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Ambala News: पीसीबी की नीति के खिलाफ उद्योग संचालकों ने खोला मोर्चा

Sun, 05 Jul 2026 03:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Sun, 05 Jul 2026 03:28 AM IST
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Industry operators have launched a campaign against the PCB's policy.
अंबाला कैट ​स्थित इंड​स्टि्रयल एरिया। संवाद
वैभव शर्मा
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अंबाला। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एचसीसीआई) ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की पर्यावरण मुआवजा नीति को अतार्किक बताया है। उद्योग संचालकों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एचसीसीआई ने चेतावनी दी है कि अगर इस नीति में तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो हरियाणा के उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। एचसीसीआई के अंबाला चैप्टर के चेयरमैन डॉ. अशावंत गुप्ता ने इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन विनय प्रताप सिंह से नीति में तुरंत संशोधन करने की मांग की है। चैंबर ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और 4 अगस्त 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है।
चैंबर के मुताबिक, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी बनाम लोधी प्रॉपर्टी कंपनी लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि राज्य प्रदूषण बोर्ड हर छोटे-मोटे उल्लंघन या तकनीकी चूक पर पर्यावरण मुआवजा नहीं थोप सकता। जुर्माना केवल तभी लगाया जाना चाहिए जब वास्तव में पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचा हो।
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प्रक्रियात्मक चूक को प्रदूषण मानना गलत
डॉ. अशावंत गुप्ता और सचिव आलोक सूद ने कहा कि बोर्ड ने 22 दिसंबर 2021 को अपनी नीति लागू की थी। इसमें सभी उद्योगाें के लिए बोर्ड से सीईटी (स्थापना की सहमति) और सीटीओ (संचालन की सहमति) लेना अनिवार्य शर्त कर दिया था। ऐसा न करने पर एक निश्चित फार्मूला के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति देनी होगी। इसका भुगतान समय से लगाया जाएगा। इस शर्त के लागू होने के अब छह साल बाद उद्योगों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बहुत से उद्योगों के पास यह सहमति है ही नहीं।
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आकार के हिसाब से लगाई जाए एकमुश्त पेनाल्टी
उद्योग संचालकों ने मांग की है कि पर्यावरण मुआवजे के बजाय प्रक्रियात्मक चूक करने वाले उद्योगों पर उनके आकार के हिसाब से एकमुश्त जुर्माना लगाया जाए। चैंबर ने प्रस्ताव दिया है कि पहले वर्ष की सीटीई या सीटीओ फीस पर अतिरिक्त शुल्क लेकर मामले का निपटारा किया जाए, न कि प्रतिदिन के हिसाब से लाखों का जुर्माना वसूला जाए। चैंबर ने सरकार और बोर्ड से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की भावना का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द न्यायसंगत नीति बनाने की गुहार लगाई है।

5000 रुपये रोजाना के जुर्माने से नुकसान

चैंबर के पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष एसके वाधवान, रविंद्र धवन और कोषाध्यक्ष कमलजीत जैन का कहना है कि बिना किसी प्रदूषण के भी उद्योगों पर न्यूनतम 5000 रुपये प्रतिदिन का भारी-भरकम जुर्माना थोपा जा रहा है। यह प्रावधान एनजीटी के आदेशों में भी नहीं है और न ही किसी पड़ोसी राज्य में ऐसा नियम है। इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने वाले, रोजगार देने वाले और भारी जीएसटी देने वाले उद्योग तबाह हो रहे हैं।
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