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10 माह पूर्व कराई थी नसबंदी फिर भी गर्भवती हो गई महिला
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अंबाला। बच्चे दो ही अच्छे। परिवार नियोजन का यह नारा शिक्षित लोगों पर सटीक बैठता है। इतना ही नहीं उनका पालन पोषण, पढ़ाई लिखाई भी माता पिता ठीक ढंग से करने का जिम्मा उठा सकते हैं। दो से अधिक बच्चे न हो इसके लिए लोग नसबंदी जैसी प्रक्रिया अपनाते हैं। लेकिन यहां एक नया मामला सामने आया है। महिला ने 10 माह पूर्व नसबंदी करवाई थी लेकिन इसके बावजूद भी उसके पेट में गर्भ ठहर गया। महिला ने जब इस संबंध में डॉक्टरों से सलाह ली तो डॉक्टरों ने उसे बताया कि उसके पेट में चार महीने का बच्चा पल रहा है। अब अनचाहे बच्चे को लेकर महिला और उसका पति दोनों परेशान हैं।
परिवार नियोजन के तहत चलाए जा रहे नसबंदी अभियान को बड़ा झटका लगा है। ऑपरेशन करवाने के बाद भी एक महिला गर्भवती हो गई। तीसरा बच्चा न हो इसलिए दस महीने पहले ही इस महिला ने नागरिक अस्पताल में ऑपरेशनकरवाया था। अब अल्ट्रासाउंड करवाया तो पता चला कि गर्भ में करीब पांच महीने का सांस ले रहा है। रिपोर्ट देखकर महिला के होश उड़ गए। पहले दो बच्चों की डिलिवरी ऑपरेशन से हुई थी। तब चिकित्सकों ने उसे बताया था कि तीसरे बच्चे की डिलिवरी पर जान को जोखिम हो सकता है। गर्भ में पल रहे तीसरे बच्चे को लेकर अब महिला व उसका पूरा परिवार बेहद सकते में हैं। नसबंदी ऑपरेशन फेल होने को लेकर अब महिला मामले को चुनौती देने की बात कह रही है।
दस महीने पहले करवाई थी नसबंदी
पंजाब के पड़ोसी गांव की रहने वाली सरजीनी देवी 10 अप्रैल 2019 को सिटी के नागरिक अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन के लिए आई थी। 25 साल की सरजीनी के पास पहले दो बेटे हैं। दोनों ही बेटों की डिलिवरी ऑपरेशन से हुई थी। इस वजह से चिकित्सकों ने उसे तीसरे बच्चे के जोखिम न लेने की बात कही थी। पति हनप्रीत सिंह भी छोटा-मोटा काम कर परिवार का गुजारा चलाते हैं। आर्थिक दिक्क्तों की वजह से ही सरजीनी ने नसबंदी ऑप्रेशन करवाने का निर्णय लिया था। 10 अप्रैल को उसका नसबंदी ऑपरेशन हो गया था। इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। कुछ महीने तक वह पूरी तरह तंदुरुस्त रही।
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गर्भवती होने का अहसास ही नहीं हुआ
पति हनप्रीत ने बताया कि कुछ महीने तक उसकी पत्नी बिल्कुल तंदरुस्त रही लेकिन फिर शारीरिक दिक्कतें शुरू हो गई। उसने बताया कि तब हम समझते रहे कि नसबंदी ऑपरेशन की वजह से यह सब कुछ हो रहा है। उस समय यह अहसास ही नहीं हुआ कि उसकी पत्नी फिर गर्भवती हो गई। क्योंकि उनके दिमाग में तो यह बात थी कि उन्होंने ने तो नसबंदी का ऑपरेशन करवा लिया है अब गर्भ ठहरने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐसे में चार महीने गुजर गए। सरजीनी के गर्भवती होने का खुलासा तब हुआ जब वह पेट दर्द को लेकर अल्ट्रासाउंड करवाने गई। तब उसे चिकित्सक ने बताया कि वह तो गर्भवती है। उस समय गर्भ में चार महीने का शिशु होने की बात कही। चौकाने वाली रिपोर्ट देखकर दंपति के पांव तले से जमीन खिसक गई। अब गर्भ करीब पांच महीने का हो चुका है। ऐसे में वह गर्भपात भी नहीं करवा सकती।
इसलिए फेल हो जाते हैं ऑपरेशन...
