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फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मिलेगी प्रोत्साहन राशि : गुप्ता
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अंबाला सिटी। हरियाणा सरकार की ओर से हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना के तहत फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन दिया जाएगा। योजना का लाभ पाने के लिए इच्छुक किसान 30 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से रोकना और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इससे न केवल पर्यावरण को सुरक्षित किया जाएगा, बल्कि किसानों को फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से पराली के जलने से होने वाले वायु प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन के लिए किसान को मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसान को विभागीय पोर्टल एग्री हरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन पर तीस नवंबर तक आवेदन करना होगा। ग्राम स्तरीय कमेटी वीएलसी से सत्यापन होने के बाद पात्र किसानों को प्रोत्साहन राशि का लाभ दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि किसान धान की कटाई के बाद अपने खेतों में आग न लगाएं, बल्कि उसका समुचित प्रबंधन करें। आग लगाने से वायु प्रदूषण होता है और मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। किसान अवशेष को मशीनों की सहायता से मिट्टी में मिलाएं।
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उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से रोकना और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इससे न केवल पर्यावरण को सुरक्षित किया जाएगा, बल्कि किसानों को फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से पराली के जलने से होने वाले वायु प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने बताया कि हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन के लिए किसान को मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसान को विभागीय पोर्टल एग्री हरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन पर तीस नवंबर तक आवेदन करना होगा। ग्राम स्तरीय कमेटी वीएलसी से सत्यापन होने के बाद पात्र किसानों को प्रोत्साहन राशि का लाभ दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि किसान धान की कटाई के बाद अपने खेतों में आग न लगाएं, बल्कि उसका समुचित प्रबंधन करें। आग लगाने से वायु प्रदूषण होता है और मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। किसान अवशेष को मशीनों की सहायता से मिट्टी में मिलाएं।