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वैज्ञानिकों की सलाह पर उर्वरकों का प्रयोग करें किसान
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शहजादपुर। उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से गांव जटवाड़ में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता शमशेर सिंह, उप महाप्रबंधक, इफको चंडीगढ़ ने की। कृषि विज्ञान केंद्र तेपला से वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 80 से अधिक किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रवीण कुमार, सहायक प्रबंधक इफको ने बताया कि यूरिया का अत्यधिक प्रयोग जमीन के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डाल रहा है।
उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण जमीन के जैविक कार्बन में लगातार गिरावट आ रही है व लाभदायक जीवाणुओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि जमीन के स्वास्थ्य में सुधार के लिए उर्वरकों का प्रयोग कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशों के अनुसार करें। शमशेर सिंह ने बताया कि फसलें यूरिया उर्वरक का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही ग्रहण कर पाती हैं। बाकी 70 प्रतिशत हिस्सा भूमिगत जल व पर्यावरण को नाइट्रस ऑक्साइड व नाइट्रेट के रूप में प्रदूषित कर रहा है।
इसके विकल्प के तौर इफको द्वारा नैनो यूरिया का विकास किया है जिससे फसलों में इस्तेमाल होने वाली यूरिया की आधी मात्रा में कमी लाई जा सकती है। यह जमीन के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा। इसके उपयोग से फसलों की पैदावार में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी पाई गई है। इसका पहला छिड़काव बुवाई के 30-35 दिन बाद व दूसरा छिड़काव फसल के निसारे से पहले करें।
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दलहनी फसलें जमीन के लिए लाभदायक
डॉ. राजेन्द्र सिंह ने बताया कि फसल चक्र में दलहनी फसलों के समावेश से जमीन में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है व अगली फसल में यूरिया की मात्रा में 25 प्रतिशत की बचत की जा सकती है। दलहनी फसलों को खेत में दबाने से जैविक कार्बन में वृद्धि होती है जो जमीन की भौतिक दशा में सुधार करता है। धर्मवीर, बीटीएम, कृषि विभाग ने मेरा पानी-मेरी विरासत, धान की सीधी बिजाई योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए कृषि विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाएं।
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उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण जमीन के जैविक कार्बन में लगातार गिरावट आ रही है व लाभदायक जीवाणुओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि जमीन के स्वास्थ्य में सुधार के लिए उर्वरकों का प्रयोग कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशों के अनुसार करें। शमशेर सिंह ने बताया कि फसलें यूरिया उर्वरक का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही ग्रहण कर पाती हैं। बाकी 70 प्रतिशत हिस्सा भूमिगत जल व पर्यावरण को नाइट्रस ऑक्साइड व नाइट्रेट के रूप में प्रदूषित कर रहा है।
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इसके विकल्प के तौर इफको द्वारा नैनो यूरिया का विकास किया है जिससे फसलों में इस्तेमाल होने वाली यूरिया की आधी मात्रा में कमी लाई जा सकती है। यह जमीन के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा। इसके उपयोग से फसलों की पैदावार में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी पाई गई है। इसका पहला छिड़काव बुवाई के 30-35 दिन बाद व दूसरा छिड़काव फसल के निसारे से पहले करें।
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दलहनी फसलें जमीन के लिए लाभदायक
डॉ. राजेन्द्र सिंह ने बताया कि फसल चक्र में दलहनी फसलों के समावेश से जमीन में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है व अगली फसल में यूरिया की मात्रा में 25 प्रतिशत की बचत की जा सकती है। दलहनी फसलों को खेत में दबाने से जैविक कार्बन में वृद्धि होती है जो जमीन की भौतिक दशा में सुधार करता है। धर्मवीर, बीटीएम, कृषि विभाग ने मेरा पानी-मेरी विरासत, धान की सीधी बिजाई योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए कृषि विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाएं।