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Ambala News: बहू और मां के सहारे घर, पति संग मोर्चे पर बुजुर्ग महिलाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Feb 2024 01:53 AM IST
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Home with the support of daughter-in-law and mother, elderly women on the front lines with husbands
हरिंदर पाल सिंह
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अंबाला सिटी। बहू और मां के सहारे घर छोड़कर किसान आंदोलन के मोर्चे पर डटी हैं। अब तो जीत का सेहरा बंधाकर लौटने का ही संकल्प है। झूठे आश्वासन के सहारे पहले दिल्ली छोड़ दिया, अब गलती नहीं करेंगीं।
अगर सरकार की मंशा ठीक होती तो अब तक यह मसला हल हो चुका होता, लेकिन सरकार नहीं चाहती कि एमएसपी से जुड़े मामले का समाधान हो और इस आंदोलन में लोगों को जान गंवानी पड़े। यह कहना है किसान आंदोलन के दौरान बुजुर्ग महिलाओं का। उन्होंने बताया कि वे अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, बठिंडा, जालंधर और पटियाला से शंभू बॉर्डर पर पतियों और परिजनों संग डटी हैं।
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इस दौरान कुछ महिलाएं किसानों के लिए लंगर तैयार कर रही हैं तो कुछ चाय वितरण सहित रक्तदान शिविर और दवाओं का वितरण भी कर रही हैं। कुछ ऐसी भी महिलाएं किसान आंदोलन में पहुंच रही हैं जो इसके स्वरूप को देखना चाहती हैं, जिससे कि आने वाली पीढ़ी को यह शिक्षा दी जा सके कि अपने हक को पाने के लिए किस प्रकार किसान भाइयों ने योगदान दिया और इसके लिए उन्हें क्या-क्या गंवाना पड़ा।
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फोटो-35
पहले दिल्ली में डटे रहे और अब शंभू बॉर्डर पर। हिम्मत नहीं हारी। पति भी साथ दे रहे हैं। पीछे घर पर बच्चों की देखभाल बुजुर्ग मां कर रही है। उनसे रोज सुबह-शाम बात हो रही है। ये तो छोटी-मोटी घटनाएं हैं, इससे घबराने वाले नहीं हैं।
निर्मल कौर, बिशनगढ़ गांव, पटियाला।
फोटो-36
रोजाना किसान आंदोलन के बारे में सुन रही थी। इसलिए वीरवार को पति के साथ बाइक पर पटियाला से शंभू आई। यहां के हालात देखकर ऐसा लगा मानो दो देशों का बॉर्डर हो। लेकिन इस बात की खुशी है कि किसान भाई अपने हक को पाने के लिए जोश व उत्साह से डटे हुए हैं।


आयुषी, पटियाला।

फोटो-37
शंभू बॉर्डर पर ऐसे हालात देखने को मिल रहे हैं। इसे हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बॉर्डर बना दिया गया है जबकि हरियाणा और पंजाब दोनों आपस में भाई हैं। इन्हें कोई जुदा नहीं कर सकता। उनका सहयोग मिलते ही आंदोलन का रंग बदलने लगा है।
कश्मीर कौर, अमृतसर।
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