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Ambala News: ढहने की कगार पर पहुंचे गेट, पिलर भी टूटे, खोखली हुई नरवाना ब्रांच नहर
Sun, 04 Jan 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sun, 04 Jan 2026 01:31 AM IST
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सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। पिलर हवा में झूल रहे थे तो बेड भी बैठ चुका था। गेट ढहने के कगार पर थे, जिससे बड़ा हादसा भी हो सकता था।
आसपास के पूरे एरिया के लिए लाइफ लाइन चैनल मानी जाने वाली नरवाना ब्रांच नहर के ये हालात बन गए, जो धर्मनगरी ही नहीं प्रदेश के अन्य जिलों व दिल्ली तक की प्यास बुझाने व सिंचाई में अहम भूमिका निभाते - निभाते खुद खोखली हो गई।
निर्माण के बाद 50 वर्षों से इसकी सुध नहीं ली जा सकी। काफी मात्रा में गाद अटने के साथ ही तटबंध तक खस्ताहाल हो गए। अधिकारियों को इसका आभास हुआ तो पहली बार पूरी तरह से पानी सुखाने पर जो हालात मिले, उसे देख आंखें खुली की खुली रह गई। 18 लाख का बजट मंजूर हुआ तो इस पर कार्य भी शुरू किया गया।
नहर के ये हालात कहीं ओर नहीं बल्कि कुरुक्षेत्र-पिहोवा रोड पर ज्योतिसर के समीप स्थित पुल के साथ ही हेड के लिए बनाए गए गेटों पर मिले। इसी पुल के साथ ही नहर किनारे विभाग का कार्यालय तक स्थित है। बुढ़ेड़ा हेड से पहले इसी गेट से ही नहर का पानी रोके जाने के साथ-साथ सरस्वती फीडर में भी डायवर्ट किया जाता है। अभी तक नहर के महज ऊपरी हिस्से की ही सामान्य मरम्मत की जाती रही। अधिकारियों ने धरातल को जानने का प्रयास तक नहीं किया। संवाद
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कुरुक्षेत्र। पिलर हवा में झूल रहे थे तो बेड भी बैठ चुका था। गेट ढहने के कगार पर थे, जिससे बड़ा हादसा भी हो सकता था।
आसपास के पूरे एरिया के लिए लाइफ लाइन चैनल मानी जाने वाली नरवाना ब्रांच नहर के ये हालात बन गए, जो धर्मनगरी ही नहीं प्रदेश के अन्य जिलों व दिल्ली तक की प्यास बुझाने व सिंचाई में अहम भूमिका निभाते - निभाते खुद खोखली हो गई।
निर्माण के बाद 50 वर्षों से इसकी सुध नहीं ली जा सकी। काफी मात्रा में गाद अटने के साथ ही तटबंध तक खस्ताहाल हो गए। अधिकारियों को इसका आभास हुआ तो पहली बार पूरी तरह से पानी सुखाने पर जो हालात मिले, उसे देख आंखें खुली की खुली रह गई। 18 लाख का बजट मंजूर हुआ तो इस पर कार्य भी शुरू किया गया।
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नहर के ये हालात कहीं ओर नहीं बल्कि कुरुक्षेत्र-पिहोवा रोड पर ज्योतिसर के समीप स्थित पुल के साथ ही हेड के लिए बनाए गए गेटों पर मिले। इसी पुल के साथ ही नहर किनारे विभाग का कार्यालय तक स्थित है। बुढ़ेड़ा हेड से पहले इसी गेट से ही नहर का पानी रोके जाने के साथ-साथ सरस्वती फीडर में भी डायवर्ट किया जाता है। अभी तक नहर के महज ऊपरी हिस्से की ही सामान्य मरम्मत की जाती रही। अधिकारियों ने धरातल को जानने का प्रयास तक नहीं किया। संवाद
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