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Ambala News: 54 साल पुराने नगर परिषद में दो बार भाजपा तो तीन बार कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रहे अध्यक्ष
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हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। नगर परिषद अंबाला सदर का इतिहास लगभग 54 साल पुराना है। वर्ष 1970 में अंबाला को अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया गया था। इस समिति के पहले सचिव केएल सेठी रहे। इसके बाद 1987 में अंबाला सदर नगर परिषद का गठन हुआ। इसके पहले चुनाव में दो बार अध्यक्ष बदले गए।
पांच साल के कार्यकाल के दौरान पहले नंबर पर सतीश मित्तल और दूसरे नंबर पर शिवनंदन धीर रहे। दोनों का कार्यकाल लगभग ढाई-ढाई साल तक रहा। दूसरे चुनाव 1991 में हुए और दर्शन बुद्धिराजा इसके अध्यक्ष रहे। 1995 में तीसरा चुनाव हुआ और सुदर्शन दुआ इसकी अध्यक्ष बनीं।
चौथा चुनाव वर्ष 2000 में हुआ और पंडित शंकर दास इसके अध्यक्ष रहे। पांचवां चुनाव 2005 में हुआ और 2010 तक इसकी अध्यक्ष नीलम शर्मा रहीं।
वर्ष 2010 में नप को भंग कर दिया गया और वर्ष 2013 में इसे नगर निगम बना दिया गया। इसके पहले चेयरमैन कांग्रेस पार्टी समर्थित उम्मीदवार रमेश मल रहे। सरकार ने वर्ष 2019 में निगम को अलग करके अंबाला सदर नगर परिषद का गठन कर दिया। लेकिन छह साल तक नप के चुनाव नहीं हो पाए।
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राजनीतिक समीकरण
नगर परिषद के पिछले पांच चुनावों में दो बार बीजेपी और तीन बार कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अध्यक्ष पद पर काबिज रहे थे। लेकिन इस बार भाजपा को आजाद प्रत्याशी चित्रा सरवारा समर्थित प्रत्याशी चुनौती दे रहे हैं। वहीं पहले भाजपा की टक्कर कांग्रेस से होती थी, मगर इस बार कांग्रेस ने मैदान ही छोड़ दिया। कांग्रेस ने इस बार अपना कोई भी उम्मीदवार न तो अध्यक्ष पद के लिए और न ही पार्षद के लिए खड़ा किया है।
विकास रहेगा मुद्दा
वर्ष 2019 में नगर परिषद का गठन तो हो गया था लेकिन जनप्रतिनिधि न होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उनके जरूरी काम नहीं हो रहे थे और न ही वार्ड स्तर पर मूलभूत सुविधाएं मिल पा रहीं थी। इसमें टूटी सड़कें, नालियां और गंदगी की समस्या प्रमुख हैं।
32 वार्ड
नगर परिषद सदर अंबाला के अधीन 32 वार्ड हैं। इन वार्डाें में एक लाख 77 हजार 590 मतदाता हैं। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 91 हजार 969 और महिला मतदाताओं की संख्या 85 हजार 613 हैं। जबकि अन्य 8 मतदाता भी सूची में शामिल हैं।
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अंबाला। नगर परिषद अंबाला सदर का इतिहास लगभग 54 साल पुराना है। वर्ष 1970 में अंबाला को अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया गया था। इस समिति के पहले सचिव केएल सेठी रहे। इसके बाद 1987 में अंबाला सदर नगर परिषद का गठन हुआ। इसके पहले चुनाव में दो बार अध्यक्ष बदले गए।
पांच साल के कार्यकाल के दौरान पहले नंबर पर सतीश मित्तल और दूसरे नंबर पर शिवनंदन धीर रहे। दोनों का कार्यकाल लगभग ढाई-ढाई साल तक रहा। दूसरे चुनाव 1991 में हुए और दर्शन बुद्धिराजा इसके अध्यक्ष रहे। 1995 में तीसरा चुनाव हुआ और सुदर्शन दुआ इसकी अध्यक्ष बनीं।
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चौथा चुनाव वर्ष 2000 में हुआ और पंडित शंकर दास इसके अध्यक्ष रहे। पांचवां चुनाव 2005 में हुआ और 2010 तक इसकी अध्यक्ष नीलम शर्मा रहीं।
वर्ष 2010 में नप को भंग कर दिया गया और वर्ष 2013 में इसे नगर निगम बना दिया गया। इसके पहले चेयरमैन कांग्रेस पार्टी समर्थित उम्मीदवार रमेश मल रहे। सरकार ने वर्ष 2019 में निगम को अलग करके अंबाला सदर नगर परिषद का गठन कर दिया। लेकिन छह साल तक नप के चुनाव नहीं हो पाए।
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राजनीतिक समीकरण
नगर परिषद के पिछले पांच चुनावों में दो बार बीजेपी और तीन बार कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अध्यक्ष पद पर काबिज रहे थे। लेकिन इस बार भाजपा को आजाद प्रत्याशी चित्रा सरवारा समर्थित प्रत्याशी चुनौती दे रहे हैं। वहीं पहले भाजपा की टक्कर कांग्रेस से होती थी, मगर इस बार कांग्रेस ने मैदान ही छोड़ दिया। कांग्रेस ने इस बार अपना कोई भी उम्मीदवार न तो अध्यक्ष पद के लिए और न ही पार्षद के लिए खड़ा किया है।
विकास रहेगा मुद्दा
वर्ष 2019 में नगर परिषद का गठन तो हो गया था लेकिन जनप्रतिनिधि न होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उनके जरूरी काम नहीं हो रहे थे और न ही वार्ड स्तर पर मूलभूत सुविधाएं मिल पा रहीं थी। इसमें टूटी सड़कें, नालियां और गंदगी की समस्या प्रमुख हैं।
32 वार्ड
नगर परिषद सदर अंबाला के अधीन 32 वार्ड हैं। इन वार्डाें में एक लाख 77 हजार 590 मतदाता हैं। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 91 हजार 969 और महिला मतदाताओं की संख्या 85 हजार 613 हैं। जबकि अन्य 8 मतदाता भी सूची में शामिल हैं।