फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Judicial inquiry into prisoner's death starts, medical board of doctors did post-mortem

कैदी की मौत में ज्यूडीशियल जांच शुरू, डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2021 02:11 AM IST
विज्ञापन
Judicial inquiry into prisoner's death starts, medical board of doctors did post-mortem
जेल में कैदी विजयपाल उर्फ पप्पू की मौत के मामले में ज्यूडीशियल जांच शुरू हो गई है। सुबह करीब सात बजे उप्र के मिल्क रामपुर के गांव पिपाहा से कैदी की पत्नी बिरमा देवी, बेटा अजय, दामाद धर्मेंद्र, मौसा रामपाल और सरपंच मलखान सिंह जेल पहुंचे। ढाई घंटे जेल में बिताए और फिर जेल प्रशासन उन्हें मृतक कैदी के सामान समेत नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में लेकर आया। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा वीडियोग्राफी कराते हुए डॉक्टरों के बोर्ड से मेडिकल कराया गया। इस बोर्ड में डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. अनुज, डॉ. मनीष शामिल थे।
विज्ञापन

जेल से लाए गए मृतक की बाजू पर पेन से लिखा था कि राकेश लोचव मेरी मौत के जिम्मेदार हैं। न्यायिक अधिकारी के सामने परिजनों ने लिखावट वाली को बाजू को देखा, लेकिन उन्हें फोटो करने से मना कर दिया गया। बावजूद इसके कुछ ही पलों में बाजू पर लिखे की फोटो वायरल हो गईं। इस मामले में एक डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध है, जिसकी मेडिकल बोर्ड में ड्यूटी नहीं थी। यह डॉक्टर कैदी के परिजनों को कुछ समझाते हुए भी दिखा। इसके अलावा परिवार से कुछ अन्य लोगों ने भी संपर्क साधा। बताते हैं कि इस डॉक्टर की जेल में डिप्टी जेलर से कहासुनी हुई थी। मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू होने से जेल प्रशासन कुछ भी कहने से बचता रहा।
विज्ञापन

पत्नी और बेटे ने बताया
इस दौरान कैदी की पत्नी बिरमा देवी और बेटे अजय ने बताया कि उसके पिता की करीब सवा साल की कैद बकाया थी। उन्हें यकीन नहीं आ रहा कि वे ऐसा कदम कैसे उठा सकते हैं। बेटे अजय ने बताया कि 12 जनवरी को उसकी पिता से जेल एसटीडी पर बात हुई थी। पिता ने बताया था कि उसे जेल में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है और उसे 15 जनवरी को मुलाकात पर बुलाया था। अजय के अनुसार उसकी मां और वह खुद अनपढ़ हैं। उसके पिता भी अनपढ़ थे, लेकिन हिंदी में थोड़ा-बहुत लिख पढ़ लेते थे। हालांकि जेल रिकार्ड में कैदी को अनपढ़ बताया गया है। करीब तीन घंटे बाद शव परिवार को शव सुपुर्द कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

ये उठ रहे सवाल
अब न्यायिक अधिकारी एवं खुद जेल प्रशासन के लिए भी यह जांच का विषय रहेगा कि कैदी की बाजू पर लिखे शब्द मौत के बाद लिखे गए या फिर पहले लिखे गए ? सिक्योरिटी सेल में बंद विजय उर्फ पप्पू के साथ कौन-कौन थे? बताया जा रहा है कि एक बंदी था जिस पर 21 दिसंबर को जेल एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ था। उससे मोबाइल बरामद हुआ था और आरोप है कि वह दूसरों को भी मोबाइल उपलब्ध कराता था। इसके अलावा 3-4 हार्डकोर क्रिमिनल थे। पोस्टमार्टम में यह भी देखने वाला रहेगा कि बंदी की मौत का समय क्या था और लिखावट किस समय की है। बंदी ने फंदा लगाया या फिर मारकर लटकाया गया? क्योंकि परिजनों ने दो दिन पहले हुई बातचीत में बताया है कि उस पर कोई मानसिक दबाव नहीं था।
मौसा रामपाल के अनुसार
मौसा रामपाल ने बताया कि विजयपाल उर्फ पप्पू की सजा अब तक पूरी हो गई होती मगर दो साल पहले वह एक साल, दो महीने, चार दिन के लिए पैरोल से रफूचक्कर हो गया था। वह खुद उसका जमानती था। वहीं, उसे वापस जेल छोड़कर गया था, जिससे उसकी सजा बढ़ गई थी।
इस मामले में हुई थी सजा
मौसा रामपाल के अनुसार विजयपाल अपनी पत्नी और बेटे को गांव में छोड़कर वहीं की एक लड़की को अपने साथ लेकर कालका आया था। उसी महिला की हत्या में उसे उम्रकैद हुई थी। इसके अलावा जेल एक्ट में उसे दोषी माना गया था।

विजयपाल की आत्महत्या के मामले में कल हमें सूचना मिली थी। वह 302 के एक मामले में सजा काट रहा था। मजिस्ट्रेट इंक्वायरी आज की गई है। इसके आधार पर हमें जो भी रिपोर्ट मिलेगी उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-सुलतान सिंह, डीएसपी, हेडक्वार्टर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed