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Ambala News: विशेषज्ञों का दर्द, बिना काॅलेज को शामिल किए बनाए कोर्स
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अंबाला। छावनी के राजकीय पीजी कॉलेज में नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद से आ रही समस्याओं पर मंथन कार्यक्रम हुआ। उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से इसमें अंबाला मंडल के छह जिलों के कॉलेज प्राचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम का नाम भी सुझाव से समाधान रखा।
इस दौरान प्राचार्यों का दर्द खुलकर सामने आया। किसी ने उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. हेमंत वर्मा को बताया कि नई शिक्षा नीति में विश्वविद्यालय की ओर से जो कोर्स बनाए उसमें कॉलेजों को शामिल नहीं किया। इसका असर ये हुआ कि जो कोर्स बने उसमें क्षमता से अधिक पाठ्य सामग्री दे दी।
माइनर और मेजर के पाठ्यक्रम के लिए दिक्कत आ रही है। दोनों के बीच में सामंजस्य बैठाना, समय का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है। सभी समस्याओं को संयुक्त निदेशक ने जवाब दिए और समाधान भी बताया। इस दौरान राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य अजीत सिंह भी उपस्थित रहे।
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ऐहतियात से बनाई नीति, मगर कई कमियां
शिक्षाविदों ने बताया कि नई शिक्षा नीति कॉलेजों में लागू कर दी है। यह अच्छा प्रयास है। इस नीति को विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर बनाया है। इस बार क्रेडिट सिस्टम लागू किया है। मगर समस्या यह है कि अगर कोई विद्यार्थी किसी कोर्स में हरियाणा के किसी कॉलेज में दाखिला लेता है और एक साल पूरा करने के बाद अगर वह राजस्थान चला जाता है तो यह जरूरी है कि राजस्थान के उस कॉलेज में भी हरियाणा के कॉलेज जैसा कोर्स हो। अगर वह कोर्स वहां नहीं है तो विद्यार्थी कैसे पढ़ाई जारी रख सकेगा। ऐसे में यह देखना होगा कि यूनिवर्सिटी स्तर पर बनने वाले कोर्स दूसरे राज्यों में भी हूबहू हों तभी फायदा मिलेगा।
काॅलेज में संसाधनों का अभाव
नई शिक्षा नीति तो लागू कर दी गई है मगर कई सरकारी और एडिड कॉलेजों के पास संसाधन ही पर्याप्त नहीं है। जैसे अगर किसी विद्यार्थी को गणित के साथ संगीत विषय को पढ़ना है तो उस कॉलेज में संगीत विषय होना जरूरी है। अगर कॉलेज में संगीत विषय है तो उसका शिक्षक भी होना जरूरी है। ऐसे में अगर विद्यार्थी के पास यह विषय पढ़ने का विकल्प नहीं है तो वह मजबूरन रुचि से हटकर कोई दूसरा विषय पढ़ेगा।
परीक्षा में ही बीत रहा समय
नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद से विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि उन्हें परीक्षा से ही समय नहीं मिल रहा है। पहले माइनर विषयों की परीक्षा दे रहे हैं फिर मेजर विषयों की परीक्षा दे रहे हैं। ऐसे में एक के बाद एक परीक्षा से उनका पूरा समय परीक्षा में जा रहा है।
12 जनवरी से दो फरवरी तक दे सकेंगे सुझाव
कार्यशाला में उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक हेमंत वर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति प्रदेश में वर्ष 2020 में लागू हो गई थी। इस पर विस्तृत चर्चा की जरूरत समझी गई। इसी के तहत हरियाणा के छह मंडलों में नई शिक्षा नीति के तहत चर्चा के लिए कार्यशाला आयोजित करने की योजना बनाई गई। इसी के तहत अंबाला और करनाल मंडल के कॉलेजों की यह कार्यशाला है। इसी के तहत शिक्षाविदों, छात्रों से सुझाव लिए जा रहे हैं। 12 जनवरी को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शिक्षामंत्री की अध्यक्षता में उच्चतर शिक्षा विभाग एक पोर्टल शुरू करेगा। इस पोर्टल पर पूरे राज्य से नई शिक्षा नीति के लिए सुझाव दिए जा सकते हैं। दो फरवरी तक इस पोर्टल पर सुझाव लिए जाएंगे। इसके साथ-साथ हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में सुझाव पेटी भी रखी जाएंगी। सभी शिक्षकों और प्राचार्यों को इसमें सुझाव अनिवार्य रूप से देने हैं। इसके बाद गुरुग्राम में राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला गुरुग्राम में आयोजित हाेगी।
उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक से सीधी बात
प्रश्न : नई शिक्षा नीति में किस प्रकार की समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
जवाब : इसमें दिक्कतें समय प्रबंधन को लेकर दिक्कत है, क्रेडिट सिस्टम के लिए बच्चों की उपस्थिति के लिए कुछ परेशानियां हैं। सुझाव समाधान के साथ मांगे गए हैं।
प्रश्न- कोर्स बनाते समय कॉलेजों को शामिल नहीं किया गया है।
जवाब- अभी तक कोर्स बनाने का काम विश्वविद्यालय का होता है। कॉलेज प्राचार्यों का विषय है कि कोर्स बनाने वाले बोर्ड में उनका प्रतिनिधित्व नहीं है। उनके विचार पर मंथन किया जाएगा।
प्रश्न- कॉलेजों पर दबाव है कि उनके सत्र सरकारी कार्यक्रमों में निकल जाते हैं ऐसे में वह शिक्षा कब दें।
जवाब- नई शिक्षा नीति में बच्चों को हर तरीके से सक्षम बनाना है। मैं समझता हूं कि सरकारी कार्यक्रमों में हर विद्यार्थी शामिल नहीं होगा। ये चीजें भी जरूरी हैं।
प्रश्न- नई शिक्षा नीति में कोर्स अच्छे आ गए मगर शिक्षक ही उस स्तर पर तैयार नहीं हैं ऐसे में कैसे शिक्षा दी जाएगी।
जवाब- हमने नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षकों की ट्रेनिंग का एक मॉड्यूल रखा है। इसको लेकर हरियाणा सरकार शिक्षकों के ज्ञान को बढ़ाना उन्हें समृद्ध करने का काम भी आगे आने वाले समय में हम करेंगे।
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इस दौरान प्राचार्यों का दर्द खुलकर सामने आया। किसी ने उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. हेमंत वर्मा को बताया कि नई शिक्षा नीति में विश्वविद्यालय की ओर से जो कोर्स बनाए उसमें कॉलेजों को शामिल नहीं किया। इसका असर ये हुआ कि जो कोर्स बने उसमें क्षमता से अधिक पाठ्य सामग्री दे दी।
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माइनर और मेजर के पाठ्यक्रम के लिए दिक्कत आ रही है। दोनों के बीच में सामंजस्य बैठाना, समय का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है। सभी समस्याओं को संयुक्त निदेशक ने जवाब दिए और समाधान भी बताया। इस दौरान राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य अजीत सिंह भी उपस्थित रहे।
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ऐहतियात से बनाई नीति, मगर कई कमियां
शिक्षाविदों ने बताया कि नई शिक्षा नीति कॉलेजों में लागू कर दी है। यह अच्छा प्रयास है। इस नीति को विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर बनाया है। इस बार क्रेडिट सिस्टम लागू किया है। मगर समस्या यह है कि अगर कोई विद्यार्थी किसी कोर्स में हरियाणा के किसी कॉलेज में दाखिला लेता है और एक साल पूरा करने के बाद अगर वह राजस्थान चला जाता है तो यह जरूरी है कि राजस्थान के उस कॉलेज में भी हरियाणा के कॉलेज जैसा कोर्स हो। अगर वह कोर्स वहां नहीं है तो विद्यार्थी कैसे पढ़ाई जारी रख सकेगा। ऐसे में यह देखना होगा कि यूनिवर्सिटी स्तर पर बनने वाले कोर्स दूसरे राज्यों में भी हूबहू हों तभी फायदा मिलेगा।
