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कोरोना को हराकर घर जाने वालों की दोबारा होगी स्क्रीनिंग
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अंबाला। कोरोना के बीच दूसरी खतरनाक बीमारी म्यूकर मायकोसिस (ब्लैक फंगस) का पहला मरीज आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। अब कोरोना को हराकर घर जाने वाले मरीजों की हफ्ते भर बाद दोबारा स्क्रीनिंग की तैयारी है। इसके साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही ऐसा कोई रोगी मिले, तत्काल आलाधिकारियों को सूचित करें। इस बीच ब्लैक फंगस से निपटने के लिए अपने स्तर पर भी अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था कर रहे हैं।
छावनी नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने पर घर लौटने वाले व्यक्ति पर अगले एक सप्ताह तक पूरी नजर रखी जाएगी और जाते समय उसे ब्लैक फंगस के लक्षण बारे जागरूक किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ते ही वह डॉक्टरों से सलाह ले सके। इतना ही नहीं मधुमेह व कोरोना के बीच गंभीर रूप से बीमार होने वाले मरीजों को एक सप्ताह के बाद दोबारा से अस्पताल में स्क्रीनिंग के लिए बुलाया जाएगा।
बता दें कि अंबाला में ब्लैक फंगस के पहले मामले को अमर उजाला ने 16 मई का उजागर किया था। शहजादपुर निवासी 45 वर्षीय अश्वनी ब्लैक फंगस से ग्रस्त हो गया और उसकी एक आंख से दिखना तक बंद हो गया। हालांकि मरीज पीजीआई में उपचाराधीन है।
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फिजिशियन की सलाह पर ही दिया जाएगा स्टेरॉयड
बेहोशी के डॉक्टर वेद रत्न पाठक ने बताया कि अनियंत्रित मधुमेह वाले लोगों, स्टेरॉयड के इस्तेमाल से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने तथा लंबे समय तक वेंटिलेटर में रहने तथा वोरिकोनाजोल थैरेपी से इस फंगस का संक्रमण होता है। इसको ध्यान में रखते हुए अब बिना फिजिशियन के सलाह के मरीजों को स्टेरॉयड नहीं दिया जाएगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि होम आइसोलेशन में रहने वाले भी बिना किसी डॉक्टर से पूछे स्टेरॉयड का सेवन न करें। इसके अलावा एंटी फंगस दवाएं भी पीएमओ डॉ. राकेश सहल के सहयोग से जल्द उपलब्ध करवा दी जाएगी।
उपचार के लिए तैयार होता है स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का पैनल
किसी मरीज में ब्लैक फंगस का संक्रमण सिर्फ एक त्वचा से शुरू होता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है। उपचार में सभी मृत और संक्रमित उत्तक को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है। कुछ मरीजों का ऊपरी जबड़ा या कभी-कभी आंख निकालनी पड़ जाती है। उपचार में एंटी-फंगल थैरेपी का चार से छह सप्ताह का कोर्स भी शामिल हो सकता है। चूंकि यह शरीर के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित करता है, इसलिए इसके उपचार के लिए फिजिशियन के अलावा, न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, सर्जन शामिल होते हैं।
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पीएमओ ने मीटिंग बुलाकर डॉक्टरों को दिए जरूरी निर्देश
अलर्ट को लेकर छावनी नागरिक अस्पताल में मीटिंग बुलाई गई। पीएमओ डॉ. राकेश सहल ने ब्लैक फंगस को लेकर टीम का गठन किया और उन्हें जरूरी दिशा- निर्देश दिए। मीटिंग में ईएनटी से एसएमओ डॉ. शीलकांत पजनी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी गोयल, डॉ. वेद रत्न पाठक व अन्य मौजूद रहे।
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छावनी नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने पर घर लौटने वाले व्यक्ति पर अगले एक सप्ताह तक पूरी नजर रखी जाएगी और जाते समय उसे ब्लैक फंगस के लक्षण बारे जागरूक किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ते ही वह डॉक्टरों से सलाह ले सके। इतना ही नहीं मधुमेह व कोरोना के बीच गंभीर रूप से बीमार होने वाले मरीजों को एक सप्ताह के बाद दोबारा से अस्पताल में स्क्रीनिंग के लिए बुलाया जाएगा।
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बता दें कि अंबाला में ब्लैक फंगस के पहले मामले को अमर उजाला ने 16 मई का उजागर किया था। शहजादपुर निवासी 45 वर्षीय अश्वनी ब्लैक फंगस से ग्रस्त हो गया और उसकी एक आंख से दिखना तक बंद हो गया। हालांकि मरीज पीजीआई में उपचाराधीन है।
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फिजिशियन की सलाह पर ही दिया जाएगा स्टेरॉयड
बेहोशी के डॉक्टर वेद रत्न पाठक ने बताया कि अनियंत्रित मधुमेह वाले लोगों, स्टेरॉयड के इस्तेमाल से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने तथा लंबे समय तक वेंटिलेटर में रहने तथा वोरिकोनाजोल थैरेपी से इस फंगस का संक्रमण होता है। इसको ध्यान में रखते हुए अब बिना फिजिशियन के सलाह के मरीजों को स्टेरॉयड नहीं दिया जाएगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि होम आइसोलेशन में रहने वाले भी बिना किसी डॉक्टर से पूछे स्टेरॉयड का सेवन न करें। इसके अलावा एंटी फंगस दवाएं भी पीएमओ डॉ. राकेश सहल के सहयोग से जल्द उपलब्ध करवा दी जाएगी।
उपचार के लिए तैयार होता है स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का पैनल
किसी मरीज में ब्लैक फंगस का संक्रमण सिर्फ एक त्वचा से शुरू होता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है। उपचार में सभी मृत और संक्रमित उत्तक को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है। कुछ मरीजों का ऊपरी जबड़ा या कभी-कभी आंख निकालनी पड़ जाती है। उपचार में एंटी-फंगल थैरेपी का चार से छह सप्ताह का कोर्स भी शामिल हो सकता है। चूंकि यह शरीर के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित करता है, इसलिए इसके उपचार के लिए फिजिशियन के अलावा, न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, सर्जन शामिल होते हैं।
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पीएमओ ने मीटिंग बुलाकर डॉक्टरों को दिए जरूरी निर्देश
अलर्ट को लेकर छावनी नागरिक अस्पताल में मीटिंग बुलाई गई। पीएमओ डॉ. राकेश सहल ने ब्लैक फंगस को लेकर टीम का गठन किया और उन्हें जरूरी दिशा- निर्देश दिए। मीटिंग में ईएनटी से एसएमओ डॉ. शीलकांत पजनी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी गोयल, डॉ. वेद रत्न पाठक व अन्य मौजूद रहे।
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