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Ambala News: संस्थाओं को नए एक्ट में री-रजिस्ट्रेशन का मौका, खोला पोर्टल
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अंबाला। सोसायटी एंड रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत सामाजिक, शैक्षणिक और अन्य प्रकार की संस्थाओं को एक बार फिर से सरकार ने दोबारा से नए एक्ट में पंजीकरण का मौका दिया है।
अब जो संस्थाएं पुराने एक्ट में पंजीकृत हैं उन्हें हरियाणा पंजीकरण और सोसायटी विनियमन अधिनियम, 2012 (एचआरआरएस एक्ट) के सेक्शन 9 की उप धारा चार के तहत पंजीकरण करना होगा। पहले वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक इस एक्ट में रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल को खाेला था। मगर कई संस्थाओं ने नए एक्ट में दोबारा से पंजीकरण ही नहीं कराया। इसके बाद पोर्ट को बंद कर दिया गया। ऐसे में अब दोबारा से संस्थाओं को दोबारा पंजीकरण कराने का मौका दिया गया है।
गौरतलब है कि अंबाला में करीब 3900 संस्थाएं सोसाइटी एवं रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत हैं। इसमें से करीब 2800 संस्थाओं ने अभी तक नए एक्ट में दोबारा पंजीकरण नहीं कराया है।
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रजिस्ट्रेशन की यह होगी प्रक्रिया
संस्थाओं के पदाधिकारियों को विभाग की बेवसाइट पर जाकर दोबारा से पंजीकरण के लिए विकल्पों का चयन करना होगा। इसके साथ ही इसमें 2700 रुपये की फीस भी जमा करानी होगी। एक बार संस्था पंजीकृत हुई तो वह अपने सामाजिक कार्यों को अच्छे से बिना किसी विवाद के संचालित कर सकेंगे।
सरकारी संस्थाएं भी पीछे
खास बात है कि वर्ष 2012 में से लेकर 2018 तक बीच-बीच में कई बार पोर्टल खुला तो कई बार बंद भी हुआ। हैरानी की बात यह है कि कुछ संस्थाएं नए अधिनियम में पंजीकरण ही नहीं कराना चाहती हैं। इसमें प्राइवेट ही नहीं बल्कि सरकारी क्षेत्र की संस्थाएं भी शामिल हैं। इस एक्ट के दायरे में आने से संस्थाओं को नए नियमों का पालन करना होगा।
यह होगा लाभ
जन प्रतिनिधियों से जो विभिन्न सामाजिक सेवाओं के लिए अनुदान मिलता है उसे मिलने में आसानी होगी। इसके साथ ही पारदर्शिता भी होगी। वहीं संस्थाओं के भीतर पंजीकरण व सदस्यों को लेकर विवाद भी काफी हद तक कम हो सकेंगे। देखने में आया है कि पुराने एक्ट में पंजीकृत कई संस्थाओं का रिकॉर्ड अब जांच कराने पर भी मेल नहीं खाता है। यह सभी विसंगतियां दूर हो सकेंगी।
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अब जो संस्थाएं पुराने एक्ट में पंजीकृत हैं उन्हें हरियाणा पंजीकरण और सोसायटी विनियमन अधिनियम, 2012 (एचआरआरएस एक्ट) के सेक्शन 9 की उप धारा चार के तहत पंजीकरण करना होगा। पहले वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक इस एक्ट में रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल को खाेला था। मगर कई संस्थाओं ने नए एक्ट में दोबारा से पंजीकरण ही नहीं कराया। इसके बाद पोर्ट को बंद कर दिया गया। ऐसे में अब दोबारा से संस्थाओं को दोबारा पंजीकरण कराने का मौका दिया गया है।
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गौरतलब है कि अंबाला में करीब 3900 संस्थाएं सोसाइटी एवं रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत हैं। इसमें से करीब 2800 संस्थाओं ने अभी तक नए एक्ट में दोबारा पंजीकरण नहीं कराया है।
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रजिस्ट्रेशन की यह होगी प्रक्रिया
संस्थाओं के पदाधिकारियों को विभाग की बेवसाइट पर जाकर दोबारा से पंजीकरण के लिए विकल्पों का चयन करना होगा। इसके साथ ही इसमें 2700 रुपये की फीस भी जमा करानी होगी। एक बार संस्था पंजीकृत हुई तो वह अपने सामाजिक कार्यों को अच्छे से बिना किसी विवाद के संचालित कर सकेंगे।
सरकारी संस्थाएं भी पीछे
खास बात है कि वर्ष 2012 में से लेकर 2018 तक बीच-बीच में कई बार पोर्टल खुला तो कई बार बंद भी हुआ। हैरानी की बात यह है कि कुछ संस्थाएं नए अधिनियम में पंजीकरण ही नहीं कराना चाहती हैं। इसमें प्राइवेट ही नहीं बल्कि सरकारी क्षेत्र की संस्थाएं भी शामिल हैं। इस एक्ट के दायरे में आने से संस्थाओं को नए नियमों का पालन करना होगा।
यह होगा लाभ
जन प्रतिनिधियों से जो विभिन्न सामाजिक सेवाओं के लिए अनुदान मिलता है उसे मिलने में आसानी होगी। इसके साथ ही पारदर्शिता भी होगी। वहीं संस्थाओं के भीतर पंजीकरण व सदस्यों को लेकर विवाद भी काफी हद तक कम हो सकेंगे। देखने में आया है कि पुराने एक्ट में पंजीकृत कई संस्थाओं का रिकॉर्ड अब जांच कराने पर भी मेल नहीं खाता है। यह सभी विसंगतियां दूर हो सकेंगी।