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Ambala News: बैठक में बिना एजेंडे के पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिकारी, हंगामा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 01:43 AM IST
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Irrigation department officials arrived at the meeting without an agenda, causing commotion
अंबाला छावनी में पंजाब की तरफ से आने वाला टांगरी नदी का अधूरा तटबंध। संवाद - फोटो : samvad
बेनतीजा रही टांगरी नदी के तटबंध की बैठक, तीन गांव के जमींदारों की नहीं सुनी बात
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। टांगरी नदी पर तटबंध के निर्माण के लिए बुलाई गई बैठक बेनतीजा रही। बैठक सरसेहड़ी गांव के सूरजकुंड गुरुद्वरे के हॉल में हुई। सीएम ग्राम और पीएमओ कार्यालय में दर्ज शिकायत के बाद आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने विभाग के अधिकारियों पर उदासीनता के आरोप लगाए। उन्हाेंने कहा कि बिना एजेंडे के सिंचाई विभाग के अधिकारी बैठक में आए थे, वहीं उन्होंने स्वेच्छा से भूमि देने वाले तीन गांव के जमींदारों की बात नहीं सुनी। इस दौरान जमीन देने वाले आठ किसानों के साथ मोहिंदर सिंह व दीपक सहित शिकायतकर्ताओं की तरफ से कमल कांत, राम चंद्र सैनी, दीपक शर्मा, कुलदीप सैनी, दशरथ आदि मौजूद रहे।
जमींदारों के नहीं देखे शपथ पत्र
शिकायतकर्ता कमल कांत ने आरोप लगाए कि विभागीय अधिकारियों ने जमीन देने वाले जमींदारों के शपथ पत्र देखने की भी कोशिश नहीं की। इसलिए एक बार फिर यह बैठक औपचारिकता बनकर रह गई। अब पुन: पीएमओ कार्यालय में शिकायत भेजी जाएगी और इसमें सिंचाई विभाग के अधिकारी की ढीली कार्यशैली को भी उजागर किया जाएगा कि वो किस प्रकार बैठक में खानापूर्ति कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि विभागीय अधिकारी किसी पूर्व निर्धारित एजेंडे पर काम कर रहे हैं।बैठक की शुरुआत में ही उस समय माहौल गरमा गया, जब अधिकारियों ने पुरानी सूची के आधार पर जमीन न देने वालों के नाम पढ़ने शुरू किए। मौजूद किसानों ने स्पष्ट किया कि वे जमीन देने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने न्यूनतम मुआवजा दर पूछी, तो अधिकारियों ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
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वीडियो रिकॉर्डिंग रोकने पर भड़के लोग
बैठक के दौरान जब स्थानीय लोगों ने पारदर्शिता के लिए कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की तो अधिकारियों ने उसे बार-बार रुकवा दिया। इससे ग्रामीणों का शक गहरा गया। किसानों ने कहा कि तीन साल से बाढ़ की मार झेलने के बावजूद एक मीटर जमीन भी अधिग्रहित नहीं हो पाई है, जो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान है। बाढ़ पीड़ितों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
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बैठक में सभी की बात सुनी गई थी। विभाग एजेंडा लेकर ही बैठक में गया था। किसान तटबंध के लिए जमीन देने को तैयार नहीं हैं, इसलिए बैठक बेनतीजा रही। अब जो भी आगामी निर्देश मिलेंगे, उसके तहत कार्यवाही की जाएगी।
- कृष्ण कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, अंबाला

अंबाला छावनी में पंजाब की तरफ से आने वाला टांगरी नदी का अधूरा तटबंध। संवाद

अंबाला छावनी में पंजाब की तरफ से आने वाला टांगरी नदी का अधूरा तटबंध। संवाद- फोटो : samvad

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