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खुद उपचार को तरस रहा चिकित्सालय का भवन
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मुलाना। लंपी वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच गांव धीन का पशु चिकित्सालय का भवन खुद उपचार को तरस रहा है। गांव धीन स्थित करीब 50 साल पुराने चिकित्सालय का भवन जर्जर हो चुका है। भवन की छत से प्लास्टर उखड़ कर गिरने लगा हैै। इस कारण स्टाफ या वहां आए पशुपालक इसकी चपेट में आकर घायल हो सकते हैं। यहां कार्यरत चिकित्सक व अन्य कर्मी भय के साये में काम करने को मजबूर हैं। उन्हें कार्य करते समय छत गिरने का भय सता रहा है।
हालात इतने बदतर हैं कि यहां की चहारदीवारी गिर चुकी है। धीन पशु चिकित्सालय के अंतर्गत अलीपुर, मनका, डुलियानी व साहलेपुर सहित कुल 14 गांव आते हैं। इनमें से डुलियानी व मनका गांव में स्थित पशु औषधालय के भवनों का नवनिर्माण हो गया है। धीन गांव स्थित पशु चिकित्सालय अभी भी सरकार व विभाग की तरफ टकटकी लगाए बैठा हुआ है। पशुपालक पशुओं का इलाज कराने यहीं आते हैं। उन्हें हर समय हादसे का डर बना रहता है। पशु चिकित्सालय परिसर में बरसात के दिनों में पानी जता हो जाता है। इस कारण पशुपालकों को समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यहां पशुओं का इलाज व्यवस्थित रूप से कैसे हो सकता है। पशुपालक कृष्ण कुमार, कली राम व अन्य ने विभाग से मांग की है कि पशु चिकित्सालय का निर्माण जल्दी करवाया जाए।
चिकित्सक और अन्य स्टाफ एडिशनल
पशु चिकित्सालय में एक वेटरनरी सर्जन, एक वीएलडीए, एक एनीमल अटेंडेंट व एक चतुर्थ श्रेणी स्टाफ कार्यरत है। इनमें से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के अलावा सभी पदों पर एडिशनल स्टाफ हैं।
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चिकित्सक, स्टाफ की कमी और भवन के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। जल्दी ही चिकित्सकों की कमी पूरी हो जाएगी व भवन का निर्माण कराया जाएगा। पशुपालकों के लिए एडिशनल चिकित्सक व अन्य स्टाफ गांव धीन में उपलब्ध है, ताकि पशुपालकों को कोई परेशानी न हो।
-डॉ. रामपाल, एसडीओ पशुपालन विभाग, बराड़ा।
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हालात इतने बदतर हैं कि यहां की चहारदीवारी गिर चुकी है। धीन पशु चिकित्सालय के अंतर्गत अलीपुर, मनका, डुलियानी व साहलेपुर सहित कुल 14 गांव आते हैं। इनमें से डुलियानी व मनका गांव में स्थित पशु औषधालय के भवनों का नवनिर्माण हो गया है। धीन गांव स्थित पशु चिकित्सालय अभी भी सरकार व विभाग की तरफ टकटकी लगाए बैठा हुआ है। पशुपालक पशुओं का इलाज कराने यहीं आते हैं। उन्हें हर समय हादसे का डर बना रहता है। पशु चिकित्सालय परिसर में बरसात के दिनों में पानी जता हो जाता है। इस कारण पशुपालकों को समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यहां पशुओं का इलाज व्यवस्थित रूप से कैसे हो सकता है। पशुपालक कृष्ण कुमार, कली राम व अन्य ने विभाग से मांग की है कि पशु चिकित्सालय का निर्माण जल्दी करवाया जाए।
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चिकित्सक और अन्य स्टाफ एडिशनल
पशु चिकित्सालय में एक वेटरनरी सर्जन, एक वीएलडीए, एक एनीमल अटेंडेंट व एक चतुर्थ श्रेणी स्टाफ कार्यरत है। इनमें से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के अलावा सभी पदों पर एडिशनल स्टाफ हैं।
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चिकित्सक, स्टाफ की कमी और भवन के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। जल्दी ही चिकित्सकों की कमी पूरी हो जाएगी व भवन का निर्माण कराया जाएगा। पशुपालकों के लिए एडिशनल चिकित्सक व अन्य स्टाफ गांव धीन में उपलब्ध है, ताकि पशुपालकों को कोई परेशानी न हो।
-डॉ. रामपाल, एसडीओ पशुपालन विभाग, बराड़ा।