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आफत बनी फ्री यात्रा, बहनों-बच्चों को मिले धक्के

Sun, 30 Aug 2015 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला Updated Sun, 30 Aug 2015 01:16 AM IST
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हरियाणा सरकार ने राखी पर्व पर बहनों व पंद्रह साल से कम उम्र के बच्चों को फ्री यात्रा सुविधा दी हुई थी। ये सुविधा दो दिन के लिए थी। लेकिन ये यात्रा बहनों व उनके बच्चों के लिए आफत बन गई। उन्हे इस दौरान न केवल धक्के  खाने पड़े, बल्कि बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। पूरा दिन बहनें व उनके साथ बच्चे इसी बात को लेकर परेशान होते रहे।

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प्राइवेट गाड़ी में जाना पड़ा

सीमा कपूर अपने बेटे सचिन के साथ जगाधरी में जा रही थी। सुबह सात बजे ही वे बस स्टैंड पर आ गईं थी। लेकिन सवा नौ बजे तक उन्हे बस नहीं मिली। जो भी बसें आई, वो पहले ही पूरी तरह भरी पड़ी थी। दो बसों के भीतर घुसने की हिम्मत की, लेकिन चढ़ न सकी। बस में चढ़ते हुए उसका बच्चा भी भीड़ में फंसने लगा, इसलिए पीछे हट गई। बाद में टाटा सूमो में भी थोड़ी सी जगह में बैठकर जगाधरी पहुंची।

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गिरते-गिरते बची महिला

नवविवाहिता रीटा को उनके पति राकेश सुबह साढ़े आठ बजे कैंट बस स्टैंड छोडने के लिए आए थे। उन्हे करनाल अपने भाई के घर राखी बांधने जाना था। ग्यारह बजे तक वे बस स्टैंड पर ही खड़े रहे। हरियाणा रोडवेज की बस में एक बार चढने की कोशिश और दरवाजे तक पहुंच भी गई। लेकिन परिचालक ने जबरदस्त भीड़ को देखते हुए बस ही चला दी। पति ने मुश्किल से रीटा को संभालते हुए हल्की चलती बस से नीचे उतारते हुए गिरने से बचाया। बाद में राजस्थान डिपो की एक बस में किराया देकर करनाल तक पहुंचवाया।

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कोई बस नहीं रुकी

महेशनगर चौक पर यमुनानगर जाने के लिए रेखा अपने बेटी सुशील के साथ बस पकडने के लिए खड़ी थी। करीबन साढ़े ग्यारह बजे तक बस स्टाप पर खड़ी रहीं। उनके साथ और भी कई बहनें बस के इंतजार में खड़ी रही। रेखा ने बताया कि इस बस स्टाप से करीबन छह बसें निकल चुकी है, बहनें सड़क पर खड़ी होकर बस को रूकने का इशारा करती रही। गर्मी में परेशान दूर से ही चलती बस चालक को बस रोकने के लिए आग्रह करती रही, लेकिन बस चालकों ने भीड़ देखकर दूर से ही बसें निकाल दी। बाद में उन्हे बहुत ही मुश्किल से टाटा सूमो, ट्रेक्स व टवेरा में खर्च करके गंतव्यों तक पहुंचना पड़ा।


धक्कामुक्की में हो गई बेहोश 

सरिता पंचाल अपनी बेटी रक्षा के साथ सोनीपत जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़ी थी। वे सुबह आठ बजे से ही बस स्टैंड पर पति और बच्ची के साथ खड़ी बस का इंतजार कर रही थी। पति उन्हें बस में चढ़ाने आए थे। दो घंटे बाद एक बस बमुश्किल मिली और पूरे धक्का-मुक्की के माहौल में बस में चढ़ने की कोशिश की। लेकिन अचानक सरिता को चक्कर आ गया और वे चढ़ते हुए वहीं गिर गई। मुश्किल से उठाकर उसे बस से दूर किया गया। महिला के पति ने बताया कि सुबह से उसकी पति गर्मी में बेहाल हो रही थी। दूसरा बसों में इतना ज्यादा रश था, ऐसे में चक्कर आना लाजिमी था।


भूखी प्यासी घंटों इंतजार करती रही बहनें

अपने-अपने भाइयों के घर रक्षाबंधन पर्व मनाने जाने वाली बहनों को बसें पकडने के लिए बहुत ही ज्यादा कशमकश करनी पड़ी। सुबह से ही भूखी-प्यासी बहनें मौके पर ही बैठी रही। महिला बिमला, पूजा, गुरप्रीत कौर व सुषमा ने बताया कि अधिकतर बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के बाद ही पानी पीती है और खाना खाती है। इसलिए वे सुबह भूख पेट घरों से निकली थी। उन्हे उम्मीद थी कि वे जल्द ही अपने गंतव्यों पर पहुंचने के बाद भाइयों को राखियां बांधेगी और फिर जलपान करेंगी। लेकिन घंटों तो उनके बसें पकडने में बर्बाद हो गए और फिर बसों में जो धक्के मिले, वो अलग। घंटों का सफर बहुत सी बहनों को खड़े होकर ही काटना पड़ा। 


सुविधा देनी है तो बसें बढ़ा ले सरकार

बहनों का कहना था कि यदि सरकार ऐसी सुविधा बहनों व उनके बच्चों को देना चाहती है तो कम से कम बेड़े में बसों की संख्या तो बढ़ा लें। उन बहनों को ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ी। जिनका रूट ग्रामीण था। इन रूटों पर तो वैसे ही बसें बहुत कम थी और जो थी उनमें रश इतना ज्यादा था कि अधिकतर बहनों को बस सुविधा का लाभ ही नहीं मिला। इसे को लेकर ग्रामीण बहनों में ज्यादा रोष था। ग्रामीण बहनों का कहना था कि अधिकतर जरूरतमंद तबका ग्रामीण बेल्ट में ही था और उन्हे ही इस फ्री बस सेवा का लाभ नहीं मिला, ऐसे में सरकार की इस घोषणा का क्या फायदा?