काॅलेज में संसाधनों का अभाव
नई शिक्षा नीति तो लागू कर दी गई है मगर कई सरकारी और एडिड कॉलेजों के पास संसाधन ही पर्याप्त नहीं है। जैसे अगर किसी विद्यार्थी को गणित के साथ संगीत विषय को पढ़ना है तो उस कॉलेज में संगीत विषय होना जरूरी है। अगर कॉलेज में संगीत विषय है तो उसका शिक्षक भी होना जरूरी है। ऐसे में अगर विद्यार्थी के पास यह विषय पढ़ने का विकल्प नहीं है तो वह मजबूरन रुचि से हटकर कोई दूसरा विषय पढ़ेगा।
परीक्षा में ही बीत रहा समय
नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद से विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि उन्हें परीक्षा से ही समय नहीं मिल रहा है। पहले माइनर विषयों की परीक्षा दे रहे हैं फिर मेजर विषयों की परीक्षा दे रहे हैं। ऐसे में एक के बाद एक परीक्षा से उनका पूरा समय परीक्षा में जा रहा है।
12 जनवरी से दो फरवरी तक दे सकेंगे सुझाव
कार्यशाला में उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक हेमंत वर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति प्रदेश में वर्ष 2020 में लागू हो गई थी। इस पर विस्तृत चर्चा की जरूरत समझी गई। इसी के तहत हरियाणा के छह मंडलों में नई शिक्षा नीति के तहत चर्चा के लिए कार्यशाला आयोजित करने की योजना बनाई गई। इसी के तहत अंबाला और करनाल मंडल के कॉलेजों की यह कार्यशाला है। इसी के तहत शिक्षाविदों, छात्रों से सुझाव लिए जा रहे हैं। 12 जनवरी को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शिक्षामंत्री की अध्यक्षता में उच्चतर शिक्षा विभाग एक पोर्टल शुरू करेगा। इस पोर्टल पर पूरे राज्य से नई शिक्षा नीति के लिए सुझाव दिए जा सकते हैं। दो फरवरी तक इस पोर्टल पर सुझाव लिए जाएंगे। इसके साथ-साथ हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में सुझाव पेटी भी रखी जाएंगी। सभी शिक्षकों और प्राचार्यों को इसमें सुझाव अनिवार्य रूप से देने हैं। इसके बाद गुरुग्राम में राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला गुरुग्राम में आयोजित हाेगी।
उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक से सीधी बात
प्रश्न : नई शिक्षा नीति में किस प्रकार की समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
जवाब : इसमें दिक्कतें समय प्रबंधन को लेकर दिक्कत है, क्रेडिट सिस्टम के लिए बच्चों की उपस्थिति के लिए कुछ परेशानियां हैं। सुझाव समाधान के साथ मांगे गए हैं।
प्रश्न- कोर्स बनाते समय कॉलेजों को शामिल नहीं किया गया है।
जवाब- अभी तक कोर्स बनाने का काम विश्वविद्यालय का होता है। कॉलेज प्राचार्यों का विषय है कि कोर्स बनाने वाले बोर्ड में उनका प्रतिनिधित्व नहीं है। उनके विचार पर मंथन किया जाएगा।
प्रश्न- कॉलेजों पर दबाव है कि उनके सत्र सरकारी कार्यक्रमों में निकल जाते हैं ऐसे में वह शिक्षा कब दें।
जवाब- नई शिक्षा नीति में बच्चों को हर तरीके से सक्षम बनाना है। मैं समझता हूं कि सरकारी कार्यक्रमों में हर विद्यार्थी शामिल नहीं होगा। ये चीजें भी जरूरी हैं।
प्रश्न- नई शिक्षा नीति में कोर्स अच्छे आ गए मगर शिक्षक ही उस स्तर पर तैयार नहीं हैं ऐसे में कैसे शिक्षा दी जाएगी।
जवाब- हमने नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षकों की ट्रेनिंग का एक मॉड्यूल रखा है। इसको लेकर हरियाणा सरकार शिक्षकों के ज्ञान को बढ़ाना उन्हें समृद्ध करने का काम भी आगे आने वाले समय में हम करेंगे।