नसबंदी ऑपरेशन को लेकर टारगेट होता है। इसकी पूर्ति के लिए नागरिक अस्पतालों में नसबंदी ऑपरेशन शिविरों में जल्दबाजी से ऑपरेशन किए जाते हैं। चिकित्सकों की मानें तो आमतौर पर नसबंदी ऑपरेशन में डॉक्टरों को एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है, लेकिन नागरिक अस्पतालों में तो एक घंटे में ही पांच से ज्यादा ऑपरेशन कर दिए जाते हैं। ऐसे ऑपरेशन न केवल फेल होते हैं बल्कि महिलाओं को शारीरिक दिक्कत भी ज्यादा होती है
देखो जी इस मामले को लेकर अभी हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई है। नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के बेहद कम चांस होते हैं। अगर किसी महिला के साथ ऐसा हुआ है तो उसकी जांच करवाई जाएगी। किस स्तर पर लापरवाही हुई है यह जांच के बाद ही सामने आएगा।
-डॉ. बलविंद्र कौर, एसएमओ, अंबाला
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परिवार नियोजन के तहत चलाए जा रहे नसबंदी अभियान को बड़ा झटका लगा है। ऑपरेशन करवाने के बाद भी एक महिला गर्भवती हो गई। तीसरा बच्चा न हो इसलिए दस महीने पहले ही इस महिला ने नागरिक अस्पताल में ऑपरेशनकरवाया था। अब अल्ट्रासाउंड करवाया तो पता चला कि गर्भ में करीब पांच महीने का सांस ले रहा है। रिपोर्ट देखकर महिला के होश उड़ गए। पहले दो बच्चों की डिलिवरी ऑपरेशन से हुई थी। तब चिकित्सकों ने उसे बताया था कि तीसरे बच्चे की डिलिवरी पर जान को जोखिम हो सकता है। गर्भ में पल रहे तीसरे बच्चे को लेकर अब महिला व उसका पूरा परिवार बेहद सकते में हैं। नसबंदी ऑपरेशन फेल होने को लेकर अब महिला मामले को चुनौती देने की बात कह रही है।
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दस महीने पहले करवाई थी नसबंदी
पंजाब के पड़ोसी गांव की रहने वाली सरजीनी देवी 10 अप्रैल 2019 को सिटी के नागरिक अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन के लिए आई थी। 25 साल की सरजीनी के पास पहले दो बेटे हैं। दोनों ही बेटों की डिलिवरी ऑपरेशन से हुई थी। इस वजह से चिकित्सकों ने उसे तीसरे बच्चे के जोखिम न लेने की बात कही थी। पति हनप्रीत सिंह भी छोटा-मोटा काम कर परिवार का गुजारा चलाते हैं। आर्थिक दिक्क्तों की वजह से ही सरजीनी ने नसबंदी ऑप्रेशन करवाने का निर्णय लिया था। 10 अप्रैल को उसका नसबंदी ऑपरेशन हो गया था। इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। कुछ महीने तक वह पूरी तरह तंदुरुस्त रही।
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गर्भवती होने का अहसास ही नहीं हुआ
पति हनप्रीत ने बताया कि कुछ महीने तक उसकी पत्नी बिल्कुल तंदरुस्त रही लेकिन फिर शारीरिक दिक्कतें शुरू हो गई। उसने बताया कि तब हम समझते रहे कि नसबंदी ऑपरेशन की वजह से यह सब कुछ हो रहा है। उस समय यह अहसास ही नहीं हुआ कि उसकी पत्नी फिर गर्भवती हो गई। क्योंकि उनके दिमाग में तो यह बात थी कि उन्होंने ने तो नसबंदी का ऑपरेशन करवा लिया है अब गर्भ ठहरने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐसे में चार महीने गुजर गए। सरजीनी के गर्भवती होने का खुलासा तब हुआ जब वह पेट दर्द को लेकर अल्ट्रासाउंड करवाने गई। तब उसे चिकित्सक ने बताया कि वह तो गर्भवती है। उस समय गर्भ में चार महीने का शिशु होने की बात कही। चौकाने वाली रिपोर्ट देखकर दंपति के पांव तले से जमीन खिसक गई। अब गर्भ करीब पांच महीने का हो चुका है। ऐसे में वह गर्भपात भी नहीं करवा सकती।
इसलिए फेल हो जाते हैं ऑपरेशन...
नसबंदी ऑपरेशन को लेकर टारगेट होता है। इसकी पूर्ति के लिए नागरिक अस्पतालों में नसबंदी ऑपरेशन शिविरों में जल्दबाजी से ऑपरेशन किए जाते हैं। चिकित्सकों की मानें तो आमतौर पर नसबंदी ऑपरेशन में डॉक्टरों को एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है, लेकिन नागरिक अस्पतालों में तो एक घंटे में ही पांच से ज्यादा ऑपरेशन कर दिए जाते हैं। ऐसे ऑपरेशन न केवल फेल होते हैं बल्कि महिलाओं को शारीरिक दिक्कत भी ज्यादा होती है
देखो जी इस मामले को लेकर अभी हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई है। नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के बेहद कम चांस होते हैं। अगर किसी महिला के साथ ऐसा हुआ है तो उसकी जांच करवाई जाएगी। किस स्तर पर लापरवाही हुई है यह जांच के बाद ही सामने आएगा।
-डॉ. बलविंद्र कौर, एसएमओ, अंबाला