फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Hindi Hain Hum: Amar ujala Hindi Hai Hum campaign, Educationist Said, Hindi Must be World Language

#हिंदीहैंहमः राजभाषा को पहले राष्ट्रभाषा और फिर विश्वभाषा बनाने का मिलकर करना होगा प्रयास

Tue, 25 Aug 2020 03:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला, अंबाला
अमर उजाला, अंबाला Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 25 Aug 2020 03:01 PM IST
विज्ञापन
Hindi Hain Hum: Amar ujala Hindi Hai Hum campaign, Educationist Said, Hindi Must be World Language
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
राजभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अभी सभी को और अधिक प्रयास करने के जरूरत है। इसके लिए बच्चे से लेकर बड़े तक सभी को इसके लिए प्रयास करना होगा। जिससे एक दिन हिंदी को पहले राष्ट्र भाषा और फिर विश्व भाषा का दर्जा दिया सके। हिंदी के जानकारों का मानना है कि हिंदी को विश्व पटल पर पहुंचाने के लिए स्कूल से लेकर कॉलेज तक प्रतियोगिताएं करवानी होगी। जिससे बच्चों की हिंदी में रूचि बढ़े और वह अपने जीवन में हिंदी को स्थान दें।
विज्ञापन


देश की एकता, अखंडता, सद्भावना को बनाये रखने का, भाषा, बोली, संस्कृति, संस्कार, आचार-विचार को बनाये और बचाये रखने का साथ ही विश्व में अपनी पहचान और साख कायम रखने का यदि कोई माध्यम है, तो वह केवल और केवल हिंदी है। मात्र इसलिए नहीं कि यह सबसे अधिक बोली जाती है, बल्कि इसलिए भी कि पूरे देश की आत्मा इसी में बसी है। संस्कृत से निकली यह भाषा आम और विशेष सभी जन द्वारा बोली और पढ़ी जाने वाली भाषा है। इसका अपना एक समृद्ध साहित्य है। हमें इसे सहज, सरल और सरस भाव से अपनाते हुए इसे उत्तरोत्तर और समृद्ध करने में अपना योगदान देना चाहिए।
विज्ञापन

- पंकज शर्मा

किसी भी राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोए रखने के लिए एक राष्ट्रीय भाषा का होना अत्यंत आवश्यक है। हर राष्ट्र का ये सर्वोच्च प्रयास रहता है कि उसकी राष्ट्र भाषा का अस्तित्व कभी भी खतरे में ना पड़े। भारत देश के अधिकतर क्षेत्रों में प्रचलन के बावजूद भी हिंदी भाषा को अभी तक राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं मिल पाया है। हालांकि, हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में अपनाया गया है परंतु यह एक विडंबना है कि अधिकतर राजकीय व शासकीय कार्यों में अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व है। सामान्यत बोलचाल में भी हम लोग अंग्रेजी भाषा के शब्दों का प्रयोग करके गर्व महसूस करते है। हम सभी को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में हिंदी भाषा का प्रयोग करना चाहिए और हिंदी के उत्थान के लिए सतत प्रयास करने चाहिए। सरकार के द्वारा नई शिक्षा नीति में हिंदी को एक अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया जाना चाहिए ।
विज्ञापन
विज्ञापन

- कुणाल शर्मा

विश्व में प्राचीनतम कहलाने वाली भाषा संस्कृत जिसकी जननी है उस भाषा के गौरवमयी होने मे किंचित मात्र भी अतिशयोक्ति नहीं है। अनेक बोलियों से सुसज्जित यह भाषा इतनी समृद्ध व वैज्ञानिक है, जिसमें अन्य भाषाओं को आत्मसात करने की क्षमता है। अपनी सरलता और सहजता के कारण आसानी से सीख ली जाती है, सूक्ष्म से सूक्ष्म भाव भी आसानी से बताए और समझाए जा सकते हैं इसलिए मुझे अपनी राज भाषा हिंदी पर अभिमान है।
- नीरजा जयसवाल

हिंदी का इतिहास लगभग हजार साल का है। हिंदी के पास संस्कृत की शक्ति है जिससे हर विषय के शब्द बनाए जा सकते हैं। यह संसार की सर्वश्रेष्ठ, वैज्ञानिक लिपि देवनागरी में लिखी जाती है। सुनिश्चित और स्पष्ट व्याकरण है। जो लिखा जाता है वही पढ़ा जाता है और जो बोला जाता है वही लिखा जाता है। कमी हिंदी भाषा में नहीं स्वयं को हिंदीभाषी कहने में है। कमी हमारे अंदर अपनी भाषा पर विश्वास की है। हम शब्द बोलने से पहले ही संशय में पड़ जाते हैं कि सामने वाला समझ पाएगा या नहीं। मन में गलत फहमी गहरे तक पैठ कर गयी है। जरूरत है तो बस अपनी भाषा पर गर्व करने की और इसे अपनाने की। अब से हिंदी बोलने, पढ़ने, लिखने का संकल्प लें और अभिमान से कहें- हिंदी हैं हम।
- मनीषा भसीन नारायण

हिन्दी, संस्कृत भाषा से निकली एक ऐसी भाषा है जो सदियों पहले अस्तित्व में आई, हिंदी भाषा ऋषि मुनियों से लेकर आमजन और देश विदेशियों तक बोली और पढ़ी जाने वाली एक मात्र भाषा है। संस्कृत के या अन्य भाषाओं के बड़े-बड़े ग्रंथ आमजन और देश विदेश तक पहुंचाने के लिए हिंदी भाषा का ही प्रयोग किया जाता है। अब तो हिंदी भाषा की जड़ें और भी मजबूत करने का समय आ गया है और ऐसा हो भी रहा है। करीब-करीब सभी कार्यालयों में हिंदी में ही सारे कार्य संपन्न हो रहे हैं। सभी पाठशालाओं में हिंदी जरूरी मानी जाने लगी है।
- सवीना वर्मा सवी

डिजिटल क्रांति में देवनागरी लिपि का लहू लगातार बह रहा है। वह मारी जा रही है हर दिन, हर पल, हर क्षण। गुम हो चुके हैं इसके बहुत से शब्द और अब अक्षर-अक्षर। गहरे व्याकरण की धनी मेरी भाषा हिंदी, मेरी भाषा संस्कृत अब आंग्ल भाषा के अक्षरों में पिरोई जा रही है। चलो एक अभियान चलाएं हिंदी को देवनागरी में ही अपनाएं। संख्या में हम पूरी दुनिया से आगे हैं। चलो अपनी भाषा को विश्व भाषा बनाएं। हिंदी की बिंदी को माथे पर लगाकर गुलामी के भावों को मन से भगा कर एक नया अभियान चलाते हैं अपने हस्ताक्षर हिंदी में सजाते हैं।
- गौरी वंदना
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed