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Ambala News: कब्जाधारकों पर कार्रवाई में देरी से असंतुष्ट हाईकोर्ट
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अंबाला। सदर क्षेत्र में 6469 कब्जाधारियों की ओर से सरकारी जमीन पर किए गए कब्जे को हाईकोर्ट ने गंभीरता से संज्ञान लिया है और सुनवाई के दौरान संपदा अधिकारी की ओर से की गई कार्रवाई पर असंतोष जाहिर किया है। इस मामले में अब राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव और शहरी निकाय विभाग हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से या व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले की सुनवाई अब 11 दिसंबर को होगी। हालांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान संपदा अधिकारी की तरफ से प्रस्तुत हुए वकील ने 20 अक्तूबर को हलफनामे के माध्यम से मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट भी न्यायालय में दाखिल की। जिसे अब रिकॉर्ड में लिया गया है। वकील ने सूचित किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी है। वहीं राज्य के वकील ने तर्क दिया कि वो मामले में नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया में हैं। यह मामला वर्ष 1999 से संबंधित है और इस मामले की अभी सुनवाई चल रही है। जबकि प्रतिवादी के वकील ने तर्क दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई काफी धीमी चल रही है, इसलिए मामला बार-बार स्थगित हो रहा है। 17 नवंबर 2023 तक इस मामले की पांच बार सुनवाई हो चुकी है और अब भी लगभग एक वर्ष की अवधि बीत चुकी है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकार इस मामले पर गंभीर नहीं है।
यह है मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार की ओर से अंबाला छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटाकर हरियाणा सरकार व नगर परिषद अंबाला सदर को भूमि स्थानांतरित की गई थी। इस भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट व लीज ग्रांट पर दी गई थी। समय बीतने के साथ-काफी संख्या में लोगों ने खाली पड़ी भूमि पर भवन बना कर स्थायी कब्जा कर लिया। संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी के कार्यालय से पता चला है कि उपरोक्त सरकारी भूमि से संबंधित एक केस सीडब्लयपूी नंबर 7771 वर्ष 1999 पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन था। इसमें 19 जनवरी 2024 को न्यायालय द्वारा उपरोक्त 1066 एकड़ भूमि का सर्वे करने व अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने बारे आदेश जारी किए गए थे। इस संबंध में संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी, उपमंडल अधिकारी (ना.) के कार्यालय द्वारा प्राइवेट कंपनी से सर्वे करवाया गया।
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6469 कब्जाधारी
ओल्ड ग्रांट पर दी गई भूमि के 48.19 एकड़ पर 5094 लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। इसी प्रकार लीज पर दी गई भूमि के साथ खाली पड़ी 1.30 एकड़ पर 102 लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर लगभग 29.45 एकड़ खाली सरकारी भूमि पर 1194 लोगों ने कब्जा किया हुआ है। जबकि वर्ष 2003 में नियमित की गई 13 कॉलोनियां में खाली पडी 7.18 एकड़ भूमि पर 124 लोगो का कब्जा है। इसमें वह भूमि भी शामिल है जो सरकार की ओर से गैर कृषि कार्यों के लिए 97.41 एकड़ भूमि लीज पर दी गई थी, इसमें से 72.76 एकड़ भूमि व 224 प्रोपर्टी की लीज समाप्त हो चुकी है और 130.21 एकड़ भूमि जोकि 45 लोगों को कृषि कार्य के लिए लीज पर दी गई थी, उसकी लीज भी काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है।
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चार प्रकार के दिए जा रहे नोटिस
सदर क्षेत्र में अनधिकृत रुप से सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ नोटिस देने की कार्रवाई आरंभ हो चुकी है और कब्जाधारियों को 15 दिन का समय अतिक्रमण हटाने का दिया गया है। संपदा अधिकारी द्वारा 6469 लोगों को नोटिस दिए जाने हैं। इसमें ओल्ड ग्रांट भूमि, लीज की भूमि, लीज खत्म और सरकार भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग शामिल हैं।
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इस मामले की सुनवाई अब 11 दिसंबर को होगी। हालांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान संपदा अधिकारी की तरफ से प्रस्तुत हुए वकील ने 20 अक्तूबर को हलफनामे के माध्यम से मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट भी न्यायालय में दाखिल की। जिसे अब रिकॉर्ड में लिया गया है। वकील ने सूचित किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी है। वहीं राज्य के वकील ने तर्क दिया कि वो मामले में नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया में हैं। यह मामला वर्ष 1999 से संबंधित है और इस मामले की अभी सुनवाई चल रही है। जबकि प्रतिवादी के वकील ने तर्क दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई काफी धीमी चल रही है, इसलिए मामला बार-बार स्थगित हो रहा है। 17 नवंबर 2023 तक इस मामले की पांच बार सुनवाई हो चुकी है और अब भी लगभग एक वर्ष की अवधि बीत चुकी है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकार इस मामले पर गंभीर नहीं है।
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यह है मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार की ओर से अंबाला छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटाकर हरियाणा सरकार व नगर परिषद अंबाला सदर को भूमि स्थानांतरित की गई थी। इस भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट व लीज ग्रांट पर दी गई थी। समय बीतने के साथ-काफी संख्या में लोगों ने खाली पड़ी भूमि पर भवन बना कर स्थायी कब्जा कर लिया। संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी के कार्यालय से पता चला है कि उपरोक्त सरकारी भूमि से संबंधित एक केस सीडब्लयपूी नंबर 7771 वर्ष 1999 पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन था। इसमें 19 जनवरी 2024 को न्यायालय द्वारा उपरोक्त 1066 एकड़ भूमि का सर्वे करने व अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने बारे आदेश जारी किए गए थे। इस संबंध में संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी, उपमंडल अधिकारी (ना.) के कार्यालय द्वारा प्राइवेट कंपनी से सर्वे करवाया गया।
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6469 कब्जाधारी
ओल्ड ग्रांट पर दी गई भूमि के 48.19 एकड़ पर 5094 लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। इसी प्रकार लीज पर दी गई भूमि के साथ खाली पड़ी 1.30 एकड़ पर 102 लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर लगभग 29.45 एकड़ खाली सरकारी भूमि पर 1194 लोगों ने कब्जा किया हुआ है। जबकि वर्ष 2003 में नियमित की गई 13 कॉलोनियां में खाली पडी 7.18 एकड़ भूमि पर 124 लोगो का कब्जा है। इसमें वह भूमि भी शामिल है जो सरकार की ओर से गैर कृषि कार्यों के लिए 97.41 एकड़ भूमि लीज पर दी गई थी, इसमें से 72.76 एकड़ भूमि व 224 प्रोपर्टी की लीज समाप्त हो चुकी है और 130.21 एकड़ भूमि जोकि 45 लोगों को कृषि कार्य के लिए लीज पर दी गई थी, उसकी लीज भी काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है।
चार प्रकार के दिए जा रहे नोटिस
सदर क्षेत्र में अनधिकृत रुप से सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ नोटिस देने की कार्रवाई आरंभ हो चुकी है और कब्जाधारियों को 15 दिन का समय अतिक्रमण हटाने का दिया गया है। संपदा अधिकारी द्वारा 6469 लोगों को नोटिस दिए जाने हैं। इसमें ओल्ड ग्रांट भूमि, लीज की भूमि, लीज खत्म और सरकार भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग शामिल हैं।