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Ambala News: हार और जीत के ये रहे कारण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2024 02:00 AM IST
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Here are the reasons for defeat and victory
पहला कारण
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ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की नाराजगी

अंबाला लोकसभा सीट पर कांटे की टक्कर रही। शुरुआती रुझान से ही कांग्रेस ने अपनी पकड़ बनाए रखी। जहां भाजपा प्रत्याशी बंतो कटारिया शहरी क्षेत्र में ज्यादा मजबूत दिखी तो ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी वरुण चौधरी का असर देखने को मिला। इसकी बड़ी वजह किसानों की नाराजगी भी मानी जा रही हैं, क्योंकि किसानों ने बीते कुछ महीनों में कई प्रदर्शन भी किए और प्रदेश में भी भाजपा प्रत्याशियों को भी ग्रामीण क्षेत्र में किसानों का विरोध झेलना पड़ा।

दूसरा कारण

अपनों को न साध पाना

भाजपा ने जरूर बूथ स्तर पर अपना संगठन मजबूत कर लिया हो। मगर हाल ही में सरकार में किए फेर बदल से कई जगहों पर चर्चा भी कि भाजपा में अंदरूनी रूप से कई वरिष्ठ नेता अलग चल रहे हैं। यही कारण रहा था कि अंबाला की चारों विधानसभाओं में जहां प्रचार में तो नेता आगे दिख रहे थे मगर फील्ड में अलग ही रुख था। भाजपा नेताओं में एकजुटता नहीं दिखाई दी। कभी कोई किसी के मंच पर ताकत दिखा रहा था तो कभी कोई पूरे चुनाव की जिम्मेदारी लेकर दौड़ रहा था।
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तीसरा कारण

संविधान बदलने के मुद्दे ने बनाई कांग्रेस की हवा

कांग्रेस इस लोकसभा चुनाव में उतरते ही प्रत्येक मंच से संविधान बचाओ का नारा दे रही थी। अंबाला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी वरुण चौधरी भी नामांकन करने संविधान की प्रति को हाथ में लेकर गए। उन्होंने मंच से भी प्रति को दिखाते हुए कहा कि संविधान बचाना है। इस बात ने एक माहौल बना दिया। जिससे मतदाताओं में संदेश गया कि केंद्र सरकार इस बार कई बड़े बदलाव कर सकती है जिसका उन पर भी असर पड़ेगा। इस कारण से भी कुछ मतदाता भाजपा से कट गए।
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कांग्रेस की जीत के तीन फैक्टर



पहला फैक्टर

एकजुटता दिखाई और चुनाव लड़ा
प्रदेश में विभिन्न सीटों पर चुनाव लड़ने के दौरान कांग्रेस के गुट एक साथ न दिखाई पड़ रहे हों मगर अंबाला सीट पर सभी एकसाथ दिखाई दे रहे थे। जहां एक बार अंबाला छावनी में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रैली में सैलजा गुट नहीं आया। मगर यह गुट वरुण के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में बराबर जा रहा था और कार्यक्रम भी आयोजित करा रहा था। यह एकजुटता कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हुई।



दूसरा फैक्टर

सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी कांग्रेस के आई काम

अंबाला लोकसभा सीट पर प्रत्याशियों को प्रचार के लिए दो महीने से भी अधिक का समय मिला। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ एक एंटी इनकंबेंसी बनी, इसका प्रभाव मतदाता पर पड़ा। इसमें सबसे अधिक किसान और ग्रामीण लोगों पर असर छोड़ा। यही कारण कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा।




तीसरा फैक्टर

साफ और ईमानदार छवि

खास बात है कि कांग्रेस प्रत्याशी वरुण मुलाना जब विधायक बने तो सबसे युवा थे। उन्होंने प्रदेश की विधानसभा में कई प्रमुख मुद्दे उठाए। यही कारण है कि विपक्ष के विधायक भी उनके कार्य को सराहते थे। वरुण का मिलनसार व्यवहार, ईमानदार छवि ने भी लोगों को उनके पक्ष में किया।
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