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पूर्व सैनिक बोले : अगर सरकार हाथ खोलती तो लाहौर पर कब्जा होता
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पूर्व लेफ्टिनेंट, गुलजार सिंह मुल्तानी ।
अंबाला। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और इसके बाद सीजफायर पर भूतपूर्व सैनिकों की अलग राय है। इस पर पूर्व सैनिकों का कहना है कि दूसरे देश भारत को अपना काम न समझाएं। अगर सरकार हाथ खोलती तो लाहौर में भारतीय सेना का कब्जा होता। उनका कहना है कि पाकिस्तान हर बार भारत की पीठ पर वार करता है। इस बार उसे जरूर सबक सिखाना चाहिए था।
पाकिस्तान के हिमाकत नहीं करने की गारंटी नहीं : मुलतानी
इस संबंध में पूर्व लेफ्टिनेंट गुलजार सिंह मुलतानी का कहना है कि पाकिस्तान को सेना की तरफ से जैसा जवाब देना चाहिए था वैसा नहीं मिला। अब क्या पाकिस्तान हमारे देश में घुसपैठ नहीं करेगा या फिर हमारे देश पर हमला नहीं करेगा। पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब मिलना चाहिए। इससे वह हमारे देश पर आंख उठाकर न देख सके।
ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए : बालक राम
पूर्व सार्जेंट बालक राम ने बताया कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाना चाहिए था, क्योंकि पाकिस्तान यहीं भाषा समझता है। इस तरह से लड़ाइयों नहीं होती। हमने 1965 और 1971 की लड़ाई लड़ी है। हमारी सेना के हाथ खोलते तो पाकिस्तान को उसकी हिमाकत का अंदाजा अच्छी तरह से लग जाता। इसके बाद भारतीय सेना लाहौर में कब्जा करती।
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सीजफायर पर अमेरिकी की दखल ठीक नहीं : बाबू राम
भारतीय नौ सेना के पूर्व सीपीओ बाबू राम सैनी कहते हैं कि पाकिस्तान ने लड़ाई शुरू की है। जबकि हमारी सेना ने पाकिस्तानी सेना या फिर उनके नागरिकों पर कोई हमला नहीं किया। हमारी तरफ से लड़ाई का प्रोफाइल लो रहा है। लड़ाई से हमेशा नुकसान होता है। जिस अमेरिका को हमने 1971 में वापस भेज दिया था। आज ट्रंप हमारा फैसला करवा रहे हैं। इसका मतलब तो यही हुआ कि हम रसियन ग्रुप की तरफ से अमेरिकन ग्रुप की तरफ चले गए।
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पाकिस्तान के हिमाकत नहीं करने की गारंटी नहीं : मुलतानी
इस संबंध में पूर्व लेफ्टिनेंट गुलजार सिंह मुलतानी का कहना है कि पाकिस्तान को सेना की तरफ से जैसा जवाब देना चाहिए था वैसा नहीं मिला। अब क्या पाकिस्तान हमारे देश में घुसपैठ नहीं करेगा या फिर हमारे देश पर हमला नहीं करेगा। पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब मिलना चाहिए। इससे वह हमारे देश पर आंख उठाकर न देख सके।
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ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए : बालक राम
पूर्व सार्जेंट बालक राम ने बताया कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाना चाहिए था, क्योंकि पाकिस्तान यहीं भाषा समझता है। इस तरह से लड़ाइयों नहीं होती। हमने 1965 और 1971 की लड़ाई लड़ी है। हमारी सेना के हाथ खोलते तो पाकिस्तान को उसकी हिमाकत का अंदाजा अच्छी तरह से लग जाता। इसके बाद भारतीय सेना लाहौर में कब्जा करती।
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सीजफायर पर अमेरिकी की दखल ठीक नहीं : बाबू राम
भारतीय नौ सेना के पूर्व सीपीओ बाबू राम सैनी कहते हैं कि पाकिस्तान ने लड़ाई शुरू की है। जबकि हमारी सेना ने पाकिस्तानी सेना या फिर उनके नागरिकों पर कोई हमला नहीं किया। हमारी तरफ से लड़ाई का प्रोफाइल लो रहा है। लड़ाई से हमेशा नुकसान होता है। जिस अमेरिका को हमने 1971 में वापस भेज दिया था। आज ट्रंप हमारा फैसला करवा रहे हैं। इसका मतलब तो यही हुआ कि हम रसियन ग्रुप की तरफ से अमेरिकन ग्रुप की तरफ चले गए।

पूर्व लेफ्टिनेंट, गुलजार सिंह मुल्तानी ।

पूर्व लेफ्टिनेंट, गुलजार सिंह मुल्तानी ।