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साली की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म में फंसे मौसा को 10 साल कैद, 25 हजार जुर्माना
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करीब सात माह पूर्व शहजादपुर थानाक्षेत्र के एक गांव में साली की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में दोषी शेरूलाल को अदालत ने दस साल कैद के साथ 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया है। मार्च में शहर महिला थाने में दर्ज हुए छह पोस्को एक्ट के केस में करीब एक दर्जन लोगों की गवाही हुई। इनमें शिकायतकर्ता, पुलिस, डाक्टर व अन्य शामिल हैं।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने आरोपी को सोमवार दोषी करार दिया था। फैसले के लिए बुधवार की तिथि निर्धारित की थी। पीड़िता अब एक बच्ची को जन्म दे चुकी है। गिरफ्तारी के बाद से दोषी की तमाम जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। जानकारी के अनुसार सुबह अन्य बंदी व कैदियों के साथ शेरूलाल को अदालत लाकर बक्शीखाने में रखा गया। दोपहर बाद उसकी मौजूदगी में सजा सुनाई गई। इससे पूर्व अभियोजन व बचाव पक्ष ने सजावधि पर अपने-अपने पक्ष सुनाए। सजा के बाद दोषी को वापस जेल भेज दिया गया।
केस के मुुताबिक मूलरूम से बिहार का शेरूलाल खेतों में मजदूरी करता था। उस दौरान उसकी साली की 12 वर्षीय नाबालिग बेटी भी उसके साथ रहती थी। दोषी की दो छोटी लड़कियां हैं। उसी दौरान धीरे-धीरे वह पीड़िता से छेड़छाड़ के बाद गलत काम करने लगा। नाबालिग को धमकी दी कि किसी को बताया तो वह उसे व परिवार को जान से मार देगा। पीड़िता ने मुंह नहीं खोला लेकिन एक दिन पेट में दर्द होने पर पीड़िता का मेडिकल कराया गया तो उसके गर्भवती होने का खुलासा हो गया। उसके बाद साली के बयानों पर पोस्को एक्ट का केस दर्ज उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बताया जा रहा कि उसके जेल जाने के बाद पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने आरोपी को सोमवार दोषी करार दिया था। फैसले के लिए बुधवार की तिथि निर्धारित की थी। पीड़िता अब एक बच्ची को जन्म दे चुकी है। गिरफ्तारी के बाद से दोषी की तमाम जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। जानकारी के अनुसार सुबह अन्य बंदी व कैदियों के साथ शेरूलाल को अदालत लाकर बक्शीखाने में रखा गया। दोपहर बाद उसकी मौजूदगी में सजा सुनाई गई। इससे पूर्व अभियोजन व बचाव पक्ष ने सजावधि पर अपने-अपने पक्ष सुनाए। सजा के बाद दोषी को वापस जेल भेज दिया गया।
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केस के मुुताबिक मूलरूम से बिहार का शेरूलाल खेतों में मजदूरी करता था। उस दौरान उसकी साली की 12 वर्षीय नाबालिग बेटी भी उसके साथ रहती थी। दोषी की दो छोटी लड़कियां हैं। उसी दौरान धीरे-धीरे वह पीड़िता से छेड़छाड़ के बाद गलत काम करने लगा। नाबालिग को धमकी दी कि किसी को बताया तो वह उसे व परिवार को जान से मार देगा। पीड़िता ने मुंह नहीं खोला लेकिन एक दिन पेट में दर्द होने पर पीड़िता का मेडिकल कराया गया तो उसके गर्भवती होने का खुलासा हो गया। उसके बाद साली के बयानों पर पोस्को एक्ट का केस दर्ज उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बताया जा रहा कि उसके जेल जाने के बाद पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया।
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