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Ambala News: बांध बनाने को किसान जमीन देने को तैयार थे, विभाग चलता रहा सुस्त चाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jun 2024 03:24 AM IST
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Farmers were ready to give their land for building the dam, but the department kept moving at a slow pace
मुलाना। पिछले वर्ष आई बाढ़ का मंजर हलका मुलाना के लोगों को आज भी याद है। गांव हेमामाजरा में मारकंडा नदी पर बांध नहीं होने के कारण कई गांवों में आए जलप्रलय को याद कर आज भी क्षेत्र के किसान सिहर उठते हैं। किसानों की हजारों एकड़ फसलें जलमग्न हो गई थी। अकेले हेमामाजरा गांव के 937 एकड़ फसलें नष्ट हो गई थी।
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सभी खेतों में केवल मारकंडा नदी का रेत नजर आता था। इसका कारण हेमामाजरा गांव में करीब 930 मीटर एरिया में बांध न होना है। हेमामाजरा के उस 930 मीटर क्षेत्र के आगे और पीछे भी बांध बना है। बीच में बचे इस हिस्से के चलते हेमामाजरा सहित सोहाना, घेलड़ी, राजौली, तंदवाल, खानपुरा और राउमाजरा होते हुए शाहबाद क्षेत्र की फसलें मारकंडा नदी के पानी की चपेट में आती हैं।
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इसके बावजूद विभाग द्वारा इस जगह पर बांध बनाने का दावे करने के बावजूद भी बाढ़ आने के 11 महीने बाद भी हालात जस के तस है। किसान मान सिंह, नंबरदार संदीप सिंह बलविन्द्र सिंह,अशविन्द्र सिंह, धूम सिंह, रमेश कुमार, प्रीतपाल सिंह, जितेन्द्र सिंह ने बताया कि जुलाई 2023 में आई बाढ़ के बाद से ही स्थानीय किसानों सहित अन्य गांवों की पंचायतों ने हेमामाजरा में बांध बनाने के प्रयास शुरू कर दिए थे। उन्होंने प्रशासनिक, विभागीय सहित राजनीतिक प्रयास किए । बांध बनाने के लिए किसानों ने सिंचाई विभाग को जमीन देने के लिए एफिडेविट भी दे दिए हैं।
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आपदा प्रबंधन सुचारू तरीके से हो इसके लिए किसान अपनी जमीन निशुल्क देने तक को तैयार हैं। गांव के किसानों द्वारा सरकार को दिए गए उनकी भूमि के अधिग्रहण के लिए शपथ पत्र की प्रतियां भी दिखाईं। उन्होंने बताया कि अभी फरवरी 2024 में ग्राम सभा में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के समक्ष इस प्रकल्प का लगभग पूरा मसौदा तैयार हो गया था। उस समय अधिकारियों ने उन्हें टेंडर होने के उपरांत 15 दिन में यानि गेहूं की कटाई के बाद तुरंत बांध बनाने की बात कही थी, लेकिन हालात आज भी जस के तस बने है।
उन्होंने कहा कि किसान तो 11 महीने से बांध बनाने की बात कह रहे हैं, लेकिन विभाग सोया हुआ है। विभाग की लेटलतीफी के चलते बरसात के समय फिर से किसानों की फसलें जलमग्न हो सकती है, क्योंकि उक्त जगह आज भी बांध नहीं बनाया गया है ना ही कोई अन्य ऐसा तरीका किया, जिससे हेमामाजरा की तरफ पानी आने से रुक सके ।

मारकंडा नदी का चौड़ा हो रास्ता :

किसानों ने मांग की है कि बाढ़ के बाद मारकंडा नदी का रास्ता संकरा हो गया है। साथ ही अधिकतर हिस्से में रेत के टापू जैसे हिस्से बन गए है। इसके चलते अब मारकंडा नदी में पांच से छह फीट पानी आने पर भी पानी खेतों की तरफ आकर फसल का नुकसान करता है। जबकि पहले यह हाल 8 फीट पर नहीं होता था। विभाग द्वारा उन टापू जैसे हिस्सों को हटाकर मारकंडा नदी के रास्ते को चौड़ा करना और किनारे मजबूत करने चाहिए। जिससे पानी नदी के रास्ते से ही गुजरे ।





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बांध बनाने के लिए एलाइनमेंट अप्रूव हो गया है। अब यह लैंड ई भूमि पोर्टल पर चढ़ जाएगी। इसके तहत किसानों के रजामंदी पर किसानों की जमीनें एक्वायर की जाएंगी। इसके बाद टेंडर प्रकिया शुरू होगी। हालांकि स्थिति को देखते हुए मौके पर कोई अन्य तरीके से भी मारकंडा नदी के पानी को गांव की तरफ आने से रोकने का प्रयास किया जाएगा।

-एके रघुवंशी, एसई, सिंचाई विभाग
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आचार संहिता के चलते बांध बनाने के कार्य में देरी हुई है। अब ई भूमि पोर्टल पर किसानों के कागजात अपलोड होंगे। जिसके बाद स्कीम अप्रूवल के लिए भेजी जाएगी। यह प्रकिया अपना समय लेगी। फिलहाल हेमामाजरा में कोई न कोई अस्थायी समाधान किया जाएगा।
-कृष्ण भुक्कल, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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