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Ambala News: पहली बार टांगरी की गहराई और चौड़ाई का सर्वे कराएगा सिंचाई विभाग
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अंशु शर्मा
अंबाला। पहाड़ों में भारी बारिश के बाद गत सालों से उफान पर रहकर तबाही मचाने वाली टांगरी नदी का पहली बार सिंचाई विभाग सर्वे कराने जा रहा है। जल्द ही करीब 10 लाख रुपये की लागत से टेंडर निकाला जाएगा। इस टेंडर के तहत एक टीम टांगरी नदी का पूरा सर्वे कर उसे कागजों पर उतारेगी।
पता किया जा रहा है कि आखिर टांगरी की कितनी गहराई, चौड़ाई और लंबाई है। कितना रेत है और कौन सी क्वालिटी का। कितना एरिया माइनिंग तो कितना सिंचाई विभाग के अंडर आता है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा, जिससे कि टांगरी नदी पर काम किया जा सके। पहाड़ों में अगर भारी बारिश होती है तो हजारों क्यूसेक पानी टांगरी बांधों के बीच में ही रह सके और जद में बसी कॉलोनियों में बाढ़ से हालात बन सके।
दरअसल, यह टेंडर मानसून से पहले ही हो जाना था लेकिन आचार संहिता के चलते कागजों में भी अटका पड़ा था। अब सिंचाई विभाग ने नदियों से जुड़े विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी करने का काम तेजी से शुरू कर दिया है।
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पिछले 10 साल में टांगरी का बदला स्वरूप
सालों पहले टांगरी नदी की जद में चंद मकान थे। अब इन मकानों की संख्या हजारों में हो गई है। यहां तक कि नदी के बीच में भी मकान बनने से जगह-जगह नदी का रुख बदल गया है। कहीं जाकर नदी की चौड़ाई अधिक है तो कहीं बिल्कुल कम हो चुकी है। नदी का पूरा स्वरूप बदल चुका है। ऐसे में नदी में काम करने पर काफी परेशानी हो सकती है। सिंचाई विभाग टेंडर निकालकर बांध को मजबूत कर सकता है और अन्य छोटे काम कर सकता है। माइनिंग का टेंडर आदि देने के लिए सर्वे करवाकर पूरा खाका तैयार करना जरूरी है। दरअसल, टांगरी नदी एक बरसाती नदी है। पहाड़ों में भारी बरसात होती है तो पानी आता है।
वर्जन
टांगरी नदी के सर्वे का जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा। नदी की चौड़ाई, लंबाई व गहराई आदि का पता लगाकर पूरा प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा जाएगा।
अमित रघुवंशी, एसई, सिंचाई विभाग अंबाला
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अंबाला। पहाड़ों में भारी बारिश के बाद गत सालों से उफान पर रहकर तबाही मचाने वाली टांगरी नदी का पहली बार सिंचाई विभाग सर्वे कराने जा रहा है। जल्द ही करीब 10 लाख रुपये की लागत से टेंडर निकाला जाएगा। इस टेंडर के तहत एक टीम टांगरी नदी का पूरा सर्वे कर उसे कागजों पर उतारेगी।
पता किया जा रहा है कि आखिर टांगरी की कितनी गहराई, चौड़ाई और लंबाई है। कितना रेत है और कौन सी क्वालिटी का। कितना एरिया माइनिंग तो कितना सिंचाई विभाग के अंडर आता है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा, जिससे कि टांगरी नदी पर काम किया जा सके। पहाड़ों में अगर भारी बारिश होती है तो हजारों क्यूसेक पानी टांगरी बांधों के बीच में ही रह सके और जद में बसी कॉलोनियों में बाढ़ से हालात बन सके।
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दरअसल, यह टेंडर मानसून से पहले ही हो जाना था लेकिन आचार संहिता के चलते कागजों में भी अटका पड़ा था। अब सिंचाई विभाग ने नदियों से जुड़े विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी करने का काम तेजी से शुरू कर दिया है।
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पिछले 10 साल में टांगरी का बदला स्वरूप
सालों पहले टांगरी नदी की जद में चंद मकान थे। अब इन मकानों की संख्या हजारों में हो गई है। यहां तक कि नदी के बीच में भी मकान बनने से जगह-जगह नदी का रुख बदल गया है। कहीं जाकर नदी की चौड़ाई अधिक है तो कहीं बिल्कुल कम हो चुकी है। नदी का पूरा स्वरूप बदल चुका है। ऐसे में नदी में काम करने पर काफी परेशानी हो सकती है। सिंचाई विभाग टेंडर निकालकर बांध को मजबूत कर सकता है और अन्य छोटे काम कर सकता है। माइनिंग का टेंडर आदि देने के लिए सर्वे करवाकर पूरा खाका तैयार करना जरूरी है। दरअसल, टांगरी नदी एक बरसाती नदी है। पहाड़ों में भारी बरसात होती है तो पानी आता है।
वर्जन
टांगरी नदी के सर्वे का जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा। नदी की चौड़ाई, लंबाई व गहराई आदि का पता लगाकर पूरा प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा जाएगा।
अमित रघुवंशी, एसई, सिंचाई विभाग अंबाला