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जापान और यूएसए का फूल गांव मघरपुरा में बिखेर रहा खुशबू
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शहजादपुर। गांव मघरपुरा में जापान और यूएसए का फूल अपनी खुशबू बिखेर रहा है। इस गांव में सरसेहड़ी के युवा किसान हरीश सैनी द्वारा विदेशों से फूलों का बीज मंगवाकर खेती की जा रही है। वे फूलों एवं सजावटी पौधों की खेती लगभग साढ़े चार एकड़ में कर रहे हैं। लीज पर ली गई इस जमीन पर उन्होंने बागवानी विभाग की स्कीम के अंतर्गत नेट हाउस और पोली हाउस लगाया है। जिस पर उन्हें 65 प्रतिशत की सब्सिडी मिली है। इसका टर्नओवर 50 से 60 लाख रुपये और मुनाफा 25 से 30 लाख रुपये है। किसान हरीश द्वारा फूलों की तैयार की गई पौध और फूलों के पौधे उत्तरी भारत के विभिन्न शहरों में खुशबू बिखेर रहे हैं। हरीश सैनी ने बताया कि उनके फार्म में सर्दियों और गर्मियों में तैयार होने वाले फूलों की पूरी वैरायटी है।
जम्मू से लेकर सहारनपुर तक फूलों की मांग
इस फार्म में तैयार किए गए फूलों की पौध एवं पौधों की मांग सहारनपुर, देहरादुन, चंडीगढ़, अमृतसर और जम्मू आदि शहरों में है। इस फार्म पर फूलों की विदेशी वैरायटी के साथ-साथ भारत के पुणे की विभिन्न किस्में तैयार की जा रही हैं। हरीश सैनी ने बीएससी कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स और कंपयूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया हुआ है।
बिना मिट्टी के तैयार की जाती है बीज से पौध
पोली हाउस में लगभग 1.50 एकड़ में बीज से पौध बगैर मिट्टी के तैयार की जाती है। इसमें नारियल के चूरे, कोकोपीट मिक्सचर से पौध तैयार होती है। फार्म की सबसे खास बात यह है कि यहां वीड मैट और ऐरोड्रिप सिस्टम लगाया हुआ है। फूल तैयार करने के लिए पुणे की टेक्नोलॉजी को यहां अपनाया गया है। पोली हाउस में टेंपरेचर मैंटेन करने के लिए फव्वारा सिस्टम लगाया गया है और टिशू कल्चर प्लांट भी लगा हुआ है।
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सर्दी की किस्में
हाईब्रिड गैंदा, दनथूस, गजेनिया, पैंजी, साल्विया, वेरबिना, स्टॉक, एस्टर, कारनेशन, पिटूनिया, जैरेनियम, डेजी आदि किस्मों के बीज से पौध तैयार कर रहे हैं जोकि 30 से 40 दिन में तैयार होते हैं।
गर्मी की किस्में
मैन विन्का (सदाबहार फूल), पोरचुलाका जिसे दोपहर खेड़ी भी कहा जाता है। कोचिया, बालसम, सिलोसिया, कॉसमॉस, गोम्फ्रेना के साथ-साथ पपीता और तुलसी के पौधे भी तैयार किए जाते हैं।
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जम्मू से लेकर सहारनपुर तक फूलों की मांग
इस फार्म में तैयार किए गए फूलों की पौध एवं पौधों की मांग सहारनपुर, देहरादुन, चंडीगढ़, अमृतसर और जम्मू आदि शहरों में है। इस फार्म पर फूलों की विदेशी वैरायटी के साथ-साथ भारत के पुणे की विभिन्न किस्में तैयार की जा रही हैं। हरीश सैनी ने बीएससी कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स और कंपयूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया हुआ है।
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बिना मिट्टी के तैयार की जाती है बीज से पौध
पोली हाउस में लगभग 1.50 एकड़ में बीज से पौध बगैर मिट्टी के तैयार की जाती है। इसमें नारियल के चूरे, कोकोपीट मिक्सचर से पौध तैयार होती है। फार्म की सबसे खास बात यह है कि यहां वीड मैट और ऐरोड्रिप सिस्टम लगाया हुआ है। फूल तैयार करने के लिए पुणे की टेक्नोलॉजी को यहां अपनाया गया है। पोली हाउस में टेंपरेचर मैंटेन करने के लिए फव्वारा सिस्टम लगाया गया है और टिशू कल्चर प्लांट भी लगा हुआ है।
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सर्दी की किस्में
हाईब्रिड गैंदा, दनथूस, गजेनिया, पैंजी, साल्विया, वेरबिना, स्टॉक, एस्टर, कारनेशन, पिटूनिया, जैरेनियम, डेजी आदि किस्मों के बीज से पौध तैयार कर रहे हैं जोकि 30 से 40 दिन में तैयार होते हैं।
गर्मी की किस्में
मैन विन्का (सदाबहार फूल), पोरचुलाका जिसे दोपहर खेड़ी भी कहा जाता है। कोचिया, बालसम, सिलोसिया, कॉसमॉस, गोम्फ्रेना के साथ-साथ पपीता और तुलसी के पौधे भी तैयार किए जाते हैं।