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पितृ ऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म करना जरूरी : डा. स्वामी अनुभवानंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Oct 2023 01:09 AM IST
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It is necessary to perform Shraddha to get rid of ancestral debt: Dr. Swami Anubhavananda
अंबाला सिटी। मंटेड़ीशेखां के श्रीकृष्ण वासुदेव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के चौथे दिन डॉ. अनुभवानंद गिरि महाराज ने भक्तों के अपार जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पुत्र का पुत्रत्व तभी सार्थक होता है, जब वह अपने माता-पिता की सेवा कर उनके मरणोपरांत उनकी मृत्यु तिथि में विधिवत श्राद्ध करे। दुनिया में आने वाले प्रत्येक मानव पर जन्म से ही तीन ऋण होते हैं- देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण। श्राद्ध करने से पितृ ऋण से मुक्त हो जाता है तथा उसके पूर्वज भी संतुष्ट रहते हैं। जिससे श्राद्धकर्ता का परिवार सहित कल्याण हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि जो लोग अपने पितरों का श्राद्ध श्रद्धा पूर्वक करते हैं, उनके पितृ संतुष्ट होकर उन्हें आयु, संतान, धन, स्वर्ग, राज्य, मोक्ष व अन्य सौभाग्य प्रदान करते हैं। स्वामी अनुभवानंद ने कहा कि भगवान का जन्म नहीं भगवान का अवतार होता है। श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतार लेने के तीन कारण हैं, साधु महात्माओं की रक्षा, दुष्टों का संहार और धर्म की संस्थापना। यदि भक्तों पर आपत्ति काल में संकट आए तो भगवान अवतार लेने के युगों की प्रतीक्षा नहीं करते, वे तत्काल प्रकट हो जाते हैं। कथा से पूर्व दीप प्रज्ज्वलन रजत मदान ने किया। वहीं भागवत महापुराण का पूजन मंदिर कमेटी के प्रधान इकबाल सिंह व अन्य सदस्यों ने किया। इस अवसर पर भजन सम्राट रोहित शर्मा द्वारा गाए गए भजनों, तैनू रोज बुलवांगे और लाला जन्म सुन आई यशोदा मैया दे दे बधाई, आदि ने श्रोताओं का मन मोह लिया।
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