ट्रेनों और प्राइवेट वाहनों में रहा रश

बसों की कम संख्या की वजह से बहुत से लोगों ने तो ट्रेनों में सफर किया, जबकि अधिकतर बहनों को प्राइवेट वाहनों व बसों में किराया देकर सफर करना पड़ा। लेकिन इन वाहनों में भी इतना ज्यादा रश था कि बहनों को इन वाहनों में भी धक्के खाकर ही अपने गंतव्यों तक पहुंचना पड़ा। उधर, रेलवे ने इसी बाबत 18 स्पेशल ट्रेनें भी चलाई हुई है। लेकिन उसके बावजूद भी रश नहीं संभला। स्टेशन पर भी जबरदस्त रह और ट्रेनों को पकडने के लिए मारामारी बनी रही। ट्रेनों की जनरल बोगियां भी खचाखच भरी रही। लिहाजा ट्रेनों में यात्रा करने पर भी बहनों के पसीने छूट गए।




सिटी में आई सबसे ज्यादा परेशानी

कैंट बस स्टैंड पर तो बहनों को धक्के मिले। लेकिन सिटी के हालात बद से बदत्तर थे।  क्योंकि सिटी में तो अभी तक पूरी तरह से बस स्टैंड की सुविधा ही नहीं है। एक शेड के नीचे बस स्टैंड है, लेकिन कपड़ा मार्केट के ट्रैफिक की वजह से लांग रूट की बसें इस बस अड्डे में प्रवेश ही नहीं करती। नए बस स्टैंड का प्रोजेक्ट लटका पड़ा है। कब बनेगा कुछ मालूम नहीं?


लिहाजा लोग अग्रसेन चौक व मानव चौक से बसें पकड़ते हैं। आज भी इन दोनों चौराहों कह़ाल इंतजार कर रहे सैंकड़ों यात्रियों की भीड़ से इतना ज्यादा खराब था कि आसपास जबरदस्त जाम की स्थिति बनी रही। लोग बस पकडने के लिए सड़कों पर ही खड़े रहे। बसें, आती बहनें व बच्चे और अन्य यात्री टूटकर बसों में चढ़ते।


लेकिन अत्याधिक रश को देखते हुए बस चालक भी बसों को धीरे-धीरे आगे बढ़ा देते। जिसे देखकर हारकर बहनें व बच्चे उस बस को छोड़ देते। ऐसा माहौल दोपहर तक बना रहा। इस रूट पर सबसे ज्यादा परेशानी इसलिए भी आई कि दूसरे राज्यों की अधिकतर बसें सिटी बस स्टैंड की ओर आती ही नहीं। लोगों ने मुख्यमंत्री मनोहन लाल खट्टर से मांग की कि सिटी में जल्द बस स्टैंड की व्यवस्था सुनिश्चित करवाई जाए।




रक्षाबंधन के अवसर पर परिवहन विभाग के अधिकारियों विशेषकर चालकों व परिचालकों को विशेष निर्देश दिए गए कि वह यह सुनिश्चित करें कि रोडवेज में आने-जाने वाली महिलाओं व बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बस अड्डों पर सरकार की योजना से उत्साहित चालकों व परिचालकों ने भी हरियाणा राज्य परिवहन की बसों में महिलाओं को बड़े आदर-सत्कार के साथ बैठने में तरजीह दी।

-कुलधीर सिंह, महाप्रबंधक, हरियाणा रोडवेज, अंबाला डिपो।


राखी बांधने गई बहनों के घर हजारों की चोरी 

सुबह भाइयों को राखी बांधने गई दो महिलाओं के घर से चोरों ने हजारों रुपये और गहने चोरी कर लिए। बताया जाता है कि दोनों महिलाएं रिश्तेदार हैं और एक साथ ही राखी बांधने के लिए गई थी। जब महिलाएं अपने घर पहुंची तो घर के ताले टूटे देखकर होश उड़ गए। 


उधर, पीड़ित महिलाओं ने तुंरत इलाका पुलिस को चोरी की शिकायत दी। जिसके आधार पर पुलिस की टीम ने मौके का मुआयना कर जांच शुरू कर दी। पुलिस को दी शिकायत में पूजा विहार निवासी सुखदेव शर्मा ने बताया कि वह टेलीफोन एक्सचेंज में कार्यरत है। शनिवार को अल सुबह वह ड्यूटी पर चले गए थे और उनकी पत्नी रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी बांधने के लिए अंबाला सिटी चली गई थी। जब वह 11 बजे के करीब लौटी तो देखा घर से ताले टूटे हुए थे और सारा सामान बिखरा हुआ था। 


अलमारी में रखी हजारों की राशि व जेवरात पर चोर हाथ साफ कर गए। पुलिस की टीम ने फिंगर प्रिंट्स लिए और मौके का मुआयना किया। दूसरी ओर सोनिया कालोनी निवासी लीना शर्मा ने पुलिस को शिकायत दी कि वह अपनी रिश्तेदार के साथ भाई को राखी बांधने के लिए घर गई थी।


 जब घर लौटी तो मेन गेट के ताले टूटे हुए थे और हजारों की नकदी व जेवरात भी नहीं थे। पुलिस ने मौके का मुआयना किया और आसपास के लोगों से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही चोरों को काबू कर लिया जाएगा।

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