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Ambala News: टीसीबी से बिना सैंपल जांच सकेंगे पीलिया
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अंबाला सिटी। सिटी के नागरिक अस्पताल में जल्द ही चार टीसीबी मशीनें लगेंगी। इससे नवजातों में होने वाले पीलिया की बीमारी का पता लगाने के लिए सैंपल की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दिल की धड़कन और खून में आक्सीजन की मात्रा मशीन में दर्शाने से ही नवजात के शरीर में बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। इससे बच्चे को सैंपल लेने के दौरान जो परेशानी होती है उससे भी छुटकारा मिलेगा। मशीनें मदर्स स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एमएसएनसीयू) वार्ड में पहुंच चुकी है।
इसके लिए कर्मचारियों व चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके साथ ही वीरवार को भी ऑनलाइन यूके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें मशीन के उपयोग के बारे में अन्य जानकारियां दी जाएंगी।
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नवजातों की मौत में आएगी कमी
स्वास्थ्य अनुसंधान और विकास केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी डॉ तरुण ने बताया कि डब्ल्यू एच ओ विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से सिटी नागरिक अस्पताल में चार मशीनें पहुंचाई गई है। एक मशीन की कीमत दो लाख 50 रुपए है। इस मशीन से दिल की धड़कन और खून में आक्सीजन के स्तर का पता चलता रहता है। ये मशीनें पूरी तरह से टच स्क्रीन हैं। नवजातों की मौत में कमी लाने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से निर्देशों के बाद सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है।
सीपेप मशीनें भी लगनी शुरू
एमएसएनसीयू में प्रशिक्षण के बाद अब सीपेप मशीनें भी लगना शुरू हो गई हैं। इसके लिए बेड के साथ ही जगह बनाई जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ये मशीनें भी अस्पताल में पहुंचा दी गई हैं। इन मशीनों से जिन नवजातों को सांस लेने में परेशानी होती है उन्हें मदद मिलेगी।
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दिल की धड़कन और खून में आक्सीजन की मात्रा मशीन में दर्शाने से ही नवजात के शरीर में बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। इससे बच्चे को सैंपल लेने के दौरान जो परेशानी होती है उससे भी छुटकारा मिलेगा। मशीनें मदर्स स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एमएसएनसीयू) वार्ड में पहुंच चुकी है।
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इसके लिए कर्मचारियों व चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके साथ ही वीरवार को भी ऑनलाइन यूके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें मशीन के उपयोग के बारे में अन्य जानकारियां दी जाएंगी।
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नवजातों की मौत में आएगी कमी
स्वास्थ्य अनुसंधान और विकास केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी डॉ तरुण ने बताया कि डब्ल्यू एच ओ विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से सिटी नागरिक अस्पताल में चार मशीनें पहुंचाई गई है। एक मशीन की कीमत दो लाख 50 रुपए है। इस मशीन से दिल की धड़कन और खून में आक्सीजन के स्तर का पता चलता रहता है। ये मशीनें पूरी तरह से टच स्क्रीन हैं। नवजातों की मौत में कमी लाने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से निर्देशों के बाद सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है।
सीपेप मशीनें भी लगनी शुरू
एमएसएनसीयू में प्रशिक्षण के बाद अब सीपेप मशीनें भी लगना शुरू हो गई हैं। इसके लिए बेड के साथ ही जगह बनाई जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ये मशीनें भी अस्पताल में पहुंचा दी गई हैं। इन मशीनों से जिन नवजातों को सांस लेने में परेशानी होती है उन्हें मदद मिलेगी।