लाइड रिसर्च में संगीता लोक पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पद्म विभूषण पंडित कुमार गंधर्व की प्रतिभाशाली सुपुत्री एवं शिष्या कलापिनी कोमकली मौजूद रहीं।
इस दौरान कार्यक्रम के आरंभ में पंडित कुमार गंधर्व के जीवन की कुछ झलकियाें का प्रदर्शन किया गया और उनके बचपन की एक रिकोर्डिंग भी सुनाई गई। पंडित कुमार गंधर्व एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायक हुए। जिन्होंने अपनी विलक्षण शैली से हिंदुस्तानी संगीत में नए आयाम स्थापित किए।
उन्होंने अपनी सांगीतिक शिक्षा पंडित बीआर देवधर उसके पश्चात अंजनीवाई मालपेकर से हुई। उनकी जन्म शताब्दी पर आयोजित इस संगीतालोक कार्यक्रम में अपने पिता के जीवन पर छाया चित्रों पर प्रकाश डाला।
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इसके बाद कलापिनी कोमकली ने पिता की ओर से गाये गए कबीर दास, तुलसी दास और मीरा बाई के प्रसिद्ध भजन केहर सुत ले आयो डगरिया, सखी मोरी नींद नसानी हो, उड़ जाएगा हंस अकेला, सुनता है गुरु ज्ञानी इत्यादि का मार्मिक एवं हृदय स्पर्शी प्रस्तुतिकरण कर श्रोताओं को लोकोत्तर आनंद की प्रतीति करवाई। इस दौरान संगतकार चेतन निगम, खड़ग सिंह, कृष ने अति सुंदर संगत कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके बाद संगीता लोक के अध्यक्ष सोमदेव, सचिव आशावंत ने इस अवसर पर कुमार से संबंधित अपने कुछ अनुभव सांझा किए।
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इस दौरान कार्यक्रम के आरंभ में पंडित कुमार गंधर्व के जीवन की कुछ झलकियाें का प्रदर्शन किया गया और उनके बचपन की एक रिकोर्डिंग भी सुनाई गई। पंडित कुमार गंधर्व एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायक हुए। जिन्होंने अपनी विलक्षण शैली से हिंदुस्तानी संगीत में नए आयाम स्थापित किए।
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उन्होंने अपनी सांगीतिक शिक्षा पंडित बीआर देवधर उसके पश्चात अंजनीवाई मालपेकर से हुई। उनकी जन्म शताब्दी पर आयोजित इस संगीतालोक कार्यक्रम में अपने पिता के जीवन पर छाया चित्रों पर प्रकाश डाला।
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इसके बाद कलापिनी कोमकली ने पिता की ओर से गाये गए कबीर दास, तुलसी दास और मीरा बाई के प्रसिद्ध भजन केहर सुत ले आयो डगरिया, सखी मोरी नींद नसानी हो, उड़ जाएगा हंस अकेला, सुनता है गुरु ज्ञानी इत्यादि का मार्मिक एवं हृदय स्पर्शी प्रस्तुतिकरण कर श्रोताओं को लोकोत्तर आनंद की प्रतीति करवाई। इस दौरान संगतकार चेतन निगम, खड़ग सिंह, कृष ने अति सुंदर संगत कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके बाद संगीता लोक के अध्यक्ष सोमदेव, सचिव आशावंत ने इस अवसर पर कुमार से संबंधित अपने कुछ अनुभव सांझा किए।